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फिर बर्फबारी से ढकी उत्तराखंड की वादियां, बोल्डर गिरने से बदरीनाथ हाईवे नौ घंटे रहा बंद 

Mon, 18 Feb 2019 08:50 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क/अमर उजाला, जोशीमठ
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, जोशीमठ Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Mon, 18 Feb 2019 08:50 AM IST
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Badrinath highway closed after falling boulder and snowfall 
बदरीनाथ हाईवे

रविवार को भी बदरीनाथ धाम, हेमकुंड साहिब, रुद्रनाथ, फूलों की घाटी के साथ ही ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी हुई। बदरीनाथ धाम में करीब आठ फीट तक बर्फ जम गई है। धाम में आस्था पथ भी पूरी तरह से बर्फ से ढका हुआ है। हेमकुंड साहिब में भी करीब साढ़े दस फीट तक बर्फ जम गई है। 

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रविवार को दोपहर बाद मौसम ने करवट बदली। सुबह से के ऊंचाई और निचले क्षेत्रों में चटख धूप खिली, लेकिन दोपहर दो बजे बाद से ऊंचाई वाले क्षेत्रों से आसमान में घने बादल छा गए। शाम चार बजे से ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी शुरू हो गई, जो रात तक भी जारी रही।
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बर्फबारी से बदरीनाथ हाईवे हनुमान चट्टी से आगे पूरी तरह से बर्फ से ढक गया है, जिससे चीन सीमा क्षेत्र में आईटीबीपी और सेना के जवानों की आवाजाही भी ठप पड़ गई है। देश के अंतिम गांव माणा में भी करीब आठ फीट बर्फ जम गई है। बदरीनाथ हाईवे पर कंचनगंगा, रड़ांगबैंड और दूध गंगा में बड़े-बड़े हिमखंड पसरे हुए हैं। 

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बोल्डर गिरने से बदरीनाथ हाईवे नौ घंटे रहा बंद 

ऋषिकेश-बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर सकनीधार के समीप बोल्डर और मलबा आने से करीब नौ घंटे यातायात ठप रहा। बोल्डर तोड़ने के लिए लोनिवि एनएच खंड को मशीन लगानी पड़ी। काफी मशक्कत के बाद सुबह करीब 10 बजे मार्ग को यातायात के लिए खोला गया। हालांकि पुलिस ने मार्ग अवरुद्ध होने की सूचना मिलने पर यातायात को अन्य मार्गों पर डायवर्ट कर दिया था। 

शनिवार रात करीब साढ़े 12 बजे तोताघाटी और सकनीधार के मध्य भारीभरकम चट्टान टूटकर सड़क पर आ गिरी। इससे करीब 50 मीटर हिस्से में भारी बोल्डर व मलबा फैल गया, जिससे यहां पैदल जाने लायक भी जगह नहीं बची। मार्ग खोलने के लिए लोनिवि राष्ट्रीय राजमार्ग खंड श्रीनगर ने तड़के ही दोनों ओर मशीन लगा दी। बड़े पत्थरों को हटाने में असफल होने पर पत्थर तोड़ने वाली मशीन बुलाई गई, जिसके बाद सुबह 10 बजे बाद मार्ग से मलबा हटाया जा सका।

हाईवे बंद होने के कारण तड़के चलने वाले सब्जी, अखबार, दूध, ब्रेड जैसे रोजमर्रा की वस्तुएं लेकर चलने वाले वाहन अपने गंतव्य तक समय तक नहीं पहुंच पाए। ऋषिकेश, श्रीनगर व पौड़ी से सुबह चलने वाली नियमित बस सेवा भी इससे प्रभावित हुई।

थाना प्रभारी विनोद राणा ने बताया कि रात को राजमार्ग बंद होने की सूचना पर वाहनों को रोकने के लिए कहा गया था। साथ ही ऋषिकेश जाने वाले वाहन गजा-चंबा के रास्ते भेजे गए। इधर, लोनिवि के अधिशासी अभियंता मनोज बिष्ट के अनुसार जहां बोल्डर गिरे थे वहां काम नहीं चल रहा है, लेकिन मार्ग बंद होने पर तत्काल काम शुरू करा दिया गया।

केदारनाथ में साढ़े नौ फीट से अधिक बर्फ मौजूद

अगर, मौसम ने साथ दिया तो केदारनाथ में जमी बर्फ एक माह में पिघल सकेगी। ऐसा न हुआ तो अगामी यात्रा तैयारियों में प्रशासन, विभाग और कार्यदायी  संस्थाओं को खासी मुश्किलें हो सकती हैं।

धाम में साढ़े नौ फीट बर्फ मौजूद है। रविवार को यहां दिनभर मौसम सुहावना रहा और धूप खिली रही। इस दौरान अधिकतम तापमान 13 डिग्री और न्यूनतम माइनस 9.9 डिग्री सेल्सियश दर्ज किया गया। 

बीते 21 जनवरी के बाद से 15 फरवरी की रात तक केदारनाथ में 6 बार तेज बर्फबारी हो चुकी है। वर्तमान में यहां मंदिर परिसर से लेकर पूरे क्षेत्र में साढ़े नौ से 11 फीट तक बर्फ जमा है। केदारनाथ से गौरीकुंड के बीच भी पैदल मार्ग पर रामबाड़ा तक 5 से 7 फीट बर्फ है, जिस पर आवाजाही करना भी मुश्किल है। पूरे मार्ग पर ग्लेशियर जोन सक्रिय है। लिनचोली से रुद्रा प्वाइंट तक 6 स्थानों पर 50 फीट से अधिक लंबाई और 30 फीट से अधिक चौड़ाई के ग्लेशियर पसरे हुए हैं।

केदारनाथ में मौजूद कार्यदायी संस्था वुड स्टोन के टीम प्रभारी कैप्टन सोबन सिंह बिष्ट ने बताया कि जिस तरह के हालात अभी हैं, उनसे पार पाना आसान नहीं है। सभी कार्य स्थल बर्फ से ढके हुए हैं।

अगर, मौसम साफ रहा तो एक माह में बर्फ पिघल सकती है। साथ ही मजदूरों की संख्या बढ़ाकर बर्फ को साफ करने में 25 दिन से अधिक लग सकते हैं। उन्होंने बताया कि बीते 28 दिन से धाम में बाहरी पुनर्निर्माण कार्य ठप है। जबकि बिजली के अभाव में तीर्थ पुरोहितों के आवासीय भवनों के अंदर फिनिशिंग का कार्य प्रभावित हो रहा है।

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