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उत्तराखंड: आदमखोर घोषित कर वन्यजीवों को मारने पर प्रतिबंध

Tue, 20 Dec 2016 03:31 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नैनीताल
ब्यूरो/ अमर उजाला, नैनीताल Updated Tue, 20 Dec 2016 03:31 AM IST
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ban on killing of man eater wild life.
नैनीताल हाईकोर्ट - फोटो : PTI

नैनीताल हाईकोर्ट ने उत्तराखंड में वन्य जीवों को आदमखोर घोषित कर मारने पर रोक लगा दी है। साथ ही केंद्र सरकार को छह माह में राष्ट्रीय वन नीति बनाने और राज्य सरकार को नेशनल पार्कों, अभ्यारण्यों के दस किलोमीटर दायरे में निर्माण कार्य पूरी तरह से प्रतिबंधित करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने जंगल की आग को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है।

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हाईकोर्ट ने कहा है कि 24 घंटे के अंदर जंगल की आग पर काबू न पाने पर डीएफओ, 48 घंटे में वन संरक्षक और 72 घंटे में प्रमुख वन संरक्षक को निलंबित किया जाए और इनके खिलाफ आग पर नियंत्रण न कर पाने की एवज में अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाए।
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साथ ही वनाग्नि की रोकथाम के लिए गर्मियों में प्रदेश में दस हजार फायर वॉचर तैनात करने और वन विभाग का फील्ड स्टाफ तीस प्रतिशत बढ़ाने का आदेश दिया है।

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खुद को बचाने के लिए जंगलों को बचाना होगा: कोर्ट

ban on killing of man eater wild life.
हाईकोर्ट भवन नैनीताल - फोटो : अमर उजाला

वरिष्ठ न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और आलोक सिंह की खंडपीठ ने वनाग्नि, वन्य जीव सुरक्षा और वन संरक्षण को लेकर सख्त रुख अपनाया। पूर्व में खंडपीठ ने वनाग्नि से संबंधित याचिका पर सुनवाई करने के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया था। सोमवार को खंडपीठ ने 93 पेज के आदेश में आदेश जारी करते हुए खंडपीठ ने कहा कि खुद को बचाने के लिए हमें जंगलों को बचाना होगा। वर्तमान पीढ़ी को वन संपदा को नष्ट करने देकर बच्चों से उनका भविष्य नहीं छीना जा सकता।

वन्य जीवों पर फैसला
उत्तराखंड में बाघ, तेंदुआ सहित अन्य वन्य जीवों को आदमखोर घोषित कर मारा नहीं जाएगा। मानव के लिए खतरा साबित होने वाले वन्य जीवों को बेहोश कर जिंदा ही पकड़ा जाएगा। इन वन्य जीवों को अस्थाई रूप से चिड़ियाघरों में रखा जाएगा और बाद में उनके वास स्थल में छोड़ जाएगा।
वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए जिम कार्बेट नेशनल पार्क के चारों ओर केंद्र सरकार के सहयोग से राज्य सरकार पत्थर की दीवार बनवाए। 
-किसी भी मृत वन्य जीव की फोटो अखबार व इलेक्ट्रानिक माध्यम में प्रदर्शित नहीं की जाएगी।

हाथियों की सुरक्षा पर
- हाथियों को बिजली की चपेट में आने से बचाने के लिए वर्ष 11 नंवबर 2009 को जारी की गई अधिसूचना का पालन पूरी तरह से किया जाए।
-हाथियों को बचाने के लिए वन विभाग और रेलवे विभाग समन्वय बनाए। नेशनल पार्क क्षेत्र में ट्रेन की गति सीमा 30 किलोमीटर प्रति घंटे तक ही रखी जाए।

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