Bird Flu in Uttarakhand: रुद्रप्रयाग और अगस्त्यमुनि में मृत मिले दो कबूतर, पशुपालन विभाग सक्रिय
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उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में सोमवार को दो कबूतर मृत मिले हैं। वहीं अगस्त्यमुनि में एक कबूतर और एक कौआ मृत मिला है। जिसके बाद पशुपालन विभाग सक्रिय हो गया है।
बर्ड फ्लू : राजाजी टाइगर रिजर्व में बढ़ी सतर्कता
बर्ड फ्लू की दहशत से स्वास्थ्य विभाग और पशुपालन विभाग पहले से ही सतर्क हैं। इसके साथ ही राजाजी टाइगर रिजर्व के वन्यजीवों की सुरक्षा के मद्देनजर सतर्कता बढ़ा दी गई है। इस बाबत टाइगर रिजर्व निदेशक डीके सिंह ने सभी 10 रेंजों के वन क्षेत्राधिकारियों को हाथी, बाघ, तेंदुओं के साथ पक्षियों पर नजर रखने के निर्देशि जारी किए हैं।
टाइगर रिजर्व के निदेशक डीके सिंह का कहना है कि यदि कहीं भी पक्षियों की असामान्य परिस्थितियों में मरने की जानकारी मिलती है तो तत्काल मौके पर जाकर जांच की जाए। पक्षियों की मौत असामान्य तरीके से होने पर नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे जाएं। डीके सिंह का कहना है कि फिलहाल रिजर्व क्षेत्र में अभी तक किसी भी पक्षी के असामान्य तरीके से मरने की जानकारी नहीं मिली है। बर्ड फ्लू को लेकर तमाम एहतियाती कदम उठाए गए हैं।
बर्ड फ्लू से 18 कौवों की मौत
देहरादून में बर्ड फ्लू के चलते पक्षियों के मरने का सिलसिला सोमवार को भी जारी रहा। वन विभाग के अनुसार सोमवार को जिले के विभिन्न इलाकों में 18 कौवों की मौत हो गई। मृत कौवों के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं।
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. एसबी पांडे का कहना है कि बर्ड फ्लू से किसी को घबराने की जरूरत नहीं है। कौवों, बगुलों और कबूतरों की मौत जिस वायरस से हो रही है। वह इंसानों के लिए कतई खतरनाक नहीं है। बर्ड फ्लू पालतू पक्षियों और पोल्ट्री फार्मों तक न पहुंचे, इसके लिए रैपिड रिस्पांस टीम पैनी नजर बनाए हुए है। अभी तक कहीं से भी पोल्ट्री फॉर्म में मुर्गियों की मौतों की सूचना नहीं आई है। मुर्गियों के मरने पर पोल्ट्री फॉर्म संचालकों को सूचना देने की सख्त हिदायत दी गई है।
दून चिड़ियाघर में विभिन्न पक्षियों को बर्ड फ्लू से बचाने की कवायद
उत्तराखंड समेत देश के कई राज्यों में फैली बर्ड फ्लू बीमारी से दून चिड़ियाघर के देशी, विदेशी पक्षियों को बीमारी से बचाने को लेकर चिड़ियाघर प्रशासन की ओर से कई एहतियाती कदम उठाए गए हैं।
दून चिड़ियाघर में शुतुरमुर्ग, ऐमू, मकाउ, अफ्रीकन ग्रे, मोर, कोकोटेल, लव बर्ड, बजरीगर प्लम हेडेड पैरट, संगनूर, कॉलीज, गोल्डन फीजेंट, सिल्वर फीजेंट, उल्लू, इंडियन वल्चर समेत 25 से अधिक देशी, विदेशी प्रजातियों के पक्षियों में बर्ड फ्लू बीमारी न फैलने पाए इसके लिए चिड़ियाघर प्रशासन की ओर से पक्षियों के बाड़ों में ग्रीन सीट लगाई गई है।
वन क्षेत्राधिकारी मोहन सिंह रावत ने बताया कि जिस तरीके से बर्ड फ्लू बीमारी फैल रही है, उसे देखते हुए चिड़ियाघर के देशी, विदेशी पक्षियों को सुरक्षित बचाना बड़ी चुनौती है। बर्ड फ्लू बीमारी से संक्रमित हुए कबूतर समेत अन्य प्रजातियों के पक्षी चिड़ियाघर के पक्षियों के संपर्क में न आएं।
इसके लिए पक्षियों के बाड़ों में ग्रीन सीट लगाने के साथ ही जाल लगा दिए गए हैं। साथ ही बाड़ों के पास कर्मचारियों की ड्यूटी भी लगाई गई है। क्षेत्राधिकारी मोहन सिंह रावत ने बताया कि फिलहाल चिड़ियाघर के पक्षियों में बर्ड फ्लू बीमारी का कोई खतरा नहीं है, लेकिन इसके बावजूद तमाम सावधानियां बरती जा रही हैं।
3600 पर्यटकों ने किया चिड़ियाघर का भ्रमण
वन क्षेत्राधिकारी मोहन सिंह रावत ने बताया कि रविवार को अवकाश होने के चलते बड़ी संख्या में पर्यटक दून चिड़िया घर पहुंचे। आंकड़ों के मुताबिक कुल 3600 पर्यटक चिड़िया घर पहुंचे और दुर्लभ प्रजाति के पक्षियों, वन्यजीवों का दीदार करने के साथ ही साहसिक खेलों का भी आनंद लिया।