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Uttarakhand: भालू सो नहीं रहे, शीत निद्रा में खलल पड़ने से हो रहे आक्रामक, लोगों की नींद उड़ी, विभाग बेचैन

Wed, 11 Feb 2026 10:17 AM IST
रेनू सकलानी विजेंद्र श्रीवास्तव, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
विजेंद्र श्रीवास्तव, अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Wed, 11 Feb 2026 10:17 AM IST
सार

भालू के हमलों की घटनाओं में अचानक हुई वृद्धि ने चिंता बढ़ाई हुई है। भालू सो नहीं रहे हैं और लोगों की नींद उड़ी है। जनवरी से अब तक भालू के हमले की नौ घटनाएं हो चुकी हैं।

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भालू - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शीत निद्रा (हाइबरनेशन) में खलल पड़ने से आक्रामक हो रहे भालुओं ने जहां लोगों की नींद उड़ा दी तो वहीं वन विभाग की मुश्किलें बढ़ा दीं। विशेषज्ञों के अनुसार कम बर्फबारी के कारण सो नहीं पा रहे भालू आबादी की तरफ मूवमेंट कर रहे हैं। प्रदेश में जनवरी से अब तक भालू के हमलों की नौ घटनाएं हो चुकी हैं।
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बीते साल भालू के हमलों की घटनाओं में अचानक हुई वृद्धि ने चिंता बढ़ा दी थी। इसके बाद सुरक्षात्मक कदम उठाए गए थे। इस उम्मीद में बर्फबारी का इंतजार हो रहा था कि भालू शीत निद्रा में चले जाएंगे और हमलों की घटनाएं कम हो जाएंगी। लेकिन अब तक जितनी बर्फबारी हुई है, वन्यजीव विशेषज्ञ उसे पर्याप्त नहीं मान रहे हैं। कम बर्फबारी होने और ठंडक भी अधिक न होने से भालू शीत निद्रा में नहीं जा पाए। इस कारण वे खाने की तलाश में आबादी वाले इलाकों में मूवमेंट कर रहे हैं।
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भालू को शीत निद्रा में जाने के लिए पर्याप्त बर्फबारी होना जरूरी
भारतीय वन्यजीव संस्थान के पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सत्य कुमार कहते हैं कि भालू को शीत निद्रा में जाने के लिए पर्याप्त बर्फबारी होना जरूरी है। 2500 मीटर की ऊंचाई पर तीन महीने तक लगातार एक फीट गहरी बर्फ जमी रहनी चाहिए। पर ऐसा नहीं हुआ है। अक्तूबर के बाद से देखेंगे तो बारिश और बर्फबारी कम हुई।
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वाडिया हिमालयी भूविज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक पंकज चौहान कहते हैं कि वे डेढ़ दशक से पिंडारी बेसिन में ग्लेशियर का अध्ययन कर रहे हैं। ग्लेशियर की सेहत के लिए जरूरी है कि दिसंबर से जनवरी के बीच निश्चित अंतराल पर पांच से छह बार बर्फबारी होनी चाहिए। पर एक दशक से अधिक समय से देखा जा रहा है कि ऐसा नहीं हो रहा है। जो बर्फबारी होती है, वह प्री समर में होती है, जिससे जो बर्फ गिरती है, उसके पिघलने की रफ्तार अधिक होती है।
 

 

भालू कुछ इलाकों में सक्रिय हैं, वह भोजन की तलाश में आबादी के करीब आ रहे हैं। उनकी सक्रियता का एक कारण कम बर्फबारी है, जिससे वह शीत निद्रा में नहीं जा पा रहे हैं। ऐसे इलाकों में सुरक्षा बढ़ाई गई है। -आकाश वर्मा, वन संरक्षक, गढ़वाल वृत्त

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पिछले साल भालू के हमले की हुईं 116 घटनाएं

पिछले साल भालू के हमले की 116 घटनाएं हुई थीं। इन हमलों में आठ लोगों की मृत्यु हो गई थी, जबकि 108 लोग घायल हुए थे। इस साल जनवरी से अब तक राज्य के विभिन्न स्थानों पर भालू के हमलों की नौ घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

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