बलूनी आत्महत्याः उलझती कहानी में परिवार के साथCM
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रेलवे के सीनियर इंस्पेक्टर ट्रैफिक (एकाउंट्स) सुनील कुमार बलूनी की खुदकुशी के मामले में उनके परिजनों के उत्पीड़न के आरोपों को विजिलेंस ने बेबुनियाद करार दिया है।
नार्दर्न रेलवे के चीफ विजिलेंस आफिसर एसडीजीएम रजनीश सहाय की मानें तो बलूनी अपनी लड़ाई लड़ सकते थे। विभागीय कार्रवाई का रास्ता उनके पास था। दिल्ली में बैठे अधिकारियों के पास उन्होंने शिकायत क्यों दर्ज नहीं कराई।
बकौल सहाय बलूनी के खिलाफ शिकायत आई थी, जिस पर जांच की गई। उनके खिलाफ सभी संबंधित सुबूत, आडियो टेप हैं। दावा किया कि बलूनी को रंगे हाथों पकड़ा गया था। कार्रवाई में स्थानीय अधिकारियों को क्यों साथ नहीं लिया गया?
सवाल पर उनका कहना था कि कार्रवाई में पारदर्शिता बनी रहे, इसीलिए टीम दिल्ली से भेजी गई थी। यह दुखद है कि बलूनी ने दुनिया से जाने का रास्ता चुना। ज्यादा कुछ क्या कहा जा सकता है? ऐसे में सहानुभूति उनके और उनके परिवार के साथ ही होगी, इसमें कोई दो राय नहीं।
सहाय के मुताबिक, यह नहीं कहा जा सकता कि बलूनी पहले से ऐसे रहे होंगे, लेकिन सारे सुबूत उनके खिलाफ हैं।अब तो बलूनी हैं नहीं। सुसाइड नोट में कुछ नाम भी लिखकर गए हैं। मामला पुलिस के हाथों में है। क्रिमिनल प्रोसीजर चल रहा है, जो भी इसका नतीजा होगा वह मान्य होगा।
सरकार परिवार के साथ, जो जांच कहें, कराएंगे
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने रेलवे अधिकारी सुनील कुमार बलूनी की मौत को गंभीर मामला माना है। सीएम ने साफ किया कि सरकार पीड़ित परिवार के साथ है। भरोसा दिलाया है कि परिजन सीबीआई जांच के लिए कहेंगे, तो इसकी संस्तुति की जाएगी। उधर, डीआईजी ने भी कहा है कि मामले की सीबीआई जांच पर पुलिस को कोई आपत्ति नहीं है।
रेलवे के सीनियर ट्रैफिक इंस्पेक्टर (पार्सल सेक्शन) सुनील कुमार बलूनी ने मंगलवार दोपहर ट्रेन के आगे कूदकर खुदकुशी कर ली थी। परिजन मामले में सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं। बृहस्पतिवार को परिजनों की सीएम हरीश रावत से मुलाकात नहीं हो सकी थी।
शुक्रवार को मीडिया से मुखातिब मुख्यमंत्री ने सवालों के जवाब देते हुए कहा कि पीड़ित पक्ष जो भी जांच मांगे, सरकार कराएगी। घटना को दुखद बताते हुए सीएम ने कहा कि यह साफ होना चाहिए आखिर ऐसी कौन सी परिस्थितियां हुई, जिस कारण बलूनी को मौत की राह चुननी पड़ी।
उधर, डीआईजी संजय गुंज्याल ने परिजनों से कहा कि पुलिस को भी सीबीआई जांच कराने में कोई आपत्ति नहीं है। बताया कि वह अपने स्तर से मुख्यालय को रिपोर्ट भेज रहे हैं।
पुलिस दबिश से पहले सहगल फरार
परिजनों के भारी दबाव के बाद बलूनी की खुदकुशी के चौथे दिन पुलिस ने एक नामजद आरोपी दलाल जोगेंद्र सिंह सहगल के घर दबिश दी, लेकिन वह पहले से फरार है। बाकी तीन आरोपी दिल्ली के रहने वाले हैं। बलूनी के परिजनों ने पुलिस कार्रवाई पर असंतोष जताया है।
बलूनी के परिजनों का आरोप है कि पुलिस शुरुआत से ही मामले में लापरवाह रवैया अपनाए हुए है। सुसाइड नोट में जिक्र होने के बावजूद आरोपियों पर मुकदमा नहीं किया गया। परिजनों के भारी हंगामे के बाद बृहस्पतिवार को केस दर्ज किया गया था, लेकिन इसके बाद भी किसी आरोपी की तलाश नहीं की गई।
परिजनों की मांग पर शुक्रवार को पुलिस दून निवासी दलाल जोगेंद्र सिंह सहगल के खुड़बुड़ा स्थित आवास पर पहुंची, लेकिन वह नहीं मिला। पुलिस उसके परिजनों को सख्त हिदायत देकर लौट आई। बाकी तीन आरोपी विजिलेंस इंस्पेक्टर हेमंत वासुदेव, दलाल राजू तिवारी और ठेकेदार सतेंद्र कुमार दिल्ली में रहते हैं।
उधर बलूनी की साली आशा भट्ट, साढू गिरीश सती आदि परिजनों ने डीआईजी संजय गुंज्याल से मिलकर पुलिस पर गंभीरता से कार्रवाई न करने का आरोप लगाया है। कहा कि विवेचक ने अब तक उनसे संपर्क नहीं किया है। इसके बाद शाम को डीआईजी के निर्देश पर पुलिस बलूनी के घर पहुंची और परिजनों के बयान दर्ज किए।