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विरोध के बावजूद अटल ने उत्तराखंड को दिलाया था हक

Thu, 25 Dec 2014 01:38 PM IST
सुधाकर भट्ट/ अमर उजाला, देहरादून
सुधाकर भट्ट/ अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 25 Dec 2014 01:38 PM IST
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bharat ratna atal bihari vajpayee.

इसे भाजपा की धुर विरोधी कांग्रेस भी स्वीकार करती है कि उत्तराखंड के अस्तित्व से पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का नाम अलग नहीं किया जा सकता।

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जब उत्तरांचल बना था तो अटल बिहारी वाजपेयी ही प्रधानमंत्री थे। उस समय के राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार के मुखिया की दूरदृष्टि के अब कई राजनीतिक विश्लेषक कायल हैं।
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कारण झारखंड और छत्तीसगढ़ से अलग उत्तराखंड राज्य का आंदोलन बेहद शांतिपूर्ण था। पर इस बात से भी इनकार नहीं किया जा रहा है कि राज्य गठन में थोड़ी और देरी से इस आंदोलन के स्वरूप को बदल भी सकता था।
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राजनीतिकि विश्लेषकों की माने तो उत्तराखंड को राज्य का दर्जा देने में पहल सीपीआई की रही पर यह बाद में मुख्य रूप से यूकेडी और भाजपा केएजेंडे में भी उभर आया था।

नब्बे के दशक का विमर्श कांग्रेस के लिए उत्तर प्रदेश के इस हिस्से को केंद्र शासित घोषित करने से लेकर हिल काउंसिल तक का था।

तीन राज्यों के गठन की मंजूरी में अहम भूमिका

bharat ratna atal bihari vajpayee.

भाजपा जन में उमड़े ज्वार को देखते हुए उत्तरांचल राज्य के गठन के पक्ष में थी। ऐसे में गठबंधन सरकार को चलाते हुए भी वाजपेयी ने तीन राज्यों के गठन की मंजूरी में अह्म भूमिका निभायी थी।

वाजपेयी के उस समय केनिर्णय को इस समय राजनीतिक विश्लेषक एक दूरगामी प्रभाव वाला कदम भी मानते हैं। कारण यह भी था कि विभिन्न धाराओं के मेल के कारण राज्य आंदोलन का स्वरूप व्यापक हो गया था और आंदोलन की दिशा में परिवर्तन का खतरा भी सामने था।

सत्ता का तरीका जो भी रहा हो पर आंदोलन का अगुवा जन शांतिपूर्ण आंदोलन की रणनीति से अलग नहीं हुआ। खुद कांग्रेस राज्य गठन को लेकर पूरी तरह स्पष्ट नहीं थी।

हालांकि राज्य गठन के बाद हुए पहले ही चुनाव में कांग्रेस को सरकार बनाने का मौका मिला था। पर उस समय भी तमाम विरोध के बावजूद वाजपेयी ने 2003, जनवरी में नैनीताल पहुंचकर प्रदेश के लिए विशेष औद्योगिक पैकेज का ऐलान भी किया था।

बाद में पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी इस पैकेज की बदौलत प्रदेश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव करने और कांग्रेस को प्रदेश में रोपित करने में सफल हो पाए।

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