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अपने बयान से एक बार फिर विवादों में पड़ सकते हैं हरक सिंह, जानिए इस बार क्या बोले

Tue, 29 Jan 2019 08:51 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Tue, 29 Jan 2019 08:51 AM IST
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BJP leader controversial statement in Uttarakhand
हरक सिंह रावत - फोटो : file photo

‘मैंने अफसरों को कह रखा है कि छोटे कर्मचारियों के हितों में तुम्हारी कलम कांपने लगे तो पत्रावली मुझको भेज दो, मैं निर्णय लूंगा। जेल जाना होगा तो मैं जाऊंगा। मैं 28 साल मंत्री रहा। मैंने ‘आउट ऑफ द वे’ जाकर फैसले लिए।

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मेरी नीयत साफ थी, इसलिए जेल नहीं गया। यदि हमारी नीयत में खोट है तो निश्चित रूप से हम निर्णय नहीं ले पाएंगे।’ यह कहना है कि बेबाक बयानबाजी के लिए मशहूर कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत का। रावत सोमवार को उत्तरांचल फेडरेशन ऑफ मिनिस्टीरियल सर्विसेज एसोसिएशन के द्विवार्षिक प्रांतीय अधिवेशन को संबोधित कर रहे थे। अधिवेशन में जुटे मिनिस्टीरियल कर्मियों के हितों की पैरवी करते हुए डॉ. रावत ने सरकार और सिस्टम पर तंज किए। 
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उन्होंने यह कहकर व्यथा भी जाहिर की कि ‘कई बार सच कहना मुझे मुसीबत में डाल देता है और अखबारों को मौका मिल जाता है।’ लेकिन ये सब जानते हुए भी रावत पूरी बेबाकी के साथ बोले। उन्होंने कहा, मैं साफ कह रहा हूं, प्रदेश में मुख्यमंत्री, मंत्रियों और सरकारों के बलबूते पर परिवर्तन नहीं होगा। परिवर्तन यदि होगा तो प्रदेश के छोटे कर्मचारियों के दम पर होगा। जिम्मेदार पदों पर जो लोग हैं, उन्हें बड़ा दिल दिखाना होगा।
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 डॉ. रावत नौकरशाही की बढ़ती फौज पर कटाक्ष करने से नहीं चूके। उन्होंने कहा कि पहले 13 जिलाधिकारी थे। दो कमिश्नर थे। कुछ विभागों में एक दो आईएएस अफसर थे। हमने इनकी संख्या बढ़ाकर 100 से अधिक कर दिया।

 आईपीएस और पीसीएस अफसरों को फौज बढ़ गई। लेकिन जिस फौज को जमीन पर काम करना है, वो संकुचित होती चली गई। ये प्रदेश का दुर्भाग्य है कि जिसको कलम चलानी है, उन्हें कम किया जा रहा है। कर्मचारियों की मांगों पर सरकारी तंत्र की उदासीनता पर तंज करते हुए उन्होंने कहा कि जब हमें अपने हित के लिए कुछ करना हो तो सारे नियम टूट जाते हैं। तब जेल जाने की चिंता नहीं करते हैं। लेकिन छोटे कर्मचारियों को कुछ देना हो, या उनके हित में काम करना हो तो हमारी कलम डगमगाने लगती है। जेल जाने का डर सताने लगता है। उन्होंने कहा,‘ नीयत साफ होनी चाहिए। मुझे मंत्री के रूप में 28 साल हो गए, मैं आज तक जेल नहीं गया। 

मैं ‘आउट ऑफ द वे’ जाकर निर्णय लेता है। मैं तो अधिकारियों से कह देता हूं कि जहां तुम्हारी कलम कांपने लगे, पत्रावली मुझको भेज दो, मैं निर्णय लूंगा। जेल जाना होगा तो मैं जाऊंगा। इसलिए कि हमारी नीयत साफ है। यदि हमारी नीयत में खोट है तो निश्चित रूप से हम निर्णय नहीं ले पाएंगे। व्यक्ति न पैसे बड़ा हो सकता है न पद से बड़ा हो सकता। इंसानियत बड़ा होता है।’

कार्यक्रम की अध्यक्षता एसोसिएशन के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष टीएस पुंडीर ने की। इस अवसर पर पर्वतीय कर्मचारी महासंघ के प्रताप सिंह पंवार, मनोहर कांत मिश्रा, एसएस चौहान, संदीप मौर्य, शेखरानंद रतूड़ी ने अधिवेशन को संबोधित किया और कर्मचारियों की मांगें रखीं। अधिवेशन का संचालन सुनील दत्त कोठारी और पंचम सिंह बिष्ट किया।

हरक के भाषण ने कर्मचारियों की खूब तालियां बटोरी 

हरक की बातों ने कर्मचारियों की खूब तालियां बटोरी। उधर,10 सूत्री मांगों को लेकर कर्मचारी आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं कर्मचारी नेताओं के बीच उनके बयान की खूब चर्चा रही। 

कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि कई बार कुछ शब्द दिल को छू जाते हैं, बेशक उसे कहने वाला कोई भी क्यों न हो। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के एक वाक्य ने उनके दिल को छुआ।

हरक सिंह ने कहा कि, राहुल जी ने बोला था कि संयम और समय सबसे बड़ा हथियार होता है। ये बात उन्हें दिल से भा गई। ठीक वैसे ही जैसे मोदी जी ने अमेरिका की धरती पर जब यह कहा, मैं चाय बेचने वाला छोटा व्यक्ति था, छोटे व्यक्तियों के लिए काम करना चाहता हूं। उनके लिए बड़े काम करना चाहता हूं।

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