{"_id":"622b62fcb796e81edb3b22b5","slug":"bjp-councilor-passed-from-detention-in-the-assembly-elections-city-news-drn40616431","type":"story","status":"publish","title_hn":"विस चुनाव में भाजपा पार्षद डिक्टेंशन से पास, अब निकाय चुनाव की तैयारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विस चुनाव में भाजपा पार्षद डिक्टेंशन से पास, अब निकाय चुनाव की तैयारी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विधानसभा चुनाव में भाजपा पार्षद भी डिक्टेंशन से पास हो गए। बल्कि कहा जाए तो इस परीक्षा में वह शत-प्रतिशत अंक लाने में सपल रहे हैं। निगम क्षेत्र की पांचों सीटों पर भाजपा का कब्जा रहा। माना जा रहा है कि पार्षदों की जमीनी स्तर पर हुई मेहनत से ही इनता बड़ा जनादेश मिला है। अब भाजपा का फोकस अगले साल होने वाले निगम चुनावों पर है।
दरअसल, नगर निगम में बीते 14 सालों से भाजपा का कब्जा है। 2018 में निगम क्षेत्र का विस्तार हुआ तो यह कब्जा और भी बड़ा हो गया। वार्डों की संख्या 60 से बढ़ाकर 100 कर दी गई थी। इसमें जब चार साल पहले चुनाव हुए तो भाजपा 70 से भी ज्यादा सीटें जीतकर बोर्ड में काबिज हो गई। इसके बाद कुछ बाहर के पार्षदों ने भी भाजपा का दामन थाम लिया। भाजपा संगठन ढांचा मजबूत माना जाता है। यही कारण था कि इन चुनावों में पार्षदों को भी बड़ी जिम्मेदारी मिली थी।
पार्षदों का रिपोर्ट कार्ड भी इन्हीं चुनावों में तैयार होना था। लिहाजा, पार्षदों ने भी चुनावों में जी जान से मेहनत की और भाजपा को विजयश्री का पान कराया। निगम क्षेत्र में राजपुर रोड, मसूरी, धर्मपुर, रायपुर और कैंट विधनसभा के क्षेत्र आते हैं। इन सभी सीटों पर भाजपा के विधायक जीते। ऐसे में अब पार्षदों की वकत पहले से ज्यादा बढ़ गई है। अब पार्षदों का रिपोर्ट कार्ड भी आने वाले दिनों में तैयार हो जाएगा। जिन वार्डों से अधिक वोट मिले हैं। माना जा रहा है कि निगम चुनावों में उन पर ही दांव खेला जाएगा।
विज्ञापन
इन सब गणित को लगाकर भाजपा ने अगले साल होने वाले निगम चुनावों पर फोकस कर लिया है। बता दें कि निगम के चुनाव 2023 के अंत में होने हैं। समय डेढ़ साल से अधिक है, लेकिन भाजपा की तैयारियों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अभी से संगठन सक्रिय हो गया है। निगम चुनावों की तैयारियों के लिए जल्द ही मौजूदा पार्षदों और शहर क्षेत्र के नेताओं की बैठक बुलाई जाने वाली है।
विज्ञापन
दरअसल, नगर निगम में बीते 14 सालों से भाजपा का कब्जा है। 2018 में निगम क्षेत्र का विस्तार हुआ तो यह कब्जा और भी बड़ा हो गया। वार्डों की संख्या 60 से बढ़ाकर 100 कर दी गई थी। इसमें जब चार साल पहले चुनाव हुए तो भाजपा 70 से भी ज्यादा सीटें जीतकर बोर्ड में काबिज हो गई। इसके बाद कुछ बाहर के पार्षदों ने भी भाजपा का दामन थाम लिया। भाजपा संगठन ढांचा मजबूत माना जाता है। यही कारण था कि इन चुनावों में पार्षदों को भी बड़ी जिम्मेदारी मिली थी।
विज्ञापन
पार्षदों का रिपोर्ट कार्ड भी इन्हीं चुनावों में तैयार होना था। लिहाजा, पार्षदों ने भी चुनावों में जी जान से मेहनत की और भाजपा को विजयश्री का पान कराया। निगम क्षेत्र में राजपुर रोड, मसूरी, धर्मपुर, रायपुर और कैंट विधनसभा के क्षेत्र आते हैं। इन सभी सीटों पर भाजपा के विधायक जीते। ऐसे में अब पार्षदों की वकत पहले से ज्यादा बढ़ गई है। अब पार्षदों का रिपोर्ट कार्ड भी आने वाले दिनों में तैयार हो जाएगा। जिन वार्डों से अधिक वोट मिले हैं। माना जा रहा है कि निगम चुनावों में उन पर ही दांव खेला जाएगा।
विज्ञापन
इन सब गणित को लगाकर भाजपा ने अगले साल होने वाले निगम चुनावों पर फोकस कर लिया है। बता दें कि निगम के चुनाव 2023 के अंत में होने हैं। समय डेढ़ साल से अधिक है, लेकिन भाजपा की तैयारियों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अभी से संगठन सक्रिय हो गया है। निगम चुनावों की तैयारियों के लिए जल्द ही मौजूदा पार्षदों और शहर क्षेत्र के नेताओं की बैठक बुलाई जाने वाली है।