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बदरीनाथ धाम : कपाट खुलने की इस दिन होगी तिथि घोषित, राजदरबार में खास तैयारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 20 Jan 2018 07:27 PM IST
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बदरीनाथ
- फोटो : file photo
बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की धार्मिक प्रक्रियाएं शुरू हो गई हैं। शनिवार को पांडुकेश्वर गांव में स्थित योग ध्यान बदरी मंदिर और जोशीमठ नृसिंह मंदिर में पूजा के बाद गाड़ू घड़ा यात्रा टिहरी राजा के राजदरबार नरेंद्रनगर के लिए रवाना हुई।
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दोपहर बाद गाडू घड़ा यात्रा रात्रि प्रवास के लिए डिम्मर गांव पहुंची। 22 जनवरी को वसंत पंचमी के दिन नरेंद्रनगर राजदरबार में बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि घोषित की जाएगी।
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19 जनवरी को डिमरी धार्मिक पंचायत के प्रतिनिधि ज्योतिष डिमरी, मनोज डिमरी और अरविंद डिमरी गाडू घड़ा लेकर पांडुकेश्वर पहुंचे। शनिवार को योग ध्यान बदरी मंदिर में बदरीनाथ के रावल (मुख्य पुजारी) ईश्वर प्रसाद नंबूदरी ने भोग पूजा की।
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यह है परंपरा, राजदरबार में होती है खास...
badrinath
- फोटो : amar ujala
सुबह ग्यारह बजे गाडू घड़ा यात्रा ने जोशीमठ के लिए प्रस्थान किया। दोपहर बारह बजे जोशीमठ पहुंचने पर लोगों ने यात्रा का फूल-मालाओं से स्वागत किया। यहां जोशीमठ नृसिंह मंदिर में गाडू घड़ा की पूजा की गई। इसके बाद गाड़ू घड़ा यात्रा नरेंद्रनगर के लिए रवाना हो गई।
रात्रि प्रवास के लिए अपराह्न तीन बजे यात्रा डिम्मर गांव पहुंची। बदरीनाथ के धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल ने बताया कि वसंत पंचमी के दिन टिहरी राजा, महारानी और बदरीनाथ के रावल की मौजूदगी में राज पुरोहित बदरीनाथ धाम के कपाट खोलने की तिथि घोषित करेंगे। इस मौके पर किशोर पंवार, राजेश मेहता और अरविंद शर्मा आदि मौजूद थे।
टिहरी नरेश के दरबार में महारानी की देखरेख में सुहागिन महिलाएं तिलों के तेल से गाडू कलश को भरती हैं। इस तेल को छह माह तीर्थयात्रा के दौरान बदरीनाथ गर्भगृह में महाभिषेक और नित्य पूजा के उपयोग में लाया जाता है।
रात्रि प्रवास के लिए अपराह्न तीन बजे यात्रा डिम्मर गांव पहुंची। बदरीनाथ के धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल ने बताया कि वसंत पंचमी के दिन टिहरी राजा, महारानी और बदरीनाथ के रावल की मौजूदगी में राज पुरोहित बदरीनाथ धाम के कपाट खोलने की तिथि घोषित करेंगे। इस मौके पर किशोर पंवार, राजेश मेहता और अरविंद शर्मा आदि मौजूद थे।
टिहरी नरेश के दरबार में महारानी की देखरेख में सुहागिन महिलाएं तिलों के तेल से गाडू कलश को भरती हैं। इस तेल को छह माह तीर्थयात्रा के दौरान बदरीनाथ गर्भगृह में महाभिषेक और नित्य पूजा के उपयोग में लाया जाता है।