{"_id":"7d1de66b38a4fed8c9dd0c184a48d884","slug":"beti-bachao-abhiyan-story","type":"story","status":"publish","title_hn":"बेटियां हुई तो बरसी रब की महर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बेटियां हुई तो बरसी रब की महर
अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 10 Jan 2014 03:14 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राजधानी देहरादून के रेस्टकैंप निवासी आशिमा इस साल अपनी चार महीने की बेटी की पहली लोहड़ी के लिए बेहद उत्साहित हैं।
विज्ञापन
बेटियों के संग धूमधाम से मनाएंगे लोहड़ी
आशिमा का कहना है कि मेरी दो बेटियां हैं और यह मेरे लिए गर्व की बात है। वह अकेली ऐसी नहीं है। शहर में और भी लोग हैं जो अपनी बेटियों के संग धूमधाम से लोहड़ी का पर्व मनाते हैं।
पढ़ें, उत्तराखंड के इस गांव में कोई लड़की नहीं बनती दुल्हन
विज्ञापन
सिख समुदाय में मनाया जाने वाला लोहड़ी का पर्व बेटों के लिए खास माना जाता है। किसी भी महिला के बेटे होते हैं तो उनकी पहली लोहड़ी धूमधाम से मनाई जाती है। लेकिन बेटियों की चाहत रखने वाली महिलाएं इससे अलग विचार रखती हैं।
विज्ञापन
भले ही उन्हें घर में बुजुर्गों से बेटी होने पर ताने सुनने पड़ते हों लेकिन उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। रेस्टकैंप निवासी आशिमा और गुरप्रीत की दो बेटियां हैं। पांच वर्षीय जैसमीन और चार माह की मया।
मया मतलब मेहर
आशिमा ने बताया कि जैसमीन के होने पर मैं और मेरे पति बेहद खुश हुए। उसकी पहली लोहड़ी खूब अच्छे तरीके से मनाई। आशिमा ने बताया कि घर के बुजुर्ग भले ही बेटे का राग अलापते थे लेकिन जब मेरी दूसरी बेटी हुई तो मुझे लगा वाकई मुझ पर रब की मेहर हुई है।
पढ़ें, हमारे सीएम का खर्चा देखकर तो अंबानी भी शरमा जाएं
मैंने इसका नाम मया रखा। मया का मतलब रब की मेहर ही होता है। अब मेरी खुशी दोगुनी है। मैं अपनी चार महीने की बेटी की लोहड़ी के लिए खूब तैयारी कर रही हूं। सभी रिश्तेदारों को बुलाया है। सभी मिलकर पार्टी करेंगे। चंदर नगर निवासी अनामिका और उनके पति सुमित सहगल की भी दो बेटियां हैं।
अनामिका ने बताया कि हमारे घर में चार बेटियां हैं। दो मेरी और दो मेरी जेठानी की। हम अपनी चारों बच्चियों का हर फंक्शन धूमधाम से मनाते हैं। इस बार लोहड़ी के लिए भी खास तैयारी है।
पढ़ें, सरकार ने सभी को दिया नए साल का तोहफा
अनामिका ने कहा कि सबसे अच्छी बात यह है कि मेरी सास हमारी बेटियों संग बेहद खुश हैं। उन्होंने कभी भी पोता होने की चाहत नहीं रखी।
शादी की पहली लोहड़ी भी खास
शादी की पहली लोहड़ी भी बेहद खास मानी जाती है। निरंजनपुर निवासी शाइनी और राजू के लिए भी यह खास दिन आने वाला है। शाइनी ने बताया कि मेरी जिठानी का बच्चा हुआ है तो हम दोनों की ही यह पहली लोहड़ी है।
पढ़ें, श्रीनगर और लखनऊ से बेहतर है देहरादून
मेरी सास के लिए खुशी दोगुनी है, बहू नई है और पोता भी हुआ है। नेहरूकॉलोनी निवासी मोहित कोचर और एकता की भी शादी के बाद पहली लोहड़ी है। इन्होंने भी घर पर सभी नाते-रिश्तेदारों को डिनर पर बुलाया है।
ये है शुभ मुहूर्त
लोहड़ी पूजन प्रदोष काल में शुभ माना जाता है। ऐसे में 5 बजकर 35 मिनट से 7 बजकर 58 मिनट तक का समय लोहड़ी पूजन के लिए शुभ माना जा रहा है।