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यहां बीजेपी का हाल, अब ‘करो या मरो’
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 25 Sep 2017 03:30 PM IST
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AMIT SHAH dehradun visit
- फोटो : file photo
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बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह का प्रवास तो हो गया, लेकिन प्रदेश नेतृत्व का असल इम्तिहान बाकी है। जिस तरह शाह ने प्रदेश संगठन पर सवाल खड़े किए हैं, वह प्रदेश नेतृत्व के लिए कठिन चुनौतियों की ओर इशारा है।
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प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट से लेकर प्रदेश महामंत्री संगठन संजय कुमार को ‘खोई प्रतिष्ठा’ वापस पाने के लिए अब जी-तोड़ मेहनत करनी होगी। दोनों के सामने अब खुद को साबित करने का अहम लक्ष्य भी है। दरअसल, शाह ने यह महसूस किया है कि भले ही उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में पार्टी को प्रचंड बहुमत मिला हो, लेकिन संगठन की क्षमता आने वाली चुनावी चुनौतियों के लिहाज से अपडेट नहीं हैं। इसलिए कहा जा सकता है कि प्रदेश बीजेपी के लिए शाह अब ‘करो या मरो’ जैसी स्थिति छोड़कर गए हैं।
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देखा जाए, तो संगठन की लचर कार्यशैली को जिस तरह से शाह ने महसूस किया है, वह छिपी बात भी नहीं रही है। शाह के आने से हफ्ता भर पहले ही कई विभाग, प्रकल्पों के पदाधिकारी नियुक्त किए गए। इसके अलावा, मोर्चों के ढीले कामकाज को शाह ने खुद प्वाइंट आउट किया। प्रदेश कार्य समिति की बैठकें समय पर न होने से शाह बेहद नाराज नजर आए।
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संगठन के काम की जगह अध्यापन को ज्यादा तरजीह देने वाले प्रदेश अध्यक्ष के बेहद करीबी एक मोर्चा अध्यक्ष पर शाह ने खास तौर पर टिप्पणी की। कई बैठकों में संगठनात्मक अव्यवस्था के लिए महामंत्री संगठन से मुखातिब होकर जिस तरह से शाह ने बात की, वो भी अपने आप में काफी कुछ बयां कर गया। इन स्थितियों के बीच, शाह के दौरे के संकेत ये उभरे हैं कि संगठनात्मक कमजोरी के बावजूद फिलहाल बदलाव के पक्ष में हाईकमान नहीं है। मगर बीजेपी के कुछ सूत्रों का ये भी दावा है कि आज, नहीं तो कल महत्वपूर्ण बदलाव होकर रहेंगे।
इधर, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट का कहना है कि पूरे देश में राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का प्रवास हुआ है। मकसद ये ही रहा है कि सुधार के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। उत्तराखंड के संगठन को लेकर भी उन्होंने ठोस सुझाव दिए हैं, जिस पर अमल कर पार्टी और मजबूत स्थिति में पहुंचेगी।
संगठन मंत्री को चुनाव थोडे़ लड़ना है
बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के प्रवास के दौरान गोपनीय बैठकों से जुडे़ खुलासे धीरे-धीरे हो रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, संगठनात्मक कमजोरी के सवाल पर जब महामंत्री संगठन ने यह जवाब दिया कि कोई बात सुनता ही नहीं, तो शाह ने तल्ख टिप्पणी की। उन्होंने कहा-संगठन मंत्री को कोई चुनाव थोड़े लड़ना है। इसलिए लिहाज करने का कोई मतलब नहीं है। संगठन के हित में जो हो, वो कदम उठाए जाने चाहिए।
राष्ट्रीय कार्य समिति को लेकर चर्चा
दिल्ली में बीजेपी की राष्ट्रीय कार्य समिति की बैठक में प्रदेश बीजेपी का जिक्र किस रूप में होगा, इसको लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं। शाह के उत्तराखंड प्रवास के तुरंत बाद यह राष्ट्रीय कार्यसमिति आयोजित हो रही है। शाह उत्तराखंड में संगठन की तमाम कमियों को उजागर करके गए हैं। ऐसे में राष्ट्रीय कार्य समिति की अध्यक्षता करते हुए वह उत्तराखंड के अनुभवों को किस तरह से बाकी राज्यों के सामने रखते हैं, इसको लेकर चर्चाएं हैं। राष्ट्रीय कार्य समिति की बैठक के लिए बीजेपी के प्रमुख नेता दिल्ली पहुंच चुके हैं।