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...सरहद की सुरक्षा को कैसे बनेगा सुरक्षा चक्र! सीमा से लगे भारतीय हिस्से में निर्माणाधीन मार्ग का ये है हाल

Thu, 09 Jul 2020 11:33 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal चंद्रशेखर जोशी, अमर उजाला, चंपावत
चंद्रशेखर जोशी, अमर उजाला, चंपावत Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Thu, 09 Jul 2020 11:33 AM IST
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border security condition, delay in border road construction work
Indo nepal border - फोटो : अमर उजाला।

नेपाल सीमा से लगे भारतीय हिस्से में निर्माणाधीन टीजे (टनकपुर-जौलजीबी) मोटर मार्ग आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के साथ सामरिक नजरिए से बेहद अहम है।

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मगर इस रोड पर हो रही हीलाहवाली और विवाद सिस्टम की गंभीरता पर सवाल खड़ा कर रहा है। इसी के मद्देनजर निविदा में की गई ढिलाई के आरोप में लोक निर्माण विभाग के दो अधीक्षण अभियंताओं को 07 जुलाई को शासन निलंबित कर चुका है। इस सड़क के दूसरे फैज की क्या बात करें, चूका और रूपालीगाड़ को जोड़ने वाले पुल का काम भी तीन साल बाद शुरू नहीं हो सका है।
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टीजे रोड पर दूसरे पैकेज (चूका से रूपालीगाड़) के शुरुआती बिंदु चूका में चल्थी नदी पर 690 मीटर लंबे इस पुल की निविदा की प्रक्रिया 2017 में पूरी हो गई थी। ब्रिडकुल (ब्रिज, रोपवे, टनल एंड अदर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड) को करीब 33 करोड़ रुपये की लागत से बनाने वाले इस पुल की जिम्मेदारी दी गई थी।
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मगर छिटपुट सर्वे के अलावा पुल को लेकर कोई काम आज तक नहीं हुआ। चूका से आगे की रोड बनने का लाभ भी तभी होगा जब यह पुल तैयार होगा।

भारत-नेपाल सीमा पर स्थित बार्डर आउटपोस्ट तक पहुंच को सुगम बनाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 2015 में 135 किमी लंबे टीजे मार्ग को मंजूरी दी थी, लेकिन प्रस्तावित पंचेश्वर बांध के डूब क्षेत्र की अंतिम स्थिति साफ नहीं होने से रोड को जौलजीबी के बजाय ठुलीगाड़ से रूपालीगाड़ (42.275 किमी) तक ही स्वीकृत किया गया।

इस 42.275 किमी मार्ग पर भी साढ़े तीन साल बाद सिर्फ 20 किमी मार्ग की ही कटिंग हो सकी है। रोड बनने से बीओपी तक मजबूत आधारभूत ढांचा बनने के साथ नेपाल सीमा पर सुरक्षा चौकसी में सुगमता आती।

सीमा सुरक्षा के लिए इस इलाके में चंपावत और पिथौरागढ़ जिले की एसएसबी की 34 बीओपी में से रोड से कटी 19 बीओपी की सुविधा में इजाफा होता। इस वजह से यहां जरूरी सामग्री पहुंचाने में देरी और लागत भी ज्यादा आती है।

ब्रिडकुल के परियोजना प्रबंधक गंभीर सिंह का कहना है कि अनुबंध की शर्तो को लेकर हुए विवाद से पुल का काम शुरू नहीं हो सका। पुल के काम को जल्द शुरू कराने के लिए विभाग हर मुमकिन कोशिश कर रहा है। 

विधायक ने कहा-पुल के बगैर आगे की रोड को कोई औचित्य नहीं

टीजे रोड सामरिक महत्व की है, इन दिनों नेपाल से रिश्तों की गरमाहट में भी कमी आई है। मगर देश की सुरक्षा के लिए इतनी अहम सड़क को लेकर कार्यदाई संस्था का नजरिया तेजी से काम को आगे बढ़ाने का नहीं है। ये कहना है इस रोड को लेकर लगातार आवाज उठाने वाले लोहाघाट के विधायक पूरन सिंह फर्त्याल का।

कहते हैं कि ठुलीगाड़ से चूका तक के पहले चरण के काम में किसी तरह की न कोई अड़चन थी और न विवाद, मगर ये काम भी तीन साल में पूरा नहीं हो सका। आरोप लगाया कि चूका से रूपालीगाड़ तक के दूसरे पैकेज की टेंडरिंग में विभागीय मिलीभगत आड़े आ रही है। विभाग अपनी अक्षमता और री-टेंडरिंग में देरी को विवाद की आड़ में छुपा रहा है।

फर्त्याल ने कहा कि चूका और रूपालीगाड़ को जोड़ने वाले पुल को बनाने में ब्रिडकुल बेवजह देरी कर रहा है। इस पुल के निर्माण के बगैर आगे की रोड का कोई मतलब नहीं है। विधायक ने कहा कि देश की सुरक्षा व ग्रामीणों की सुविधा के मद्देनजर इस सड़क का गुणवत्ता के साथ जल्द निर्माण करने और काम में गड़बड़ियों को लेकर सदन में भी प्रमुखता से आवाज उठाई जाएगी।

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