300 रुपये से शुरू किया बिजनेस, आज कई महिलाओं को दे रही रोजगार
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कहते हैं ना राह चाहे कितनी मुश्किल हो, हार नहीं माननी चाहिए। मंजिल देर सवेर आपको मिल ही जाती है। ये उदाहरण सच साबित होता है चंपावत की दीपा खर्कवाल के बारे में। दीपा ने महज तीन सौ रुपये से शुरू किए बिजनेस को अपनी कड़ी मेहनत के बाद बड़े मुकाम तक पहुंचाया है।
1999 में एक हादसे ने दीपा की जिंदगी बदल दी। पति कैलाश ने बीमारी के चलते बिस्तर पकड़ लिया। अब पूरे परिवार की जिम्मेदारी दीपा के कंधों पर आ गई। लेकिन, किस्मत को आंख दिखाते हुए दीपा ने गारमेंट्स का बिजनेस शुरू किया। इसके बाद दीपा ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
टीवी चैनल को देखकर आया आईडिया
एक टीवी चैनल में कार्यक्रम के दौरान उन्हें यह आईडिया क्लिक किया। एक अखबार को दिए इंटरव्यू में वह कहती हैं कि टीवी में एक महिला तकिये के कवर बनाने और बाजार में उन्हें बेचने का काम करती थी। इस कार्यक्रम को देख मेरे मन में भी गारमेंट्स का काम करने का विचार आया। लेकिन उस वक्त मेरे पास केवल 300 रुपये थे। इससे मैंने एक सिलाई मशीन खरीदी और महिलाओं के कपड़े सिलने लगी।
वह आगे बताती है कि इस दौरान उन्हें कई परेशानी आई। लेकिन हिम्मत नहीं हारी और निरंतर मेहनत करती रही। आज खर्कवाल बुटीक क्षेत्र का एक खास ब्रांड बन चुका है।
उनका बिजनेस आज इस मुकाम पर है कि वह 10-12 महिलाओं को रोजगार भी दे रही हैं। दीपा की इसी मेहनत और लगन को देखते हुए उद्योग विभाग ने नौ वर्ष पूर्व उन्हें सर्वश्रेष्ठ उद्यमी के पुरस्कार से भी नवाजा। आज वह समाज में आर्थिक रूप से कमजोर और अशक्त महिलाओं के लिए प्रेरणा बनी हुई हैं।