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उत्तराखंड में फिल्म और एक्टिंग इंस्टीट्यूट खोलेंगे तिग्मांशु धूलिया, बनाना चाहते हैं पहाड़ी फिल्में

Tue, 04 Feb 2020 11:25 AM IST
अलका त्यागी अनिल चन्दोला, अमर उजाला, मसूरी
अनिल चन्दोला, अमर उजाला, मसूरी Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 04 Feb 2020 11:25 AM IST
सार

  • नेशनल अवॉर्ड विनर फिल्म डायरेक्टर तिग्मांशु धूलिया ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में साझा की जानकारी
  • अच्छी फिल्में बनाने से मजबूत होगा आंचलिक सिनेमा, सरकार बजट दे तो मैं बनाऊंगा फिल्म

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Bollywood Director Tigmanshu Dhulia will open film and acting institute in Uttarakhand
फिल्म डायरेक्टर तिग्मांशू धूलिया - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

नेशनल अवॉर्ड विनर फिल्म डायरेक्टर तिग्मांशु धूलिया उत्तराखंड में फिल्म और एक्टिंग इंस्टीट्यूट खोलेंगे। इसके लिए जमीन तलाशने का काम चल रहा है। अमर उजाला से विशेष बातचीत में उन्होंने यह जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि कनेक्टिविटी को देखते हुए उनका फोकस दून के आसपास के इलाकों पर है।

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 तिग्मांशु धूलिया ने बताया कि सिंगापुर की एक कंपनी इंस्टीट्यूट के लिए निवेश करने को तैयार है। इसके जरिये युवाओं को एक्टिंग और टीवी व फिल्म के तकनीकी पहलुओं की प्रोफेशनल ढंग से जानकारी दी जाएगी।
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एक्टिंग के दौरान डायलॉग डिलीवरी, बॉडी लैंग्वेज, एक्सप्रेशन जैसी आवश्यक चीजें सिखाई जाएंगी। उन्होंने कहा कि रोजाना हजारों लोग हीरो बनने की चाह में मुंबई आते हैं। इनमें से 99 फीसदी लोगों को एक्टिंग की एबीसीडी भी नहीं आती। शक्ल-सूरत ठीक होने का मतलब नहीं कि आप हीरो बन जाओगे। 

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सस्ती पब्लिसिटी ठीक नहीं

उन्होंने कहा कि अभिनेता बनने की इच्छा रखने वालों को कम से कम तीन साल किसी अच्छे एक्टिंग इंस्टीट्यूट से कोचिंग करनी चाहिए। आजकल ज्यादातर फर्जी एक्टिंग स्कूल खुल रहे हैं, जो फिल्म कलाकारों और डायरेक्टर के साथ फोटो दिखाकर युवाओं को धोखा दे रहे हैं।

उन्होंने जामिया में हुई बंदूकबाजी की घटना को सस्ती पब्लिसिटी के लिए उठाया कदम बताया। तिग्मांशु ने कहा कि आज हर कोई फेम में आना चाहता है। गलत काम करने वाला जल्दी चर्चा में आता है। नतीजा चाहे जो भी, लेकिन आज बंदूक लहराने वालों को सब जानते हैं।

फंड दो, मैं बनाऊंगा गढ़वाली फिल्म
उत्तराखंड में गढ़वाली-कुमाऊंनी की अच्छी फिल्में नहीं बनतीं। जो कुछ फिल्में बनी, उनमें से ज्यादातर पुरानी हिंदी फिल्मों की नकलभर है। लोगों को आंचलिक सिनेमा की तरफ ले जाने के लिए अच्छी फिल्में बनानी होंगी। सरकार अगर फंड की व्यवस्था करे, तो मैं फिल्म बनाने को तैयार हूं। बंगला, मलयालम और मराठी सिनेमा की तरह हमें अवॉर्ड विनिंग फिल्में बनानी होंगी।

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