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अपनी जान जोखिम में डालकर नन्हें फरिश्तों ने बचाई दूसरों की जान, अब मिलेगा राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार

Thu, 05 Oct 2017 11:41 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 05 Oct 2017 11:41 PM IST
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six children will get National Bravery Awards from uttarakhand

राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार के लिए उत्तराखंड से इस बार छह बहादुर बच्चों के नाम भारतीय बाल कल्याण परिषद नई दिल्ली को भेजे गए हैं। इसमें सबसे अधिक चार बच्चे ऊधमसिंह नगर जनपद के हैं। इनमें से चयनित बच्चों को देशभर से चुने गए अन्य बच्चों के साथ 26 जनवरी को सम्मानित किया जाएगा।

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ऊधमसिंह नगर के ग्राम वंदिया किच्छा की 15 वर्षीय कनिका गुप्ता ने 28 जून 2016 को अपनी जान जोखिम में डालकर बिजली के करंट से तीन वर्षीय अलका की जान बचाई थी। खेल-खेल में अलका ने बगैर बल्ब वाले होल्डर को छू लिया था, जिसे करंट लगने पर कनिका ने सूझबूझ का परिचय देते हुए झाड़ू से बिजली के होल्डर को हटाकर अलका की जान बचाई।
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वही ग्राम नारगढ रजाखेत जिला टिहरी के पंकज सेमवाल ने 10 जुलाई 2016 को गुलदार के हमले से अपनी मां की जान बचाई थी। पंकज अपनी मां 42 वर्षीय विमला देवी और भाई-बहन के साथ दूसरी मंजिल पर घर के बरामदे में सो रहा था। रात एक बजे गुलदार उसकी मां पर झपट गया। चीख व शोर सुनकर पंकज ने डंडे से गुलदार पर हमला कर उसे भगा दिया।
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उत्तराखंड के 10 बहादुर बच्चे हो चुके सम्मानित

six children will get National Bravery Awards from uttarakhand

जबकि चमोली जिले के ग्राम छिमटा सिलपाटा गैरसैंण के ईश्वर सिंह ने 24 जुलाई 2016 को उफनते गदेरे में गिरी युवती की जान बचाई। गांव की 20 वर्षीय युवती सती जंगल से घास लेकर घर लौट रही थी। रास्ते में पुलिया से गुजरते हुए गाय के धक्का देने से वह उफनते गदेरे में जा गिरी।

पीछे से आ रहे ईश्वर ने काफी मशक्कत के बाद युवती को गदेरे से बाहर निकाल लिया। वहीं, काशीपुर के रामनगर रोड निवासी सातवीं के छात्र युवराज चावला ने अपने मित्रो अभय और अक्षत गुप्ता के साथ मिलकर 19 नवंबर को मोबाइल लूटकर भाग रहे बदमाशों को पकड़ा था।

उत्तराखंड के 10 बहादुर बच्चे हो चुके सम्मानित
उत्तराखंड के अब तक दस बहादुर बच्चों को राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। इन बच्चों ने अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरों की जान बचाई।

बहादुर बच्चों के कार्यों को सराहा
परिषद के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुशील चंद्र डोभाल, उपाध्यक्ष डॉ.आईएस पाल, डॉ.कुसुम रानी नैथानी, मधु बेरी, महासचिव बीके डोभाल, संयुक्त सचिव कमलेश्वर भट्ट, कुसुम, भूपेश जोशी, डॉ.जेसी मिश्रा, केपी सती, आईबी कोचगवे, परमवीर कठैत और विनोद थपलियाल ने उत्तराखंड के इन बहादुर बच्चों के कार्य की सराहना की है।

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