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बद्री-केदार मंदिर समिति भंग, जानिए क्यों बीजेपी ने उठाया यह कदम
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 01 Apr 2017 09:34 PM IST
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प्रचंड बहुमत से सत्ता तक पहुंची बीजेपी सरकार ने बद्री-केदार मंदिर समिति को भंग कर दिया है। मंदिर समिति का कार्यकाल अभी दो साल और शेष था। सरकार ने धर्मस्व मंत्री शैलेश बगोली को नई समिति के गठन तक कामकाज देखने के लिए प्रशासक नियुक्त कर दिया है।
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समिति का गठन हरीश रावत सरकार ने किया था और श्रीनगर के पूर्व विधायक गणेश गोदियाल इसके अध्यक्ष थे। सरकार ने इस कार्रवाई का आधार अंग्रेजों के जमाने के 1939 के मंदिर समिति एक्ट में दी गई शक्तियों को बनाया है, हालांकि भंग की गई समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि सरकार संवैधानिक संस्थाओं के साथ छेड़छाड़ कर रही है।
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इन स्थितियों के बीच, मंदिर समिति के मामले में अब दोनों पक्षों के बीच टकराव तय हो गया है। कानूनी लड़ाई के लिए फील्डिंग सजाई जाने लगी है। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के जमाने में नियुक्त किए गए पदाधिकारियों को नई सरकार तेजी से हटा रही है।
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तकरीबन विभागों में ऐसे पदाधिकारी हटाए जा चुके हैं। पहले दिन से ही बात की भी चर्चा थी कि कांग्रेस सरकार में गठित मंदिर समिति पर सरकार का क्या नजरिया रहेगा। अंग्रेजों के जमाने के मंदिर समिति एक्ट में अध्यक्ष और बोर्ड सदस्यों का कार्यकाल तीन साल का निर्धारित किया गया है। माना जाता है कि इससे पहले, सरकार यदि बोर्ड के किसी पदाधिकारी को हटाना चाहती है, तो उस पर गंभीर आरोप होने जरूरी हैं।
ये बोले मंत्री
इन स्थितियों के बीच, सरकार ने मंदिर समिति एक्ट 1939 की धारा 11-2-क के अधीन शक्तियों के प्रयोग की बात करते हुए समिति को भंग कर दिया है। धर्मस्व सचिव शैलेश बगोली की तरफ से शनिवार को आदेश जारी किया गया। इस बार की चार धाम यात्रा 28 अप्र्रैल से शुरू हो रही है। मंदिर समिति बद्री-केदार धाम यात्रा की व्यवस्था देखती है।
-सरकार के फैसले का आधार सियासी नहीं, बल्कि प्रशासनिक है। हमने एक्ट में दी गई व्यवस्थाओं के अनुरूप कार्रवाई की है। संवैधानिक संस्थाओं से छेड़छाड़ जैसी कोई बात नहीं है और न ही हम नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। मकसद ये ही है कि नई समिति बनाकर यात्रा व्यवस्था को बेहतर ढंग से संचालित किया जाए।
-सतपाल महाराज, धर्मस्व मंत्री।
-प्रचंड बहुमत मिलने के बाद बीजेपी सत्ता के नशे में चूर हो गई है। संवैधानिक संस्थाओं को अब वह अपने हिसाब से प्रभावित कर रही है। बीजेपी की मनमानी चलने नहीं दी जाएगी। बोर्ड के अन्य सदस्यों के साथ विचार विमर्श कर रहा हूं। पुरजोर विरोध के लिए हर विकल्प खुले हैं। जल्द ही इसका ऐलान कर दिया जाएगा।
-गणेश गोदियाल, भंग समिति के अध्यक्ष।
-सरकार के फैसले का आधार सियासी नहीं, बल्कि प्रशासनिक है। हमने एक्ट में दी गई व्यवस्थाओं के अनुरूप कार्रवाई की है। संवैधानिक संस्थाओं से छेड़छाड़ जैसी कोई बात नहीं है और न ही हम नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। मकसद ये ही है कि नई समिति बनाकर यात्रा व्यवस्था को बेहतर ढंग से संचालित किया जाए।
-सतपाल महाराज, धर्मस्व मंत्री।
-प्रचंड बहुमत मिलने के बाद बीजेपी सत्ता के नशे में चूर हो गई है। संवैधानिक संस्थाओं को अब वह अपने हिसाब से प्रभावित कर रही है। बीजेपी की मनमानी चलने नहीं दी जाएगी। बोर्ड के अन्य सदस्यों के साथ विचार विमर्श कर रहा हूं। पुरजोर विरोध के लिए हर विकल्प खुले हैं। जल्द ही इसका ऐलान कर दिया जाएगा।
-गणेश गोदियाल, भंग समिति के अध्यक्ष।