बाबा हरदेव के जाने की खबर से आंसुओं में डूबे दून के अनुयायी
- जून में बाबा के मसूरी आने को लेकर जोर-शोर से चल रही थीं तैयारियां
- वर्ष 1980 से हर साल पहाड़ों की रानी मसूरी में बिताते थे जून का महीना
- आपदा में सबसे पहले सहायता के लिए रवाना हुई थी बाबा हरदेव की टोली
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ओह... आपको तो मसूरी आना था बाबा, आप कहां चले गए। हमने कितनी तैयारियां की थीं, इस बार आओगे तो ये खिलाएंगे, ये कहेंगे लेकिन आपने तो मौका ही नहीं दिया। शुक्रवार को जैसे ही निरंकारी बाबा हरदेव सिंह के निधन की खबर उत्तराखंड पहुंची तो श्रद्धालुओं के मुंह से कुछ इसी तरह के शब्द निकले।
निरंकारी बाबा हरदेव सिंह जी वर्ष 1980 से हर साल जून का महीना मसूरी में बिताते थे। इसके बाद यहां से उत्तराखंड भ्रमण पर निकल जाते। अब उनके उत्तराखंड आने का समय नजदीक आ रहा था। 25 मई को कनाडा से लौटने के बाद मई अंत तक वह उत्तराखंड आने की तैयारी में थे। उनके स्वागत में यहां के श्रद्धालु जुटे हुए थे।
तैयारियां जोरों पर थीं कि अचानक बाबा के निधन की खबर पहुंच गई। श्रद्धालुओं में शोक की लहर दौड़ पड़ी और लगा कि मानों सब अधूरा रह गया हो। न तो बाबा से दिल की बात हो पाई और न ही उनकी खातिरदारी कर पाए।
केदारनाथ आपदा में बाबा ने भेजी थी पहली टोली
बाबा ने 2013 में केदारनाथ में आई आपदा के दौरान प्रभावितों की काफी मदद की थी। आपदा के समय सबसे पहले निरंकारी बाबा हरदेव सिंह की टोली ही राहत पहुंचाने गई थी। तब वह मसूरी में ही थे और वहीं से श्रद्धालुओं को दिशा-निर्देश दिए। संत निरंकारी मंडल के मसूरी जोनल इंचार्ज हरभजन सिंह से बात की और राहत टीम रवाना करने को कहा था।
मंडल की ओर से दो यूटिलिटी में दवाई, ब्रेड, पानी, नमकीन, बिस्कुट, कंबल और अन्य राहत सामग्री लेकर टीम रवाना हुई, बिना यह सोचे की आखिर कैसे वहां तक जाएंगे। टीम जखोली के रास्ते से पैदल होते हुए आगे बढ़ी। तीन दिनों का पैदल सफर करते हुए रास्ते में सभी को राहत सामग्री दी गई।
बाबा के जाने से दुख में डूबे भक्त
17 जून को बाबा के दिशा-निर्देश के अनुसार दून से टीम रवाना हुई। जब टीम वहां पहुंची तो रास्ते टूट चुके थे। जगह-जगह लोग भूख से तड़प रहे थे। रास्ते में मिले कुछ लोग बेहद घबराए हुए थे। टीम ने जो मंजर देखा इससे वह स्वयं हिल गए।
उन्होंने बिना प्रशासन का इंतजार किए खुद लोगों की मदद की। उन्हें खाना और कंबल दिया। हर साल की तरह इस बार भी मई अंत तक बाबा उत्तराखंड पहुंचने वाले थे, लेकिन कितने दुर्भाग्य की बात है कि वह इतनी जल्दी हमें छोड़कर चले गए। बाबा के स्वागत की सभी तैयारियां अधूरी रह गईं।
-भगवत प्रसाद, मीडिया प्रभारी, संत निरंकारी मंडल