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बीआरओ ने तैयार किया नए रूटों का प्रस्ताव
देहरादून/ब्यूरो
Updated Sat, 10 Aug 2013 09:12 AM IST
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आपदा के बाद सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के लिए क्षतिग्रस्त मार्गों पर दोबारा निर्माण चुनौती बन गया है।
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कई जगह तो पुराने रूटों को सुधारना संभव नहीं हो पा रहा। ऐसे में बीआरओ नए रूट तलाशने को मजबूर है। अब बीआरओ ने उत्तरकाशी, चमोली और रुद्रप्रयाग तीनों जनपदों में कुछ संवेदनशील सड़क के हिस्सों के बदले नए रूट की मैपिंग का प्रस्ताव तैयार किया है।
मलबे की भेंट चढ़ रहा पुनर्निर्माण
बीआरओ का कई जगह पर किया पुनर्निर्माण लगातार बह रहे मलबे की भेंट चढ़ रहा है। सक्रिय भूस्खलन के साथ कई जगह सड़कें धंस रही हैं तो कुछ जगह तेज जल बहाव से निर्माण संभव नहीं हो पा रहा। संगठन उत्तरकाशी में भटवाड़ी के पास बड़े भूस्खलन जोन से जूझ रहा है।
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गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित गंगोरी गांव का क्षेत्र भी सक्रिय मलबा क्षेत्र है। रुद्रप्रयाग में 72 किलोमीटर पर सुखीटाप के अलावा चंद्रपुरी, धंस रहे सिम्मी गांव पर निर्माण संभव नहीं हो पा रहा है। बीआरओ ने ऐसे कई क्षेत्र चिह्नित किए हैं जिनपर अब सिर्फ वैकल्पिक रूट ही सड़कों को जोड़ सकते है।
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तीन प्रस्ताव तैयार किए
संगठन ने इसके लिए तीन प्रस्ताव भी तैयार किए हैं, जिसमें नए रूट, सुरंग और नए पुलों का निर्माण शामिल है। बीआरओ के प्रोजेक्ट शिवालिक के चीफ इंजीनियर केके राजदान ने बताया कि उत्तरकाशी में भूस्खलन के कई नए जोन विकसित हो गए हैं। रुद्रप्रयाग में अगस्त्यमुनि से गुप्तकाशी मार्ग पर नए रूट तलाशने पड़ेंगे। इसके अलावा लामबगड़ और सोनगंगा में पुलों का निर्माण होना है।
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