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छोटी उम्र की ये पहाड़ी बेटी पूरी करेगी दुनियां की सबसे मुश्किल चुनाैती
अभिषेक सिंह/अमर उजाला,हल्द्वानी
Updated Sat, 23 Sep 2017 02:02 PM IST
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वंदिता को पांच डिग्री सेल्सियस से भी कम तापमान वाले पानी में तैरना होगा
- फोटो : google
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उत्तराखंड की बेटी दुनिया की सबसे मुश्किल चुनौति का सामना करने वाली है। इस चुनौति के बारे में जानकर आपकी हड्डियां जम जाएंगी।
पिथौरागढ़ की वंदिता धारियाल का अगला लक्ष्य दुनिया की सबसे मुश्किल तैराकी की चुनौती है। जिसके अंतर्गत उन्हें पांच डिग्री सेल्सियस से भी कम तापमान वाले पानी में तैरना होगा।
वंदिता को इस हड्डियां जमाने पानी में डेढ़ किलोमीटर तैरना होगा। गौर करने वाली बात यह है कि इस तापमान पर शरीर के अंगों के निष्क्रिय होने का खतरा रहता है। वंदिता दिसंबर से जनवरी के बीच इस चुनौती को पार करेंगी।
लंदन स्कूल ऑफ कामर्स से अर्थशास्त्र में परास्नातक कर रही वंदिता ने फोन पर हुई बातचीत में अपनी इस नई चुनौती के बारे में बताया।
वंदिता ने हाल ही में 13:10 घंटे तैरकर 35 किलोमीटर लंबा इंग्लिश चैनल 17 डिग्री सेल्सियस के तापमान में पार किया है। ऐसा करने वाली वह उत्तराखंड की पहली और भारतीय मूल की 14वीं युवती हैं।
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वंदिता के नाम तैराकी में तीन अंतरराष्ट्रीय, जबकि 60 राष्ट्रीय पदक हैं। वंदिता धारियाल उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के छोटे से गांव सिल्कोट चौड़मुन्या के धारियाल परिवार की बेटी हैं।
वंदिता के दादा चंद्रदत्त धारियाल भी नामी शख्स है उन्हें सेल्युलोज की खोज के लिए तीन बार राष्ट्रपति पुरस्कार मिल चुका है। इस समय वंदिता का परिवार गुजरात में रहता है, वहां उनके पिता योगेश धारियाल का कैमिकल का बिजनेस है।
22 वर्षीय वंदिता ने बताया कि तैराकी के लिए उसके दादा ने प्रेरित किया। उनका कहना है कि जाे काम करो मन से करो वर्ना मत करो। वंदिता ने बताया कि तैराकी में इंग्लिश चैनल को माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने के समान माना जाता है।
इंग्लैंड से फ्रांस तक इंग्लिश चैनल तैरकर पार करने का पहला सफल प्रयास कैप्टन मैथ्यू वेब ने 1800 के दशक में किया था। उन्होंने बताया कि आज दुनिया के करीब 1755 तैराक ऐसे हैं, जिन्होंने इंग्लिश चैनल पार किया है। औसतन 10 तैराक प्रति वर्ष इसे पार करते हैं।
वंदिता भारत से 50वीं ऐसी तैराक हैं, जिन्होंने यह चैनल पार किया है। विश्व चैंपियनशिप और एशियाई अलग-अलग आयु वर्ग सहित 7 अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में भारत का प्रतिनिधित्व करने के बाद तैराकी के क्षेत्र में इंग्लिश चैनल पार करना वंदिता की बड़ी उपलब्धि है।
इंग्लिश चैनल पार करने के लिए करीब चार लाख रुपये का खर्च आया।
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पिथौरागढ़ की वंदिता धारियाल का अगला लक्ष्य दुनिया की सबसे मुश्किल तैराकी की चुनौती है। जिसके अंतर्गत उन्हें पांच डिग्री सेल्सियस से भी कम तापमान वाले पानी में तैरना होगा।
वंदिता को इस हड्डियां जमाने पानी में डेढ़ किलोमीटर तैरना होगा। गौर करने वाली बात यह है कि इस तापमान पर शरीर के अंगों के निष्क्रिय होने का खतरा रहता है। वंदिता दिसंबर से जनवरी के बीच इस चुनौती को पार करेंगी।
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लंदन स्कूल ऑफ कामर्स से अर्थशास्त्र में परास्नातक कर रही वंदिता ने फोन पर हुई बातचीत में अपनी इस नई चुनौती के बारे में बताया।
वंदिता ने हाल ही में 13:10 घंटे तैरकर 35 किलोमीटर लंबा इंग्लिश चैनल 17 डिग्री सेल्सियस के तापमान में पार किया है। ऐसा करने वाली वह उत्तराखंड की पहली और भारतीय मूल की 14वीं युवती हैं।
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वंदिता के नाम तैराकी में तीन अंतरराष्ट्रीय, जबकि 60 राष्ट्रीय पदक हैं। वंदिता धारियाल उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के छोटे से गांव सिल्कोट चौड़मुन्या के धारियाल परिवार की बेटी हैं।
वंदिता के दादा चंद्रदत्त धारियाल भी नामी शख्स है उन्हें सेल्युलोज की खोज के लिए तीन बार राष्ट्रपति पुरस्कार मिल चुका है। इस समय वंदिता का परिवार गुजरात में रहता है, वहां उनके पिता योगेश धारियाल का कैमिकल का बिजनेस है।
22 वर्षीय वंदिता ने बताया कि तैराकी के लिए उसके दादा ने प्रेरित किया। उनका कहना है कि जाे काम करो मन से करो वर्ना मत करो। वंदिता ने बताया कि तैराकी में इंग्लिश चैनल को माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने के समान माना जाता है।
इंग्लैंड से फ्रांस तक इंग्लिश चैनल तैरकर पार करने का पहला सफल प्रयास कैप्टन मैथ्यू वेब ने 1800 के दशक में किया था। उन्होंने बताया कि आज दुनिया के करीब 1755 तैराक ऐसे हैं, जिन्होंने इंग्लिश चैनल पार किया है। औसतन 10 तैराक प्रति वर्ष इसे पार करते हैं।
वंदिता भारत से 50वीं ऐसी तैराक हैं, जिन्होंने यह चैनल पार किया है। विश्व चैंपियनशिप और एशियाई अलग-अलग आयु वर्ग सहित 7 अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में भारत का प्रतिनिधित्व करने के बाद तैराकी के क्षेत्र में इंग्लिश चैनल पार करना वंदिता की बड़ी उपलब्धि है।
इंग्लिश चैनल पार करने के लिए करीब चार लाख रुपये का खर्च आया।
कैसी रही इंग्लिश चैनल चुनौती
इस तापमान में शरीर के अंगों के निष्क्रिय होने का खतरा रहता है
- फोटो : google
वंदिता ने बताया कि जिस दिन उसे इंग्लिश चैनल पार करना था उस दिन ग्रहण था, इसके चलते समुद्र में काफी उथल-पुथल होती है। कोई भी पायलट नेविगेशन को तैयार नहीं हो रहा था और सभी उसे एक दिन इंतजार करने के लिए कह रहे थे।
बाद में बोट पायलट साइमन इलिस आगे आए और वह अपनी टीम के साथ नेविगेशन के लिए तैयार हुए। नेविगेशन के बारे में उन्होंने बताया कि यह बहुत जरूरी होता है क्योंकि समुद्र में रास्ता पता ही नहीं चलता तो नेविगेशन टीम तैराक को रास्ता बताने में मदद करती है।
आखिरकार 13:10 घंटे तैरने के बाद 21 अगस्त 2017 को सफलतापूर्वक इंग्लिश चैनल पार कर लिया। वंदिता ने बताया कि 17 डिग्री तापमान में तैराकी के दौरान मुझे लगा कि मैं इससे ठंडे पानी में भी तैर सकती हूं।
इसलिए फिलहाल मैं दिसंबर, जनवरी में आइस माइल चैलेंज की तैयारी में जुटी हूं। हालांकि वह काफी खतरनाक है क्योंकि इस तापमान में आपके शरीर के अंगों के निष्क्रिय होने का खतरा रहता है।
आइस माइल चैलेंज
आईस माइल चैलेंज एक तरह से बर्फ के पानी में तैराकी की अंतिम उपलब्धि मानी जाती है। आइस माइल चैलेंज के लिए तैराक को एक चश्मे, टोपी और मानक तैराकी पोशाक के साथ पार करना होता है।
पानी का तापमान पांच डिग्री सेल्सियस से भी कम होता है। सन् 2014 में इंटरनेशनल आइस स्विमिंग एसोसिएशन (आईआईएसए) ने 1 किलोमीटर आइस इवेंट को पेश किया। इस घटना में तैराकों को आईएसए नियमों के अंतर्गत बर्फीले पानी में प्रतिस्पर्धा करने की अनुमति मिलती है।
आईआईएसए ने विश्व के रिकॉर्ड को अपनी दृष्टि से रखने के लिए निर्धारित किया है जिसमें शीतकालीन ओलंपिक खेलों में एक श्रेणी के रूप में तैराकी शामिल है और इसे विश्व स्तर पर खेल में मान्यता प्राप्त है।
बाद में बोट पायलट साइमन इलिस आगे आए और वह अपनी टीम के साथ नेविगेशन के लिए तैयार हुए। नेविगेशन के बारे में उन्होंने बताया कि यह बहुत जरूरी होता है क्योंकि समुद्र में रास्ता पता ही नहीं चलता तो नेविगेशन टीम तैराक को रास्ता बताने में मदद करती है।
आखिरकार 13:10 घंटे तैरने के बाद 21 अगस्त 2017 को सफलतापूर्वक इंग्लिश चैनल पार कर लिया। वंदिता ने बताया कि 17 डिग्री तापमान में तैराकी के दौरान मुझे लगा कि मैं इससे ठंडे पानी में भी तैर सकती हूं।
इसलिए फिलहाल मैं दिसंबर, जनवरी में आइस माइल चैलेंज की तैयारी में जुटी हूं। हालांकि वह काफी खतरनाक है क्योंकि इस तापमान में आपके शरीर के अंगों के निष्क्रिय होने का खतरा रहता है।
आइस माइल चैलेंज
आईस माइल चैलेंज एक तरह से बर्फ के पानी में तैराकी की अंतिम उपलब्धि मानी जाती है। आइस माइल चैलेंज के लिए तैराक को एक चश्मे, टोपी और मानक तैराकी पोशाक के साथ पार करना होता है।
पानी का तापमान पांच डिग्री सेल्सियस से भी कम होता है। सन् 2014 में इंटरनेशनल आइस स्विमिंग एसोसिएशन (आईआईएसए) ने 1 किलोमीटर आइस इवेंट को पेश किया। इस घटना में तैराकों को आईएसए नियमों के अंतर्गत बर्फीले पानी में प्रतिस्पर्धा करने की अनुमति मिलती है।
आईआईएसए ने विश्व के रिकॉर्ड को अपनी दृष्टि से रखने के लिए निर्धारित किया है जिसमें शीतकालीन ओलंपिक खेलों में एक श्रेणी के रूप में तैराकी शामिल है और इसे विश्व स्तर पर खेल में मान्यता प्राप्त है।