फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   blood comes into Wild Sheep eyes in gangotri national park

यहां भेड़ों की आंखों से टपक रहा खून, डॉक्टर भी नहीं समझ पा रहे रहस्यमयी बीमारी

Fri, 01 Dec 2017 07:45 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, उत्तरकाशी
ब्यूरो/अमर उजाला, उत्तरकाशी Updated Fri, 01 Dec 2017 07:45 PM IST
विज्ञापन
blood comes into Wild Sheep eyes in gangotri national park

यहां भरल यानी ब्लू शिप(जंगली भेड़) में एक रहस्यमयी बीमारी हो गई है। उनकी आंखे बाहर की तरफ निकल रही हैं और उनसे खून भी टपक रहा है। डॉक्टर भी भेड़ों की इस बीमारी को समझ नहीं पा रहे हैं।

विज्ञापन


गंगोत्री नेशनल पार्क में भरल (ब्लू शीप) के अज्ञात बीमारी की चपेट में आने की जानकारी जुटाने के लिए नेहरू पर्वतारोहण संस्थान व वन विभाग का एक दल घटना स्थल के लिए रवाना होगा।
विज्ञापन


पार्क प्रशासन की ओर से दल को स्थान में जाकर जानकारी जुटाने व बीमार भेड़ों को खोजने के आदेश दिए गए हैं। वहीं, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक डीबीएस खाती की ओर से संबंधित मामले में इंडियन वेटरनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (आईवीआरआई) बरेली को पत्र लिखकर रोग की गहन जांच करने का आग्रह किया गया है, जिसके लिए स्नो लेपर्ड प्रोजेक्ट के तहत धनराशि प्रदान की जाएगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

जा रही आंखों की रोशनी

blood comes into Wild Sheep eyes in gangotri national park

कुछ माह पूर्व बीएसएफ के असिस्टेंट कमांडेंट लवराज सिंह धर्मशक्तू के नेतृत्व में पर्वतारोहण अभियान में गए दल को गंगोत्री पार्क के केदार ताल क्षेत्र में कुछ बीमार भरल दिखीं थी, जो किसी अज्ञात बीमारी के कारण अंधी हो गई थी।

इनमें से कुछ भरल की आंखें बाहर निकल आई थी। दो भरल मरे मिले थे। मामले की जानकारी मिलने पर पार्क प्रशासन की ओर से भरल के एक बीमार बच्चे को इलाज के लिए लाया गया था, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इसके बाद विभाग की ओर से आईवीआरआई को बीमारी की जांच के लिए शव के नमूने भेजे गए थे।

पार्क के उप निदेशक श्रवण कुमार के अनुसार आईवीआरआई को भेजे नमूनों में फेफड़ों में वायरस की बात सामने आई है। उन्होंने कहा कि भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिकों के दल भी लंबे समय से पार्क के विभिन्न क्षेत्रों में शोध कर रहे हैं। लेकिन उनकी तरफ से भी इस तरह की किसी घटना की जानकारी नहीं मिली है।

आमतौर पर वन्य जीवों को पालतू पशुओं से बीमारी फैलने का डर होता है, लेकिन केदार ताल क्षेत्र में इस तरह का हस्तक्षेप भी न के बराबर है। ऐसे में हो सकता है कि कुछ जीवों को किसी चोट या इंफेक्शन की वजह से यह बीमारी हुई हो, जिसकी गहन जांच के लिए आईवीआरआई से मदद मांगी गई है। निम व वन कर्मचारियों के एक दल को बीमार भेड़ों को ढूंढने व अधिक जानकारी जुटाने के लिए संबंधित स्थल पर भेजा जा रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed