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बैराज दूर करेंगे पहाड़ों में पानी का संकट
विनोद कुमार सिंह / अमर उजाला, रुड़की
Updated Fri, 17 Feb 2017 11:52 AM IST
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जल विद्युत परियोजना
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पहाड़ों में पेयजल संकट दूर करने की कवायद की जा रही है। इसके लिए रानीखेत में गगास नदी पर बैराज का निर्माण प्रस्तावित है। इसके अलावा गैरसैंण में रामगंगा नदी पर बैराज के लिए आईआईटी रुड़की ने डिजायन तैयार कर लिया है। मार्च के दूसरे सप्ताह में साइड विजिट कर डिजायन फाइनल किया जाएगा।
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पहाड़ी राज्य के कारण उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में पेयजल संकट बना हुआ है। यहां की नदियों में अचानक पानी आता है और फिर उतर जाता है। बरसात के पानी की स्टोरेज की व्यवस्था भी कहीं नजर नहीं आती। जिसकी वजह से गर्मियों में पेयजल की समस्या आम है। अल्मोड़ा में तीन साल पहले पेयजल की समस्या को देखते हुए बैराज बनाया गया था। इसका डिजायन आईआईटी रुड़की ने तैयार किया था।
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इस बैराज में चार लाख क्यूबिक मीटर पानी स्टोरेज की व्यवस्था है। अल्मोड़ा के बाद अब उत्तराखंड सिंचाई विभाग गैरसैंण और रानीखेत में बैराज निर्माण की कवायद कर रहा है। इसके लिए आईआईटी रुड़की सिविल इंजीनियरिंग विभाग के वैज्ञानिकों से सलाह मांगी गई है। इस संबंध में आईआईटी सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. जुल्फिकार अहमद का कहना है कि गैरसैंण में पेयजल की समस्या के समाधान के लिए उत्तराखंड सिंचाई विभाग की ओर सेे बैराज का निर्माण किया जाना है।
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इसका डिजायन आईआईटी रुड़की को तैयार करना है, लेकिन जनवरी में बर्फबारी और फिर फरवरी में चुनाव के कारण स्थलीय निरीक्षण संभव नहीं हो पाया है। मार्च के दूसरे सप्ताह में साइड विजिट कर इसका डिजायन फाइनल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि रानीखेत में गगास नदी पर बैराज बनाया जाना है, इसके लिए आईआईटी रुड़की से डीपीआर मांगी गई है।