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बॉलीवुड की पसंद है ये भव्य कैंपस
देहरादून/इंटरनेट डेस्क
Updated Wed, 14 Aug 2013 11:39 PM IST
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वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) उत्तराखंड राज्य की अस्थाई राजधानी देहरादून में स्थित है। 1906 में इंम्पीरियल फोरेस्ट इंस्टीट्यूट के रूप में स्थापित यह इंडियन काउंसिल ऑफ फोरेस्ट्री रिसर्च एंड एजूकेशन के अंतर्गत आने वाला एक प्रमुख संस्थान है। इसकी शैली ग्रीक रोमन वास्तुकला है।
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डीम्ड विश्वविद्यालय घोषित
इसका मुख्य भवन राष्ट्रीय विरासत है जिसका उद्घघाटन 1921 में हुआ था। वन क्षेत्र में अपने शोध कार्य के लिए प्रसिद्ध इस संस्थान को एशिया में अपनी तरह के एक मात्र संस्थान होने का गौरव प्राप्त है। 1991 में इसे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा डीम्ड विश्वविद्यालय घोषित कर दिया गया। संस्थान भारतीय वानिकी शोध और शिक्षा परिषद का एक संस्थान है। यह संस्थान भारत में वानिकी शोध के क्षेत्र में एक प्रमुख संस्थान है।
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आर्किटेक्चर
एफआरआई 4.5 किमी के क्षेत्रफल में फैला हुआ है। इसका मुख्य भवन वास्तुशिल्प यूनानी-रोमन और औपनिवेशिक शैली में बना हुआ है। वन अनुसंधान संस्थान में प्रयोगशालाएं, एक पुस्तकालय, वनस्पति-संग्रहालय, वनस्पति-वाटिका, मुद्रण-यंत्र और प्रायोगिक मैदानी क्षेत्र हैं। जिन पर वानिकी शोध किया जाता है।
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इसके संग्रहालय, वैज्ञानिक जानकारी के अतिरिक्त, पर्यटकों के लिए यह आकर्षण का केंद्र भी हैं। एफआरआई का मुख्य भवन किसी महल जैसा प्रतीत होता है जो कि बरबस ही अपनी ओर पर्यटकों को आकर्षित करता है।
भौगोलिक स्थिति
एफआरआई और कॉलेज प्रांगण एक जनगणना क्षेत्र है, इसके उत्तर में देहरादून छावनी और दक्षिण में भारतीय सैन्य अकादमी स्थित है। टोंस नदी इसकी पश्चिमी सीमा बनाती है। देहरादून के घंटाघर से इस संस्थान की दूरी लगभग 7 किमी है।
अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जाता है यहां
संस्थान में वानिकी के शोध कार्यों समेत भारतीय वन सेवा के अधिकारियों को प्रशिक्षण भी दिया जाता है, क्योंकि भारतीय वानिकी शोध और शिक्षा परिषद जो इस संस्थान का संचालन करता है, आईएफएस (इंडियन फॉरेस्ट सर्विस) भी चलाता है। साथ ही वानिकी शोध और शिक्षा परिषद के द्वारा भारतीय वन्यजीव संस्थान और भारतीय वन प्रबंधन संस्थान भी संचालित किए जाते हैं।
संग्रहालय
संग्रहालय प्रतिदिन प्रातः 9.30 से शाम 5 बजे तक आम लोगों के लिए खुला रहता है। संस्थान के म्यूजियम और अन्य हिस्सों को देखने के लिए प्रवेश शुल्क रखा गया है। इस संग्रहालय में छः अनुभाग हैं।
पैथोलॉजी संग्रहालय
सामाजिक वानिकी संग्रहालय
वन-वर्धन संग्रहालय
लकड़ी संग्रहालय
अकाष्ठ वन उत्पाद संग्रहालय
कीटविज्ञान संग्रहालय