जानिए, कैसे डिजिटल इंडिया मुहिम को पलीता लगा रहे बैंक
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डिजिटल इंडिया मुहिम में बैंक ही रोड़ा बन रहे हैं। राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक में दून उद्योग व्यापार मंडल ने प्रमुखता से यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि बैंक उन्हें एसओपी मशीनें और डिजिटल लेन-देन के लिए आईडी उपलब्ध नहीं कर रहे हैं। बैठक में तय किया गया कि अब बैंक और व्यापारियों के बीच वार्ता कर इसका हल निकाला जाएगा।
दून उद्योग व्यापार मंडल के संगठन मंत्री सुनील मैसोन ने एसएलबीसी को बताया कि आजकल अलग-अलग माध्यमों से भुगतान के लिए कई खाते रखने पड़ते हैं, जिनका बैंक से मिलान में काफी समय लग रहा है।
अगर कोई थोक व्यापारी फुटकर व्यापारी को माल देता है और उसे चेक से भुगतान करता है तो चेक बाउंस भी हो जाता है और 173 रुपये काट लिए जाते हैं। स्पीड क्लीयरिंग के नाम पर बैंक मनमर्जी से चार्ज लगा रहे हैं। क्लीयरिंग में अगर पेमेंट देने वाले बैंक का सर्वर नहीं चल रहा है और चेक वापस हुआ तो दोबारा चेक लगाने पर चार्ज वसूला जा रहा है।
आरटीजीएस के तहत एक लाख रुपये तक पांच रुपये शुल्क वसूला जा रहा है। स्वैप मशीन या तो मिल नहीं रही है या बैंक 400 से 500 रुपये प्रतिमाह किराया वसूल रहे हैं। स्वैप पर भी पैसे काटे जा रहे हैं। तमाम व्यापारी ऐसे हैं, जो अपने डिजिटल खातों की आईडी के लिए बैंकों के चक्कर काट रहे हैं। बैंक कैश हैंडलिंग जैसे चार्ज के नाम पर भी मनमानी वसूली कर रहे हैं।
30 जून तक वी-सैट से कनेक्ट होगा पहाड़
डिजिटल ट्रांजेक्शन की दिशा में 30 जून तक उत्तराखंड वी-सैट से कनेक्ट हो जाएगा। राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक में प्रमुख सचिव मनीषा पंवार ने बैंकों को वी-सैट से कनेक्टिविटी के निर्देश दिए। उन बैंकों से जवाब भी मांगा गया, जिन्होंने अभी तक वी-सैट नहीं खरीदे हैं।
एसएलबीसी की बैठक में प्रदेश के 1181 सर्विस सेंटर को वी-सैट से कनेक्ट करने का मुद्दा उठा। अधिकारियों ने बताया कि अभी तक 260 सर्विस सेंटर्स पर बैंक वैकल्पिक माध्यमों से बैंकिंग सेवाएं शुरू कर चुके हैं। 921 में से 666 सेंटर्स के लिए वी-सैट खरीदने के ऑर्डर बैंकों ने कर दिए हैं।
केवल उत्तराखंड ग्रामीण बैंक ने 202, नैनीताल बैंक ने 49, इलाहाबाद बैंक ने दो और एसबीआई ने दो वी-सैट खरीदने का ऑर्डर नहीं दिया है। मामले में प्रमुख सचिव मनीषा पंवार ने तत्काल वी-सैट खरीदने के निर्देश जारी किए। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि 30 जून तक प्रदेश में सभी जगहों पर वी-सैट स्थापित कर दिए जाएं। ताकि डिजिटल बैंकिंग की राह आसान हो।
ऋण-जमा अनुपात तीन प्रतिशत बढ़ा
एसएलबीसी की बैठक में बताया गया कि प्रदेश में ऋण-जमा अनुपात दिसंबर के 52 प्रतिशत के मुकाबले बढ़कर मार्च में 55 प्रतिशत पहुंच गया है। हालांकि, तीन बैंकों का यह अनुपात 40 प्रतिशत से कम है। इंडियन बैंक का अनुपात 24 प्रतिशत, सेंट्रल बैंक का अनुपात 27 प्रतिशत और सिंडिकेट बैंक का अनुपात 37 प्रतिशत है। इसके अलावा अल्मोड़ा जिले का अनुपात 20 प्रतिशत, बागेश्वर का 23 प्रतिशत, पौड़ी का 24 प्रतिशत, रुद्रप्रयाग का 26 प्रतिशत और चमोली का 29 प्रतिशत ऋण-जमा अनुपात पाया गया। इन बैंकों और जिलों को अपना ऋण-जमा अनुपात बढ़ाने के निर्देश दिए गए। आमतौर पर 60 प्रतिशत के अनुपात को आदर्श रेशियो माना जाता है।