हरिद्वारः भारत बंद का मिलाजुला असर, नहीं दी गई जुलूस की इजाजत
- बहुजन क्रांति मोर्चा ने पुल जटवाड़ा पर प्रदर्शन कर सौंपा ज्ञापन
- सभा में बोले वक्ता, सीएए का आधार धार्मिक, इसीलिए विरोध
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विस्तार
कुछ मुस्लिम बाहुल्य इलाकों को छोड़ दिया जाए तो नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में बहुजन क्रांति मोर्चा के भारत बंद का हरिद्वार में आंशिक असर दिखाई दिया। इस दौरान कुछ लोगों ने जबरन दुकानें बंद कराने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए उन्हें रोक दिया। उधर, क्रांति मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर ज्वालापुर में प्रदर्शन किया। राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन नगर मजिस्ट्रेट को सौंपा।
सुबह से ही बहुजन क्रांति मोर्चा के कार्यकर्ता पुल जटवाड़ा पर एकत्र होने लगे थे। भारत बंद की घोषणा देखते हुए प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क था। बंद का असर सबसे ज्यादा कोतवाली ज्वालापुर से लेकर मौहल्ला कस्साबान तक मुस्लिम बाहुल्य कॉलोनी पर दिखाई दिया। यहां लोगों ने दुकानें बंद रखी। कुुछ लोगों ने जबरन दुकानें बंद की भी कोशिश की, लेकिन सीओ सिटी अभय प्रताप सिंह की अगुवाई में पुलिस ने उन्हें ऐसा नहीं करने दिया।
उधर, पुल जटवाड़ा पर हुई सभा को संबोधित करते हुए बहुजन क्रांति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष संजय कुमार और भंवर सिंह ने कहा कि सीएए धार्मिक आधार पर लागू किया गया है, इसीलिए इसका विरोध है और इसे वापस लिए जाने की मांग की जा रही है। संविधान बचाओ संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष भानपाल सिंह और वरिष्ठ नेता मेहर सिंह ने कहा कि जबरन यह कानून थोपने नहीं दिया जाएगा। इस अवसर पर सुरेंद्र, नसीर अहमद, रुपचंद्र, ललिता, रेश्मा, पुष्पा देवी, भावना, चंद्रो, प्रवेश, भावना, चंद्रो, जमील, सुशील कुमार, धर्मपाल, प्रवेज, अंकुर, इमरान, संजीव, सुनील आदि मौजूद थे।
बुधवार को साप्ताहिक बंदी का मिला फायदा
ज्वालापुर बाजार की साप्ताहिक बंदी बुधवार को होने का फायदा भी बहुजन क्रांति मोर्चा को मिला। विरोध के दौरान ज्वालापुर में कुछ दुकानें पहले से बंद होने पर मंच के पदाधिकारी और कार्यकर्ता खुश नजर आए।
नहीं दी गई जुलूस की इजाजत
बहुजन क्रांति मोर्चा के पदाधिकारियों ने सीएए का विरोध करने के लिए भारत बंद के दौरान जुलूस निकालने की इजाजत मांगी थी, लेकिन पुलिस अधिकारियों ने माहौल बिगड़ने की आशंका जताते हुए इजाजत देने से मना कर दिया। ऐसे में मोर्चा पदाधिकारियों ने जुलूस निकालने के बजाय पुल जटवाड़ा पर ही प्रदर्शन कर ज्ञापन दिया।
सीएए के विरोध में कई जगह दुकानें बंद
रुड़की में सीएए और एनआरसी के विरोध में बुधवार को भारत बंद का शहर और देहात में मिलाजुला असर दिखा। कई जगहों पर लोगों ने अपनी दुकानें बंद कर विरोध जताया। हालांकि, दोपहर बाद अधिकतर दुकानदारों ने दुकानें खोल दी। वहीं, भारत बंद को देखते हुए शहर से लेकर देहात तक भारी पुलिस बल तैनात रहा। पुलिस दिनभर गश्त करती रही।
बुधवार को रुड़की में मेन बाजार, मच्छी मोहल्ला, बीटी गंज में भारत बंद का मिलाजुला असर दिखा। यहां कुछ दुकानदारों ने अपनी दुकानें बंद रखीं। विरोध प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस और खुफिया विभाग गोपनीय तरीके से जानकारी जुटाता रहा। एसपी देहात एसके सिंह खुद शहर और देहात में घूमकर अधीनस्थों से जानकारी लेते रहे।
वहीं, रुड़की के तेलीवाला गांव में बहुजन क्रांति मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल ने तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर सीएए को रद्द करने समेत अन्य मांगें की। इस दौरान प्रदीप कुमार, आवेश, मसरूफ, बबीता, सुरेंद्र, सचिन, परवेज, अजीम इकबाल, समीर मौजूद थे। वहीं, लंढौरा में बहुजन क्रांति मोर्चा के आह्वान पर कुछ दुकानदारों ने दुकानें बंद कर सीएए और एनआरसी का विरोध किा। कोई धरना प्रदर्शन न हो इसके लिए खुफिया विभाग भी पूरी तरह सतर्क था।
जुलूस निकालने पर पुलिस ने फटकारी लाठी
भगवानपुर में भारत बंद के तहत कुछ लोगों ने मुख्य बाजार में सीएए और एनआरसी का विरोध करते हुए जुलूस निकालने का प्रयास किया। साथ ही मुख्य बाजार में जबरन दुकानें बंद कराने लगे। इस पर पुलिस की उनसे तीखी नोकझोंक हुई। पुलिस ने विरोध कर रहे लोगों को लाठियां फटकारकर वहां से खदेड़ा। इसके बाद स्थिति काबू में आई। सिकरौढ़ा में भी जुलूस निकाल रहे लोगों की पुलिस से नोकझोंक हुई। पुलिस ने जुलूस निकालने वालों को कार्रवाई की चेतावनी दी।
वहीं, पुहाना में कुछ लोग टेंपो बंद करवाने की कोशिश कर रहे थे, जिन्हें पुलिस ने लाठियां भांजकर खदेड़ा। कलियर में भी सीएए और एनआरसी के खिलाफ बुधवार को बाजार पूरी तरह से बंद रहे। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस प्रशासन और खुफिया विभाग अलर्ट रहा। हालांकि, केवल दरगाह क्षेत्र में दुकानें खुली रहीं। पुलिस ने कई स्थानों पर भारत बंद को लेकर लगाए गए पोस्टर भी हटवा दिए। सोशल मीडिया पर भी पुलिस की पैनी नजर रही।
लक्सर में सौंपा ज्ञापन, मंगलौर मेें रही कड़ी सुरक्षा
लक्सर क्षेत्र में सीएए के विरोध में भारत बंद का कोई खास असर नहीं दिखा। रोजमर्रा की तरह बाजार गुलजार रहे। हालांकि, बहुजन क्रांति मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर सीएए रद्द करने की मांग की। इस दौरान प्राची, समय सिंह, नितिन, राहुल, महक सिंह, उदयवीर और गिरीश कुमार गौतम आदि मौजूद थे। उधर, सुल्तानपुर में कुछ जगहों पर दुकान बंद रहीं। कई दुकानदारों ने अपनी सुबह से ही दुकान बंद रखकर विरोध किया।
झबरेड़ा क्षेत्र में भी भारत बंद का असर मिलाजुला दिखा। यहां कुछ लोगों ने अपनी दुकानें बंद रखकर विरोध जताया। मंगलौर में सीएए के विरोध में बंद का असर दिखा। दुकानदारों ने अपनी-अपनी दुकानें बंद रखकर विरोध जताया। मंगलौर में विरोध प्रदर्शन रोकने के लिए भारी पुलिस बल और पीएसी तैनात रही। एसपी देहात एसके सिंह ने कहा कि अगर कोई माहौल खराब करने की कोशिश करेगा तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
बुधवार को भी गुलजार रहे बाजार
सीएए और एनआरसी के विरोध में बुधवार को भारत बंद के एलान का सिविल लाइंस बाजार में कोई असर नहीं दिखा। आमतौर पर बुधवार को बंदी के चलते सिविल लाइंस बाजार रहता है, लेकिन बुधवार को सिविल लाइंस में अधिकतर दुकानें खुली रहीं। दुकानों पर सामान खरीदने वालों की खासी भीड़ रही। शहर और देहात में बुधवार को भारत बंद को लेकर सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए गए। खासकर धार्मिक स्थलों के बाहर पुलिस का कड़ा पहरा रहा। पुलिस की आने-जाने वाले लोगों पर पैनी नजर रही। पुलिस लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करती रही।
एनआरसी और सीएए के विरोध में बसपा का धरना
कोटद्वार में बहुजन क्रांति मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने बुधवार को एनआरसी, सीएए और ईवीएम के विरोध में तहसील में धरना दिया। बुधवार को बहुजन क्रांति मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने तहसील पहुंचकर एनआरसी, सीएए और ईवीएम के विरोध में धरना दिया। उपजिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को भेजे ज्ञापन में कहा कि सीएए कानून भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 21 का हनन करने वाला कानून है।
मोर्चा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ देश में अशांति फैलाने और दो सामाजिक समूहों में विवाद उत्पन्न करने का मुकदमा दर्ज करने, मुकदमे की सुनवाई फास्ट ट्रेक कोर्ट में चलाने, एनआरसी की सूची में निकाले गए लोगों को सूची में शामिल करने, ईवीएम के साथ वीवीपैट लगाकर ईवीएम में आए दोषों को दुरुस्त करने के लिए शत प्रतिशत वीवीपैट लगाने का कानून बनाने की मांग की। प्रदर्शनकारियों में श्याम लाल, सतीश ओडवाल, जगत सिंह, देवेंद्र भट्ट, चंद्रमोहन, धर्मप्रकाश, संतोष कुमार, राजाराम, रमेश चंद्र, संदीप कुमार, महेश नेगी, गजेंद्र रावत, दीपक पांडे, सतीश पंत, रमेश आदि शामिल रहे।