उत्तराखंड को आधा-आधा बांटेंगे भाजपा और कांग्रेस!
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गीत की पंक्ति है बांट लेंगे हम आधा-आधा। कुछ इसी अंदाज में भाजपा और कांग्रेस प्रदेश के लोगों को बांटने जा रही हैं। आने वाले दिनों में दोनों सियासी पार्टियों का अगर सदस्यता लक्ष्य पूरा हो गया तो आप भाजपाई होंगे या कांग्रेसी।
उत्तराखंड की दोनों प्रमुख पार्टियां इन दिनों अपना कुनबा बढ़ाने के लिए जोरशोर से सदस्यता अभियान चला रही हैं। भाजपा ने 25 लाख सदस्य बनाने का लक्ष्य रखा है। तो कांग्रेस ने हर पोलिंग बूथ पर पचास सदस्य बनाने का।
अगर सुदूर दुर्गम क्षेत्रों में भी पचास सदस्य बन जाते हैं तो यह आंकड़ा 45 लाख होगा। जबकि उत्तराखंड की कुल आबादी एक करोड़ से कुछ अधिक है और 51 लाख से कुछ अधिक ही वयस्क हैं।
भाजपा के यज्ञ में 25 लाख ‘आहुतियां’
उत्तराखंड भाजपा मोदी मंत्र से इस कदर प्रभावित है कि राष्ट्रव्यापी सदस्यता अनुष्ठान में उत्तराखंड की 25 लाख आहुतियां देने का लक्ष्य रखा है। जबकि अभी भाजपा के 5 लाख 85 हजार सदस्य ही थे।
ऐसे में कौन सा जादू सदस्य संख्या को पांच गुना बढ़ा देगा, देखने की चीज है। प्रदेश अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत आशान्वित हैं। उनका कहना है कि मोबाइल से मिस कॉल देकर सदस्य बनाने का अभियान पूरे देश में तेजी से चल रहा है।
प्रदेश इकाई मोबाइल सदस्यों की जानकारी मिलते ही वहां स्थानीय स्तर पर संपर्क कर रसीद काटेगी। इसके अलावा रसीद से भी सदस्यता अभियान चल रहा है। भाजपा का तर्क है लोगों ने इतनी बड़ी संख्या में वोट दिया है ऐसे में सदस्यता अभियान सफल होगा।
कांग्रेस का दावा, मेरा अभियान ज्यादा वैज्ञानिक
कांग्रेस ने अपना सदस्यता अभियान त्रिस्तरीय रखा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय का कहना है कि एक बूथ में कम से कम दो सक्रिय सदस्य होने चाहिए लेकिन 50 का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि 25-25 प्रतियों वाली 25 हजार रसीद बुक प्रदेश भर में भेजी जा चुकी हैं।
प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि अकेले कांग्रेस ही सदस्यता अभियान नहीं चला रही बल्कि उसके सहयोगी युवक कांग्रेस और एनएसयूआई भी अपने-अपने स्तर पर सदस्यता अभियान चला रही हैं और हम आपस में एक दूसरे को काट नहीं कर रहे हैं।
प्रदेश अध्यक्ष कांग्रेस के सदस्यता अभियान को वैज्ञानिक बता रहे हैं। उनका कहना है कि मिसकॉल तो कोई मजाक में भी कर सकता है। अब आंकड़ों को देखें तो छह लाख 25 हजार सदस्य बनने तो तय हैं। वहीं बूथ की तैयारी पर नजर डालें तो उत्तराखंड में करीब नौ हजार पोलिंग बूथ हैं उस हिसाब से यह संख्या 45 लाख हो जाएगी।