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बसंत पंचमी पर शुभ मुहूर्त में शुरु करें पढ़ाई
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 11 Feb 2016 05:08 PM IST
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शुक्रवार के दिन यानी 12 फरवरी को ऋतुराज बसंत का आगमन हो रहा है। इस दिन बच्चों का विद्यारंभ संस्कार किया जाता है। पुरोहितों की माने तो इस संस्कार के लिए सर्वाधिक शुभ मुहूर्त सुबह 8:32 से लेकर 9:55 तक शुभ है। इस दौरान मीन लग्न रहेगा। इसके साथ ही राहुकाल में विद्यारंभ संस्कार से परहेज करें।
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माघ शुक्ल की पंचमी तिथि के दिन बसंत ऋतु का शुभारंभ माना जाता है। इस दिन वाणी की अधिष्ठात्री सरस्वती देवी की पूजा की जाती है। ब्रह्मवैवर्त पुराण में लिखा है कि भगवान कृष्ण के कंठ से उत्पन्न देवी का नाम सरस्वती पड़ा। आचार्य भरत राम तिवारी के अनुसार इस वर्ष पंचमी तिथि क्षय हो रही है।
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ऐसा योग साल में एक या दो बार आता है, जो तिथि सूर्योदय के समय नहीं शुरू होकर अगले दिन भी सूर्योदय के समय नहीं रहे, ऐसी तिथि क्षय मानी जाती है। डॉ. आचार्य सुशांत राज के अनुसार पंचमी तिथि 12 फरवरी को प्रात: 9:05 मिनट पर लगेगी और 13 फरवरी को सुबह 6:30 बजे तक रहेगी।
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अमृत सिद्धि योग 12 फरवरी से सुबह 9:05 मिनट से 13 को सुबह 7:10 बजे तक रहेगा। रेवती नक्षत्र, साध्य योग 12 फरवरी को ही रहेगा। पंडित ज्ञानेंद्र पांडे के अनुसार अमृत सिद्धि योग होने से विद्यारंभ के लिए विशेष मुहूर्त 12 फरवरी को प्रात: 8:32 मिनट से 9:55 मिनट तक मीन लग्न में रहेगा।
प्रात: नौ से साढ़े दस बजे तक अमृत की चौघड़िया मुहूर्त रहेगा। इसके बाद 10:30 से 12:00 बजे मध्याह्न तक राहुकाल रहेगा। राहुकाल को त्याग कर विद्यारंभ संस्कार करना शुभ रहेगा। राहुकाल के अलावा इस अवधि में साढ़े दस से 12 बजे तक काल की चौघड़िया भी शुभ नहीं रहेगी।
सर्वप्रथम किया जाता है गणेश जी का पूजन
इस दिन गेहूं और जौ की बालियां घरों में मुख्य द्वार पर लगाने की परंपरा है। सर्वप्रथम गणेश पूजन उसके बाद रति और कामदेव की पूजा की जाती है।
बसंत पंचमी को भगवान श्री विष्णु सरस्वती एवं श्रीकृष्ण-राधा की पूजा पीले पुष्पों, मीठे चावलों एवं हलवे का भोग लगाकर स्वयं सेवन करने की परंपरा है। माना जाता है कि इस दिन शुभ मुहूर्त में विद्यारंभ संस्कार संपन्न करने से बच्चे समाज एवं देश का गौरव बनते हैं।
शहद से जीभ में लिखते हैं अ
इस दिन विद्यारंभ संस्कार के साथ ही चांदी के चम्मच या सिक्के से बच्चे की चीभ में शहद से अ लिखा जाता है। इसके साथ ही बच्चों का स्कूल में दाखिला आदि कराया जाता है। विधिवत संस्कार के बाद माना जाता है कि बच्चा बेहद बुद्धिमान होगा।