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उत्तराखंड: बैंक कर्मियों की हड़ताल से बैंकों में कामकाज ठप, 5000 करोड़ का लेनदेन प्रभावित
Wed, 26 Dec 2018 09:53 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Wed, 26 Dec 2018 09:53 PM IST
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सड़कों पर उतर आए कर्मचारी
- फोटो : अमर उजाला
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बैंक ऑफ बड़ौदा, विजया बैंक और देना बैंक के विलय के केंद्र सरकार के प्रस्ताव के खिलाफ यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के बैनर तले पूरे प्रदेश में बैंक अधिकारी और कर्मचारी बुधवार को सड़कों पर उतर आए। इनकी हड़ताल से जहां राज्य में 5000 करोड़ रुपये का लेनदेन प्रभावित हुआ, वहीं बैंकों में कामकाज ठप होने से खाताधारकाें को बैरंग लौटना पड़ा। इस दौरान गुस्साए कर्मचारियों ने राजपुर रोड से दर्शन लाल चौक तक जुलूस निकाला। उसके बाद परेड मैदान में सभा कर केंद्र सरकार की नीतियों की जमकर निंदा की।
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सभा को संबोधित करते हुए यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के संयोजक जगमोहन मेंदीरत्ता ने कहा कि इससे पहले केंद्र सरकार स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के सहयोगी बैंकों का विलय कर चुकी है, बावजूद बैंकों का एनपीए कम नहीं हुआ। केंद्र की गलत नीतियों के कारण बैंकों को एनपीए लगातार तेजी से बढ़ रहा है। इसकी वजह से बैंकों को अपनी कई शाखाएं और एटीएम बंद करने पड़े। वक्ताओं ने कहा कि एक तरफ केंद्र देश में नए-नए छोटे-छोटे बैंकों को लाइसेंस दे रही है, वहीं बैंकों का विलय भी कर रही है। बैंकिंग सेवाओं को केंद्र घर-घर पहुंचाना भी चाह रही है, वहीं बैंकिंग सेवाओं का तहस-नहस भी कर रही है। आरोप लगाया कि केंद्र के इशारे पर ही बैंकों ने कारपोरेट घरानों का ऋण दिया, लेकिन रिकवरी के लिए प्रयास ही नहीं किए जा रहे हैं।
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इसके अलावा वक्ताओं ने आरोप लगाया कि बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतनमान की ओर केंद्र सरकार ध्यान ही नहीं दे रही है। उन्हें केंद्रीय, राज्य और निगम कर्मचारियों से भी कम वेतन दिया जा रहा है। पूर्व में अधिकारियों और कर्मचारियों को जो सुविधाएं मुहैया कराई जा रही थी, अब उन्हें भी सरकार समाप्त करने का कुचक्र रच रही है। अधिकारियों और कर्मचारियों ने चेतावनी दी यदि बैंकों का विलय नहीं रोका गया और उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो देश के सभी बैंक अधिकारी और कर्मचारी अनिश्चितकालीन आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। हड़ताल में पूरे राज्य में 1650 बैंकों के 15000 अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए। इस दौरान पीआर कुकरेती, हरिओम रेखी, समदर्शी बड़थ्वाल, आरपी शर्मा, बीपी सुंदरियाल, कुंदन सिंह, राजन पुंडीर, शार्दूल ढौडियाल, आरके गैरोला, मुरारीलाल नौटियाल, डीएन उनियाल, अनिल जैन, इंदरसिंह आदि मौजूद रहे।
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