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प्रचार पर विराम अब मोदी लहर करेगी काम?

Tue, 14 Feb 2017 12:18 PM IST
अरुणेश पठानिया/ अमर उजाला, देहरादून
अरुणेश पठानिया/ अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 14 Feb 2017 12:18 PM IST
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bjp fight election in the name modi
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)

मोदी मंत्र के सहारे चला भाजपा का चुनाव प्रचार अभियान समाप्त होने के बाद अब मोदी लहर के भरोसे है। भाजपा ने विधानसभा चुनाव में प्रचार की जो नीति अपनाई है उसमें केवल मोदी सरकार की उपलब्धियां मतदाताओं को परोसी गई, जबकि हरीश रावत की नाकामियां को टारगेट कर कांग्रेस को कटघरे में रखा। पार्टी ने सीएम चेहरा देने के बजाए पीएम मोदी का चेहरा आगे किया।

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परिवर्तन यात्रा रथों से शुरू हुआ प्रचार अभियान स्टार प्रचारकों तक केंद्र सरकार के इर्दगिर्द ही घूमा। केंद्रीय नेताओं को पीएम की नीतियों का गुणगान करने का जिम्मा भाजपा ने सौंपा तो प्रदेश संगठन की ड्यूटी भीड़ जुटाने भर तक सीमित रही। भले प्रदेश में भाजपा की अब तक दो बार सरकार रह चुकी है, लेकिन तीन माह चले प्रचार अभियान में बात केवल केंद्र की अटल और मोदी सरकार की हुई।
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भाजपा ने इस बार अपने प्रचार अभियान को पूरी तरह पीएम मोदी पर फोकस किया, जबकि वर्ष 2012 में भाजपा ने पूरा दांव खंडूड़ी सरकार के कठोर फैसलों पर खेला था। अब प्रचार का मोर्चा पूरी तरह से केंद्रीय लीडरशिप के हाथ है, दो चुनाव प्रभारी जेपी नड्डा और धमेंद्र प्रधान बनाए गए। इसके अलावा राष्ट्रीय संगठन सहमंत्री शिवप्रकाश और प्रदेश प्रभारी श्याम जाजू भी पूरे चुनाव में मौजूद रहे।
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खुद राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने डेढ़ दर्जन जनसभाएं तीन माह में कर डाली। भाजपा ने प्रचार अभियान के फार्मेट के साथ प्रत्याशी चयन के तरीकों को भी बदला। कांग्रेस को नुकसान पहुंचाने के लिए प्रचार ही नहीं बल्कि दल बदल से भी प्रभावित किया गया। 12 बड़े नेताओं को कांग्रेस से झटक कर उसी के खिलाफ प्रचार में इस्तेमाल किया।

भाजपा ने चुनाव आचार संहिता से ठीक पहले पीएम नरेंद्र मोदी की जनसभा करवा सियासी हवा अपने पक्ष में करने की कोशिश की। 26 दिसंबर को पीएम की देहरादून में विशाल जनसभा से मिले रिस्पांस को अंतिम चरण में और तेज करने के लिए मोदी की चार जनसभाएं दोनों मंडलों में करवा दी।

होर्डिंग पोस्टर में आगे, सोशल मीडिया में पीछे
पार्टी ने अपने प्रचार के लिए एक बार फिर होर्डिंग पोस्टर और विज्ञापन को तरजीह दी, जिसे इस बार कांग्रेस ने सीमित रखा है। क्या हाल, अटल ने बनाया मोदी संवारेंगे जैसे पंच लाइनों के साथ पोस्टर वार में कांग्रेस पिछड़ी, लेकिन मल्टीमीडिया में भाजपा की धमक कमजोर रही। कांग्रेस ने वेब वर्ल्ड और सोशल नेटवर्किंग साइट्स का जिस तरह से इस्तेमाल किया उसमें भाजपा उतना बेहतर करनी नहीं दिखी।


रावत पर रखा फोकस
भाजपा ने प्रचार अभियान में कांग्रेस पार्टी को घेरने के बजाए सीएम हरीश रावत पर ही फोकस रखा। सीएम को पार्टी ने मजबूर कर दिया कि वो केवल केंद्र पर निशाना साधें। इस रणनीति से भाजपा अपनी प्रदेश में रही सरकारों पर लगे भ्रष्टाचार के मामलों को दोबारा मुद्दा बनाने से बचा ले गई। जबकि 2012 में कांग्रेस ने तत्कालीन भाजपा सरकार के कार्यकाल में घोटालों को मुद्दा बनाकर सत्ता हासिल की थी।

प्रचार का बदला फार्मेट
- प्रचार को तीन चरणों में बांटा, परिवर्तन यात्रा, अटल संदेश यात्रा और स्टार प्रचार
- पहले चुनावों के विपरीत इस बार सीएम का चेहरा नहीं घोषित किया
- चुनाव संचालन समिति की जगह चुनाव समिति ही बनाई गई
- प्रचार अभियान को पूरी तरह से केंद्रीय लीडरशिप ने अपने हाथ रखा
- पूर्व मुख्यमंत्रियों की मजबूत टीम सेकेंड लाइन में रखी गई
- प्रत्याशी चयन में पारंपरिक फार्मेट को तोड़ परिवारवाद और दल बदल को तरजीह दी
- केंद्रीय नीति नोटबंदी, सर्जिकल स्ट्राइक, ओआरओपी, उज्जवला को हाईलाइट किया
- घोषणा पत्र का तरीका बदलकर विजन डाक्यूमेंट की थियोरी
- पोस्टरों में छोटे हुए प्रदेश के नेताओं के चेहरे

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