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बोर्डिंग स्कूल सामूहिक दुष्कर्म प्रकरण: साक्ष्य थे कम, फिर भी इस आधार पर तय हुई नाबालिगों की सजा

Tue, 04 Feb 2020 04:30 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Tue, 04 Feb 2020 04:30 AM IST
सार

  • सुबूतों के अभाव में किशोर न्याय बोर्ड ने कर दिया था तीनों को बरी 
  • वैज्ञानिक साक्ष्य कम थे, लेकिन कई अहम गवाहियों से मिला बल 

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Boarding School Sexual assault case: evidence was less, punishment of minors decided on this basis
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

विस्तार

सामूहिक दुष्कर्म के मामले में नाबालिग छात्रों की सजा का आधार सिर्फ पीड़िता की आपबीती की कहानी ही बनी है। बचाव पक्ष की तमाम दलीलें पीड़िता की कहानी के आगे नहीं ठहर सकी। इसके अलावा इस मुकदमे में वैज्ञानिक साक्ष्यों की कमी के चलते कई अहम गवाहियां ऐसी रहीं, जिनसे अभियोजन की कहानी को बल मिला और सभी आरोपियों को जेल भेजा जा सका।

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दरअसल, तीन नाबालिगों को किशोर न्याय बोर्ड ने यह कहते ही बरी कर दिया था कि जुर्म साबित होने को पर्याप्त सुबूत नहीं हैं। ऐसे में अभियोजन ने छह माह पहले स्पेशल पोक्सो कोर्ट में इस फैसले के खिलाफ अपील की थी। इस पर भी साथ-साथ ही सुनवाई चलती रही।

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10 हजार रुपये का जुर्माना

बचाव पक्ष ने तर्क दिया था कि सभी नाबालिग और पढ़ने लिखने वाले छात्र हैं। इनका कोई आपराधिक इतिहास भी नहीं है, लिहाजा इनके साथ नरमी बरती जाए। मगर, न्यायालय ने इसमें केवल पीड़िता के बयानों को ही आधार बनाया। अदालत ने माना कि पीड़िता के साथ चारों छात्रों ने दुष्कर्म किया था। ऐसे में जो आरोप उसने सर्वजीत पर लगाए हैं वही इन पर भी हैं।

ऐसे में यह कहते हुए कि ये नाबालिग हैं उनको बरी नहीं किया जा सकता है। पीड़िता की आपबीती दर्दनाक है और सिर्फ वैज्ञानिक साक्ष्यों के अभाव में अपराधी बरी होने के काबिल नहीं हैं। अदालत ने 16 वर्ष से अधिक आयु वाले नाबालिग पर ही 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। इससे कम वालों के खिलाफ सिर्फ सजा का ही ऐलान किया गया है। 
 

कुछ अहम गवाहियां 

- तत्कालीन एसडीएम विकासनगर, जिनके संज्ञान में लाकर यह कार्रवाई की गई। 
- जिला बाल कल्याण समिति के सदस्यों की गवाही। इनके सामने ही गिरफ्तारियां हुईं।
- लड़की के पिता की कॉल डिटेल, जिससे सिद्ध हुआ कि वे 16 सितंबर 2018 की रात सूचना के बाद ही दिल्ली से चले थे। 
- लड़की के पिता की आवाज के सैंपलों की जांच रिपोर्ट, जिसमें पुष्ट हुआ कि यह उनकी ही आवाज है। 
- तत्कालीन एसओ सहसपुर नरेश राठौर, जिनके पर्यवेक्षण में सारी कार्रवाई हुई।

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आरोपी अंतिम समय तक देते रहे कोर्ट में प्रार्थनापत्र 

सामूहिक दुष्कर्म के प्रकरण में आरोपियों ने कोर्ट को गुमराह करने में भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। ट्रायल पूरा होने के बाद से लगातार आरोपियों ने प्रार्थनापत्र प्रस्तुत किए। अंतिम दिन भी साक्ष्य प्रस्तुत करने का दावा किया, लेकिन कोर्ट ने इन सभी प्रार्थनापत्रों को आधारहीन बताया। 

दरअसल, गत 15 जनवरी के बाद ही अदालत में इस मुकदमे का ट्रायल पूरा हो चुका था। इसके बाद भी आरोपियों की ओर से प्रार्थनापत्र दिया गया कि वे अपने बचाव में कुछ साक्ष्य प्रस्तुत करना चाहते हैं। इसके लिए 28 जनवरी की तिथि नियत की गई। इस तिथि में भी बचाव पक्ष की ओर से कोई ऐसा साक्ष्य प्रस्तुत नहीं हुआ जिससे उनकी बेगुनाही साबित हो सके। 

अब सोमवार के दिन दोष सिद्ध की घोषणा होने से पहले भी कुछ लोगों ने प्रार्थनापत्र अदालत में दाखिल कर दिया। फिर से यही दलील दी गई कि वे कुछ साक्ष्य प्रस्तुत करना चाहते हैं, जिससे उन पर लगाए गए सारे आरोप निराधार साबित हो जाएंगे, लेकिन अदालत ने इन सब दलीलों को खोखला माना। अदालत के अनुसार इस तरह के प्रार्थनापत्रों के चलते पहले ही फैसला काफी लेट हो चुका है, लिहाजा अब इसे आगे बढ़ाना उचित नहीं होगा। अदालत ने इन प्रार्थनापत्रों को औचित्यपूर्ण नहीं बताया और इन्हें खारिज करते हुए दोष सिद्धि की घोषणा कर दी। लंच के बाद सभी दोषियों को सजा का ऐलान किया गया।

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