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कुछ की ‘होशियारी’, पूरे पीसीएस कैडर पर भारी

Tue, 06 Dec 2016 10:47 AM IST
संजय त्रिपाठी/ अमर उजाला, देहरादून
संजय त्रिपाठी/ अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 06 Dec 2016 10:47 AM IST
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back date promotion create problem for PCS cadre
तबादला - फोटो : demo pics

30 पीसीएस अफसरों द्वारा तथ्यों को छुपाकर, शिथिलीकरण का गलत तरीके से लाभ लेकर और बैकडेट से प्रमोशन का आदेश जारी करवाना प्रदेश के पूरे पीसीएस कैडर पर भारी पड़ गया है।

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इस अनियमिततापूर्ण आदेश ने इन अफसरों का प्रमोशन तो रोक ही दिया है, इनकी वजह से अन्य बैच के अफसर भी तकनीकी पेंच के चलते प्रमोट नहीं हो पाएंगे। इसे लेकर पीसीएस अफसरों के बीच अंदरखाने में ही द्वंद्व मच गया है। बीते अगस्त माह में तीस पीसीएस अफसरों को तीन वर्ष बैकडेट से प्रमोशन का लाभ देने के आदेश जारी किए गए थे।
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कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद बढ़े वेतनमान से सैलरी देने समेत अन्य तैयारियां आरंभ भी हो गई थीं। अमर उजाला को इस प्रमोशन में हेरफेर की जानकारी मिली, जिस पर प्रमुखता से इस घपले की खबर प्रकाशित की गई। इसका असर यह हुआ कि अगले ही दिन तत्कालीन मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह ने इस आदेश के परीक्षण के निर्देश जारी कर दिए।
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इसके बाद करीब तीन महीने तक इस आदेश का परीक्षण हुआ। पद छोड़ने के पहले शत्रुघ्न सिंह ने दोबारा इस बाबत बैठक बुलाई तो मालूम चला कि न केवल बैकडेट से प्रमोशन दिया गया, बल्कि सूची में शामिल आधे से ज्यादा अफसरों को शिथिलीकरण का लाभ भी गलत तरीके से दिया गया। नियमानुसार अधिकतम पांच वर्ष की सेवा को शिथिल किया जाना था, मगर तहसीलदार से प्रमोट होकर आए लगभग सभी अफसरों को पांच साल से अधिक का लाभ दिया गया।

गौरतलब है कि वर्ष 2004 में तमाम डिप्टी कलेक्टरों को उत्तर प्रदेश कैडर में भेजा गया था। इनके जाने से खाली हुए पदों पर तहसीलदारों को बिना उचित कार्रवाई के प्रोन्नत करके डिप्टी कलेक्टर बना दिया गया।

बाद में वर्ष 2006 में प्रोन्नति की औपचारिकताएं पूरी की गईं। ऐसी स्थिति में किसी के भी सेवा के बारह वर्ष पूरे नहीं हुए थे। नतीजा इनकी पांच साल से अधिक वर्षों की सेवा को शिथिल करके प्रमोशन की सूची में शामिल कर दिया गया। कुल मिलाकर अब यह प्रमोशन का आदेश रद्द होने की कगार में है। 

कार्मिक विभाग की मानें तो अब 1 जनवरी 2017 को भी इन अफसरों को प्रमोशन नहीं दिया जा सकता है, क्योंकि सेवा में सीधे आए अधिकारी और तहसीलदार से प्रमोट होकर अफसर बने लोगों के बीच ज्येष्ठता का विवाद है। यह विवाद सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।

वहां से यथास्थिति बनाए रखने के आदेश हैं। ऐसे में यदि सीधे सेवा में आने वाले अधिकारियों को प्रमोशन दे दिया जाता है तो सुप्रीम कोर्ट की अवमानना का मामला बनता है। वहीं यदि ये अधिकारी प्रोन्नत नहीं होंगे, तो जूनियर बैच के अफसर भी अटके रहेंगे। कुल मिलाकर विवादित प्रमोशन के मामले ने अन्य अधिकारियों का प्रमोशन भी खटाई में डाल दिया है।


बैड एंट्री और विभागीय जांच के बाद भी प्रमोशन
तीस पीसीएस अफसरों को जो विवादित आदेश बीते अगस्त-16 में हुआ था, उसमें सभी अफसरों को वर्ष 2013 से प्रमोशन का लाभ देने की बात कही गई थी। कार्मिक विभाग के सूत्रों की मानें तो प्रमोशन सूची में शामिल कुछ अधिकारियों के विरुद्ध वर्ष-2013 में जांच-पड़ताल और बैड एंट्री के मामले थे। ऐसे में इनका प्रमोशन किया जाना संभव ही नहीं। इस तरह प्रमोशन आदेश में एक और विवाद सामने आया।

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