दून: भाजपा में मंडल पर मचा बवंडर, दो कार्यकारिणी रद्द
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भाजपा में मंडल स्तर पर वर्चस्व की जंग ने पार्टी में फिर बवंडर खड़ा कर दिया है। भाजपा के मंडलों में चल रही वर्चस्व की लड़ाई शुक्रवार को एक बार फिर सतह पर आ गई। देहरादून महानगर अध्यक्ष ने 24 घंटे पहले घोषित दो मंडलों की कार्यकारिणी को असंवैधानिक करार देते हुए भंग कर दिया है।
जिला भाजपा में मंडल स्तर की राजनीति में कुछ समय की शांति के बाद नेताओं में फिर से तलवारें खिंचने लगी हैं। बड़े नेताओं की मूंछ की लड़ाई में पिछले 10 महीने से कैंट विधानसभा के जीएमएस मंडल अध्यक्ष की घोषणा पार्टी नहीं कर पा रही थी।
सूत्रों के मुताबिक, क्षेत्रीय विधायक हरबंस कपूर और महानगर अध्यक्ष उमेश अग्रवाल की पसंद अलग-अलग होने की वजह से यहां मंडल अध्यक्ष की घोषणा नहीं हो पा रही थी। लड़ाई इतनी आगे पहुंच गई कि पार्टी को जीएमएस नगर मंडल के दो फाड़ करने पड़े। जिसमें जीएमएस नगर और प्रेमनगर कांवली नगर मंडल बनाए गए।
प्रेमनगर मंडल अध्यक्ष हरीश कोहली और जीएमएस नगर मंडल अध्यक्ष डॉ. उदय सिंह पुंडीर ने बृहस्पतिवार को कार्यकारिणी का विस्तार करते हुए पदाधिकारियों की घोषणा की। बताया गया कि कार्यकारिणी विस्तार में कपूर खेमे के लोगों को तरजीह दी गई है।
दोनों मंडलों में वरिष्ठ कार्यकर्ता थे नाराज
सूत्रों का कहना है कि इसे लेकर दोनों मंडलों में उमेश अग्रवाल गुट के तमाम वरिष्ठ कार्यकर्ताओं में नाराजगी थी। इन कार्यकर्ताओं ने उमेश अग्रवाल के सामने अपनी नाराजगी रख भी दी। इसे देखते हुए महानगर अध्यक्ष उमेश अग्रवाल ने दोनों मंडलों की कार्यकारिणी को असंवैधानिक बताते हुए निरस्त कर दिया।
कार्यकारिणी भंग करने का पता लगते ही दूसरे गुट के लोगों में भी असंतोष बढ़ने लगा है। दोनों गुट के नेता अपने आकाओं के संपर्क में हैं। इस बारे में महानगर अध्यक्ष उमेश अग्रवाल का कहना है कि बिना उन्हें विश्वास में लिए मनमाने तरीके से मंडल कार्यकारिणी की घोषणा असंवैधानिक हैं।
कार्यकारिणी में सभी वर्गों को स्थान मिलना चाहिए। उधर, विधायक हरबंस कपूर का कहना है कि हर कार्यकर्ता पार्टी का है। इसे गुटों में बांटकर नहीं देखा जाना चाहिए।
डोईवाला मंडल में संशय
करीब दस महीने पहले मंडल अध्यक्षों की घोषणा को लेकर शुरू हुई वर्चस्व की लड़ाई महानगर, परवादून और पछवादून सांगठनिक जिलाध्यक्षों की नियुक्ति तक नजर आई। जानकारों के मुताबिक, संबंधित क्षेत्र से विधायकी के दावेदारों और दूसरे बड़े नेताओं के अपने चहेतों के लिए सीधा दखल करने से मंडल स्तर पर यह हालात पैदा हुए हैं।
करीब 10 महीने पहले विवाद बढ़ने पर डोईवाला नगर मंडल अध्यक्ष की घोषणा को भी वापस लेना पड़ा था। पार्टी नेताओं में अंदरखाने चल रहे आपसी घमासान की वजह से इस मंडल पर अब तक अध्यक्ष की घोषणा नहीं हो पाई है।
वहीं, अंबेडकरनगर मंडल में बढ़ रहे असंतोष को थामने के लिए इस मंडल के भी दो फाड़ करने पड़े। इससे कुछ हिस्सा हटाकर करनपुर नगर मंडल बनाया गया। वहीं, पंडित दीनदयाल नगर मंडल में पूर्व में घोषित कार्यकारिणी को निरस्त कर महानगर अध्यक्ष ने नई कार्यकारिणी बनवाई थी।