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यह फायदा जानने के बाद जरूर करेंगे रक्तदान

Tue, 04 Mar 2014 04:05 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 04 Mar 2014 04:05 PM IST
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blood donors club of amar ujala dehradun

तरह-तरह की भ्रांति होने से लोग रक्तदान करने से कतराते हैं। ब्लड बैंकों में जाकर देखें तो बहुत से तीमारदार मिलते हैं जो खुद रक्तदान करने के बजाए पैसे से खून खरीदना चाहते हैं।

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सेहत बनती है और रक्त संचार सुधरता है
दरअसल, ऐसे लोग भ्रम में होते हैं। उन्हें लगता है कि खूनदान करने से कमजोरी हो जाती है। जबकि सचाई यह है कि रक्तदान से व्यक्ति की सेहत बनती है और रक्त संचार सुधर जाता है।
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अमर उजाला फाउंडेशन ब्लड डोनर्स क्लब के सदस्यों ने रक्तदान के संबंध में समाज में फैली कई तरह की भ्रांतियों के बारे में जिक्र किया। दून अस्पताल के ब्लड बैंक में इस तरह की भ्रांतियों के साथ जी रहे बहुत से लोग देखने को भी मिले।
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दून अस्पताल के ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. एसके नौटियाल ने बताया कि इस वक्त भ्रांतियों को दूर करने की बहुत जरूरत है।

ब्लड बैंकिंग के कार्य से 11 सालों से जुड़े डॉ. नौटियाल का कहना है कि अगर हर व्यक्ति स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति जागरूक हो जाए तो किसी मरीज को खून की कमी नहीं पड़ेगी।

रक्तदान के फायदे लोग जान लेंगे तो उन्हें हिचक नहीं होगी। बताया कि कुछ लोग समझते हैं कि एक हफ्ता खाना खाने से एक बूंद खून बनता है। अगर खून देंगे तो दिक्कत होगी। यह बात गलत है।


और वह फरिश्ते की तरह आया...
डॉ. एसके नौटियाल अपना अनुभव बताया। उन्होंने बताया कि घटना तीन साल पहले की है। एक मरीज की शादी हुए केवल तीन दिन हुए थे। उसकी हालत सीरियस थी।

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उसके लिए बी निगेटिव ब्लड की जरूरत थी। इस ग्रुप का खून मिल नहीं रहा था। उसके घरवाले परेशान और रो रहे थे।

तभी एक शख्स आया। उसका ब्लड ग्रुप टेस्ट किया गया तो मरीज से मैच हो गया। जल्दी-जल्दी जांचें कीं गईं और ब्लीड कराना शुरू किया।

जैसे ही ब्लड निकला। वह उठा और चला गया। नाम भी नहीं पूछ पाए उसका। ब्लड बैंक की फ्रूटी तक नहीं पी उसने।

जीवनदात्री बनना चाहें यह युवतियां
रक्तदान, जीवनदान। यह सबक बेहद पढ़े-लिखों को बेशक बताने की जरूरत नहीं, लेकिन अपने दून में ऐसी कई युवतियां महिलाएं हैं।

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जिन्होंने भले ही अधिक पढ़ाई न की हो, लेकिन खून देने से किसी की जान बचाई जा सकती है, यह सबक उन्होंने बखूबी पढ़ा है।

सोमवार को अमर उजाला में दिए गए मोबाइल नंबर पर ऐसी कई महिलाओं ने एसएमएस भेजे, जिन्हें ब्लड ग्रुप नहीं पता, लेकिन वह खून देने की इच्छुक हैं। केदारपुरम की निशा, निरंजनपुर की मंजु ऐसी ही युवतियों में शुमार हैं।

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शिक्षा के नाम पर उन्होंने 12वीं कक्षा पास की है। इससे पहले रक्तदान को लेकर किसी ने उनसे न कहा और न ही जागरूकता जगाई, लेकिन अमर उजाला फाउंडेशन की मुहिम देखकर उनके भीतर रक्तदान की इच्छा जागी है।

उनके बकौल, अगर उनका खून किसी के काम आ सकता है तो उनके लिए इससे अधिक खुशी की कोई बात नहीं होगी।

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