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विधायकी के लिये जिलाध्यक्षी से तौबा कर रहे भाजपाई
मनीष चंद्र भट्ट/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 25 Nov 2016 09:49 AM IST
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भारतीय जनता पार्टी में कई जिलाध्यक्ष आगामी उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में भाग्य आजमाना चाह रहे हैं। विधायकी की महत्वाकांक्षा पाले ये नेता इसके लिये जिलाध्यक्षी छोड़ने को तैयार हैं।
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कुछ जिलाध्यक्षों ने तो हाईकमान के सामने अपने इरादे जाहिर भी कर दिये हैं। देहरादून में परवादून जिलाध्यक्ष जितेंद्र नेगी ने तो पद छोड़ने की पेशकश भी कर दी है। अब हाईकमान को यह चिंता सता रही है कि इन जिलाध्यक्षों को मैदान में उतारे या उनकी ताकत का इस्तेमाल जिले में पार्टी के सभी प्रत्याशियों को जिताने में करे।
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भाजपा के सांगठनिक लिहाज से उत्तराखंड में वर्तमान में 22 जिले हैं। भाजपा में आम परंपरा रही है कि जिनके पास जिलाध्यक्ष और विधानसभा चुनाव संयोजक की जिम्मेवारी रहती है, उन्हें चुनाव लड़ाने से परहेज किया जाता है। खास परिस्थितियों में अगर पार्टी नेतृत्व उन्हें चुनाव मैदान में उतारना चाहता है तो उनका दायित्व दूसरे नेता को दिया जाता है।
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इसके पीछे चुनावी गणित और बूथ स्तर तक के कार्यकर्ता और आमजन से पहुंच की रणनीति काम करती है। ऐसे समय में जब पार्टी 2017 में उत्तराखंड में परिवर्तन लाने की रणनीति पर गहन मंथन में जुटी है, जिलाध्यक्षों की महत्वाकांक्षा ने हाईकमान की पेशानियों पर बल डाल दिये हैं।
दून में परवादून जिलाध्यक्ष जितेंद्र नेगी जहां जिलाध्यक्षी छोड़ने की पेशकश करते हुये डोईवाला सीट से ताल ठोकते नजर आ रहे हैं। वहीं, देहरादून महानगर जिलाध्यक्ष उमेश अग्रवाल धर्मपुर, पछवादून जिलाध्यक्ष संजय गुप्ता विकासनगर और हरिद्वार जिलाध्यक्ष सुरेश राठौर के ज्वालापुर सीट पर दावेदारी जताने की जानकारी सूत्रों के हवाले से सामने आ रही है। इन जिलाध्यक्षों की अपनी पसंदीदा सीट पर बढ़ी सक्रियता भी कहीं न कहीं इस तरफ इशारा कर रही है।