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‘फूल’ के साथ बांस की विदाई का आया वक्त, ग्रामीण परेशान
मदन बिष्ट/ अमर उजाला, हल्द्वानी
Updated Sun, 05 Jun 2016 12:13 PM IST
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बांस
- फोटो : concept photo
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हाथियों का प्रिय भोजन बांस फूलने के बाद सूख रहा है। जिसे देखकर चारे के संकट से ग्रामीण चिंतित हैं जबकि वनकर्मी इसे बांस के पेड़ की उम्र पूरी होना बता रहे हैं।
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आजकल कार्बेट लेंडस्केप के जंगल में बांस फूलने के बाद सूख रहा है। विशेषकर पवलगढ़ कंजर्वेशन रिजर्व में दाबका नदी किनारे और कार्बेट लेंडस्केप के उत्तरी जसपुर फांटो, दक्षिणी जसपुर पतरामपुर रेंज में बांस के पेड़ सूख रहे हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि बांस पर फूल आना, उसकी उम्र पूरी होने का संकेत हैं यह तभी वह सूखता है।
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वहीं, ग्रामीणों का तर्क है कि पहले बांस को चारा, हस्तशिल्प, फर्नीचर, घर बनाने के लिए काटते थे। जिससे बांस के नए कल्ले फूटते रहते थे। इससे बांस खत्म नहीं होता था लेकिन अब जंगलात वाले बांस नहीं काटने देते। वनकर्मी बताते हैं कि प्रजाति के अनुसार बांस की औसत आयु तीन से 120 वर्ष तक होती है।
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अगर किसी पौधे की कलम भी कहीं लगी होगी तो वह भी मूल पौधे की उम्र पर फूल, फलकर सूख जाएगा। यह भी विडंबना है कि जहां एक ओर बांस को पूर्वोत्तर भारत में सांस्कृतिक धरोहर माना जाता है वहीं पहाड़ में इसे लगाना अपशकुन माना जाता है जबकि बांस की गांठ से कार्बन भी अवशोषित होता है।
आजकल कांटेदार प्रजाति का बांस फूल रहा है। इस प्रजाति की औसत आयु करीब 40 वर्ष है। वनकर्मी इसके बीज को सहेज रहे हैं। जिसे नर्सरी में उगाकर फिर से जंगल में पौधरोपण किया जाएगा।
- मदन सिंह बिष्ट, प्रभारी/रेंजर, एफटीआई नर्सरी हल्द्वानी