हरिद्वार: पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की अस्थियां गंगा में विसर्जित, पिता को याद कर भावुक हुए बेटे अभिजीत
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भारतरत्न पूर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय प्रणब मुखर्जी मंगलवार को पंचतत्व में विलीन हो गए। इसके बाद देर शाम उनकी अस्थियां हरिद्वार में हरकी पैड़ी पर गंगा में विसर्जित की गई। इस दौरान उनके बेटे अभिजीत ने पूजा के बाद उनकी अस्थियां गंगा में विसर्जित की। इससे पहले हरकी पैड़ी पर पूर्व राष्ट्रपति के चित्र के सामने अस्थि कलश को रखा गया और पूजा की गई।
बता दें कि सुबह दिल्ली में लोधी रोड श्मशान घाट पर राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया था। इससे पहले पूर्व राष्ट्रपति को 21 तोपों की सलामी दी गई। उनके बेटे अभिजीत मुखर्जी ने मुखाग्नि दी थी।
देर शाम परिवार के सदस्य उनकी अस्थियां लेकर हरकी पैड़ी पहुंचे। इस दौरान गंगा सभा के अध्यक्ष प्रदीप झा, महामंत्री तन्मय वशिष्ठ, गंगा सभा के सभापति कृष्ण कुमार शर्मा के साथ कांग्रेस नेता पूर्व पालिकाध्यक्ष सतपाल ब्रह्मचारी, महानगर अध्यक्ष संजय अग्रवाल, महासचिव संजय पालीवाल, युवक कांग्रेस के अध्यक्ष रवि बहादुर, शहर अध्यक्ष नितिन तेश्वर, ब्लॉक अध्यक्ष रवि कश्यप, मेयर प्रतिनिधि अशोक शर्मा आदि ने श्रद्धांजलि दी।
उनके बेटे अभिजीत ने कहा कि ये उनके परिवार की इच्छा थी कि उनकी अस्थियां हरिद्वार में ही विसर्जित की जाएं। उनके साथ उनके छोटे भाई इंद्रजीत और परिवार के अन्य सदस्य मौजूद रहे।
अधूरी रह गई दोबारा गंगा दर्शन की प्रणब दा की इच्छा
पूर्व राष्ट्रपति डॉ. प्रणब मुखर्जी के निधन से धर्मनगरी हरिद्वार में हर कोई स्तब्ध है। वे गंगा के प्रति विशेष आस्था रखते थे। वर्ष 2016 में श्रीगंगा सभा के शताब्दी वर्ष समारोह में प्रणब दा सपरिवार शामिल हुए थे। यही नहीं, उन्होंने हरकी पैड़ी घाट पर बैठकर काफी देर तक गंगा की धारा को निहारते हुए फिर से हरिद्वार आने की इच्छा जताई थी, लेकिन दोबारा आने की उनकी इच्छा पूरी नहीं हुई।
पूर्व राष्ट्रपति डॉ. प्रणब मुखर्जी वैसे तो दो बार हरिद्वार आए थे, लेकिन श्रीगंगा सभा के शताब्दी वर्ष समारोह में उन्होंने सबसे अधिक समय हरिद्वार में बिताया था। युवा तीर्थ पुरोहित महासभा के अध्यक्ष उज्ज्वल पंडित ने बताया कि समारोह संपन्न होने के बाद पूर्व राष्ट्रपति डॉ. प्रणब मुखर्जी ने परिवार सहित मां गंगा की विशेष पूजा की थी। इस बीच पूर्व राष्ट्रपति कुछ देर गंगा घाट पर अकेले बैठे थे। ऐसा लग रहा था मानो वे मां गंगा से वार्तालाप कर रहे हों।
उज्ज्वल बताते हैं कि एक आम आदमी की तरह उन्होंने गंगा स्वच्छता की शपथ भी ली थी। श्री गंगा सभा के तत्कालीन अध्यक्ष पुरुषोत्तम गांधीवादी और महामंत्री राम महेश मिश्रा ने उनको गंगाजली और स्मृति चिह्न भेंट किया था।