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इस डर से बदरीनाथ धाम में नहीं बजता शंख

Thu, 08 May 2014 08:28 AM IST
प्रमोद सेमवाल/ अमर उजाला, गोपेश्वर
प्रमोद सेमवाल/ अमर उजाला, गोपेश्वर Updated Thu, 08 May 2014 08:28 AM IST
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शंख ध्वनि पूजा का अनिवार्य अंग है। लेकिन चारो धामों में सर्वश्रेष्ठ कहे जाने वाले बदरीनाथ में शंख नहीं बजाया जाता।

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यह तब है जब भगवान विष्णु को शंख सबसे प्रिय है। मान्यताओं के अनुसार वह सदैव शंख धारण करते हैं।

धुनिक पारिस्थितिकी विद्वान मानते हैं कि पौराणिक मान्यताओं की चाशनी में लपेटकर तत्कालीन मनीषियों ने क्षेत्र की पारिस्थितिकी संवेदनशीलता को देखते हुए शंखध्वनि वर्जित की होगी।

शंख न बजाने के पीछे वैज्ञानिक वजह

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वैज्ञानिक रूप से यह सिद्ध हो चुका है कि विशेष आवृत्ति वाली ध्वनियां पर्यावरण, पारिस्थितिकी को भारी नुकसान पहुंचा सकती हैं। ऐसे में हमारे पूर्वजों की मेधा पर अचरज होता है।

कुमाऊं विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और सेंट्रल एडवाइजरी बोर्ड आफ आर्कियोलाजी के सदस्य रहे प्रो. एमपी जोशी भी शंख न बजाने के पीछे वैज्ञानिक वजह देखते हैं।

उनके अनुसार बदरीनाथ धाम अधिकांश समय बर्फ से ढका रहता है। शंख ध्वनि पहाड़ों से टकरा कर ईको (प्रतिध्वनि) पैदा करती है। इससे बर्फ में क्रैक्स पड़ने या बर्फीले तूफान की आशंका प्रबल हो सकती थी।

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माइक्रो एलीमेंट्स को हो सकता है नुकसान

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इसके अलावा भू-क्षरण का भी खतरा हो सकता था। लिहाजा, धाम में शंख बजाया जाना प्रतिबंधित किया गया होगा।

पीजी कालेज गोपेश्वर (चमोली) के डॉ. डीसी नैनवाल यही बात कहते हैं।

उनके मुताबिक पहाड़ का पारिस्थितिकी और पर्यावरणीय तंत्र बेशक संवेदनशील है। प्राचीन शंख भारी और उच्च ध्वनि वाले होते थे। जिससे इस क्षेत्र में माइक्रो एलीमेंट्स को आवाज से नुकसान हो सकता था।

लिहाजा, इनका उपयोग बंद किया गया होगा।

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कुछ पौराणिक प्रसंग भी प्रतिबंध से जुड़े

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देवी भागवत में वर्णन आता है कि मां लक्ष्मी जब तुलसी के रुप में बदरीनाथ धाम में तपस्यारत थी तो उसी दौरान भगवान विष्णु ने शंखचूड़ राक्षस का वध किया था।

तो मां लक्ष्मी को शंखचूड़ राक्षस का स्मरण न हो इसी कारण यहां शंख नहीं बजता है।

जब केदार क्षेत्र में महर्षि अगस्त्य दैत्यों का संहार कर रहे थे जिनमें से आतापी और बातापी दैत्य भाग गए थे।

इनमें से आतापी नामक राक्षस मंदाकिनी नदी में और बातापी नाम का राक्षस बदरीनाथ धाम में शंख के अंदर छिप गया था। यह मान्यता है कि शंख बजाने से वह बाहर आ जाएगा।

भगवान विष्णु के आशीर्वाद देने वाले हाथ में शंख विराजमान है। बदरीनाथ धाम में शंख नहीं बजता है। इसके पीछे धार्मिक मान्यताएं हैं। धाम में कई धार्मिक रहस्य आज भी कायम हैं, संभव है कि शंख ध्वनि न करने के पीछे भी कोई रहस्य हो।
- भुवन चंद्र उनियाल, धर्माधिकारी, बदरीनाथ धाम

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