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उत्तराखंड में विकास प्राधिकरण कर रहे विनाश
अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 26 May 2014 07:27 PM IST
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उत्तराखंड में प्राधिकरण किस तरह से काम कर रहे हैं यह भागीरथी नदी घाटी विकास प्राधिकरण के एक साल के लेखे-जोखे से साफ जाहिर हो रहा है।
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थर्ड पार्टी ने किया वित्तीय स्थिति का आंकलन
प्राधिकरण की वित्तीय स्थिति का आंकलन थर्ड पार्टी ने किया है। हैरान करने वाली बात यह है कि प्राधिकरण का एक साल का खर्च करीब 83 लाख रुपए है, जिसमें से मास्टर प्लान पर कुल 14 हजार रुपए ही खर्च किए गए हैं।
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यह तब है जबकि प्राधिकरण ने पिछले दो साल से कोई काम किया ही नहीं। वेतन पर 23 लाख रुपए खर्च करने वाले प्राधिकरण में अब नियमित रूप से कर्मचारी नियुक्त करने की मांग की जा रही है।
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प्राधिकरण की बैलेंस शीट पर एक निगाह डालने से स्पष्ट है कि प्राधिकरण सफेद हाथी साबित हो रहा है। एक अप्रैल 2012 से लेकर 31 मार्च 2013 तक की बैलेंस सीट में 23 लाख 30 हजार रुपए वेतन पर खर्च हुए हैं।
इस दौरान साढ़े तीन लाख का डीए भुगतान किया गया। पांच लाख 33 हजार रुपए का यात्रा व्यय है। करीब एक लाख रुपए मानदेय पर खर्च किया गया। इसके अलावा चार लाख 33 हजार रुपए कार्यालय व्यय है।
67 हजार रुपए बिजली, दो लाख 63 हजार रुपए टेलीफोन, दो लाख 27 हजार कंप्यूटर मेंटीनेंस, पांच लाख रुपए मशीनरी के रखरखाव आदि पर खर्च किए गए।
वाहनों के रखरखाव पर साढ़े नौ लाख रुपए खर्च
इस बैलेंस शीट पर एक निगाह डालने से ही साफ है कि प्राधिकरण ने काम भले ही कुछ न किया हो पर यात्रा खूब की गई है। करीब पांच लाख रुपए यात्रा व्यय है तो वाहनों के रखरखाव पर साढ़े नौ लाख रुपए खर्च कर दिए गए।
यह तब है जबकि प्राधिकरण की कार्यसमिति की पहली बैठक दो साल बाद जाकर कुछ दिन पहले ही दून में हो पाई।
प्राधिकरण ने कम्प्यूटरों का उपयोग इस कदर किया कि एक साल मे ही मेंटीनेंस पर करीब ढाई लाख रुपए खर्च करने पड़े।
प्राधिकरण की यह बैलेंस सीट दून की एक कंपनी ने थर्डपार्टी ऑडिट के तहत तैयार की है। इतना होने के बाद अब प्राधिकरण भागीरथी महायोजना के लिए विशेषज्ञ खोज रहा है।