फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Chamoli News ›   Badrinath Dham Mangsir month puja is still performed today religious practices

बदरीनाथ: मंगसीर माह की इस पूजा का आज भी होता है निर्वहन, चाहे हो बर्फबारी...परंपरा हर हाल में है निभाई जाती

Fri, 03 Oct 2025 12:03 PM IST
रेनू सकलानी प्रमोद सेमवाल, गोपेश्वर ( चमोली)
प्रमोद सेमवाल, गोपेश्वर ( चमोली) Published by: रेनू सकलानी Updated Fri, 03 Oct 2025 12:03 PM IST
सार

बदरीनाथ धाम में मंगसीर (नवंबर) माह की एक पूजा की धार्मिक परंपरा है। अत्यधिक बर्फबारी होने पर भी यह परंपरा निभाई जाती है। आइए आपको बताते हैं क्या है ये परंपरा...

विज्ञापन
Badrinath Dham Mangsir month puja is still performed today religious practices
बदरीनाथ धाम - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

बदरीनाथ मंदिर के कपाट बंद होने के बाद विभिन्न धार्मिक परंपराओं का निर्वहन होता है। इन परंपराओं में एक है बदरीनाथ की मंगसीर (नवंबर) माह की पूजा। बदरीनाथ मंदिर में मंगसीर माह की पूजा संपन्न होने के बाद चारों ओर से धाम के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। अत्यधिक बर्फबारी होने के बाद भी मंगसीर माह की पूजा की परंपरा संपन्न की जाती है।

विज्ञापन


इस वर्ष मंगसीर माह की संक्रांति 16 नवंबर को है जिस कारण मंदिर के कपाट बंद होने की तिथि भी इसके बाद की तय की गई है। बदरीनाथ मंदिर के कपाट खुलने की तिथि वसंत पंचमी को और बंद होने की तिथि विजयदशमी को तय की जाती है।
विज्ञापन


बदरीनाथ मंदिर में पूजा अर्चना छह माह तक की जाती है लेकिन बदरीनाथ के दस्तूर में यह उल्लेख है कि बदरीनाथ भगवान की एक पूजा मंगसीर माह में होने तक मंदिर के कपाट खुले रखे जाते हैं। बदरीनाथ के पूर्व धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल ने बताया कि धाम में मंगसीर (नवंबर) माह की एक पूजा की धार्मिक परंपरा है। अत्यधिक बर्फबारी होने पर भी यह परंपरा निभाई जाती है। मंगसीर माह की पूजा संपन्न होने के बाद मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। यह परंपरा प्राचीनकाल से चली आ रही है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

कॉकरोच को भी लगता है भोग

मंदिर में भगवान बदरीनाथ को भोग लगने के साथ ही तप्तकुंड के पास गरुड़ शिला के नीचे काॅकरोच को भी भोग लगाया जाता है। इसके अलावा गाय और पक्षियों को भी भोग अर्पित किया जाता है। यह माना जाता है कि नारायण को भोग लगाने से पहले संसार में हर जीव की तृप्ति होनी चाहिए।



ये भी पढ़ें...Haridwar: गंगनहर हुई बंद...कम हुआ जल; रात की चांदनी में मां गंगा की गोद में होने लगी 'धन' की खोज

पूर्व धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल बताते हैं कि जब बदरीनाथ मंदिर का निर्माण नहीं हुआ था तब बदरीनाथ भगवान की पूजा तप्तकुंड के समीप गरुड़ शिला स्थित है। शंकराचार्य ने बदरीनाथ की पद्मासन शिला को तप्तकुंड से उठाकर इस शिला के नीचे रख दिया था जहां कॉकरोच रहते थे। मंदिर की स्थापना होने के बाद से ही कॉकरोच को भी प्रतिदिन भोग लगाया जाता है। इस भोग प्रक्रिया का मंदिर के दस्तूर में भी उल्लेख है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed