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उत्तराखंड गवर्नर को फोन पर धमकी, केंद्र तलब

Fri, 22 Aug 2014 09:19 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 22 Aug 2014 09:19 AM IST
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aziz qureshi complaint center in supreme court

राज्यपालों को हटाए जाने के मोदी सरकार के कदम के खिलाफ उत्तराखंड के राज्यपाल डॉ. अजीज कुरैशी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है।

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राज्यपाल ने केंद्रीय गृह सचिव अनिल गोस्वामी के उस धमकी भरे फोन के खिलाफ सर्वोच्च अदालत में याचिका दायर की है, जिसमें उनसे कहा गया कि इस्तीफा दो वरना पद से हटा दिया जाएगा।
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याचिका में गृह सचिव पर सभी संवैधानिक मर्यादाओं को ताक पर रखकर धमकी भरा फोन करने का आरोप लगाया गया है।

चीफ जस्टिस आरएम लोढा की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार और गृह सचिव अनिल गोस्वामी को जवाब दायर करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया।

संविधान के अनुच्छेद 156 का उल्लंघन

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पीठ ने यह मामला पांच सदस्यीय संविधान पीठ के सुपुर्द कर दिया। अदालत ने कहा कि याचिका में उठाए मुद्दे संविधान के अनुच्छेद 156 में निहित राज्यपाल के कार्यकाल से जुड़े हैं। लिहाजा संविधान पीठ ही इसका निपटारा करेगी।

इससे पहले सुनवाई शुरू होते ही पीठ ने टिप्पणी की कि राज्यपाल तो राष्ट्रपति की इच्छानुरूप ही पद पर रह सकते हैं और उनकी भावनाओं से कोई तो अवगत कराएगा। क्योंकि राष्ट्रपति खुद तो फोन नहीं करेंगे।

इस पर संप्रग सरकार के दो पूर्व कानून मंत्रियों कपिल सिब्बल और सलमान खुर्शीद के अलावा दो पूर्व अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल ने दलील दी कि संविधान के अनुच्छेद 156 का पालन नहीं किया गया है और गृह सचिव की ओर से राज्यपाल को धमकी देना असंवैधानिक है।

गृह सचिव ने दो बार फोन कर दी धमकी

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सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में डॉ. कुरैशी ने कहा है कि गृह सचिव गोस्वामी ने उन्हें 30 जुलाई को फोन करके साफतौर पर कहा कि वह इस्तीफा दे दें। अगर वह इस्तीफा नहीं देंगे तो उन्हें राज्यपाल के पद से हटा दिया जाएगा।

गृह सचिव ने यह भी कहा कि ऐसा उनके बलात्कार पर दिए बयान के संदर्भ में कहा जा रहा है। डॉ. कुरैशी का कहना है कि बलात्कार की वारदात पर दिए बयान को लेकर उन्होंने दो अगस्त को अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए गृह मंत्रालय को पत्र लिख दिया था।

पांच अगस्त को गृह सचिव ने एक बार फिर फोन किया और इस्तीफा की बात दोहराई। याद रहे कि संप्रग सरकार के कार्यकाल दौरान नियुक्त राज्यपालों को हटाने की मोदी सरकार की मुहिम के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने वाले डॉ. कुरैशी पहले गवर्नर हैं।

मोदी सरकार दो राज्यपालों को बर्खास्त कर चुकी है। राजग के सत्ता में आने के बाद से अब तक चार राज्यपाल इस्तीफा दे चुके हैं।

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'मुझे धमकी देने वाले को फटकार लगाई जाय'

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राज्यपाल कुरैशी ने अपनी याचिका में कहा है कि केंद्र और गृह सचिव से पूछा जाए कि किसके कहने पर उन्हें धमकी दी गई। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि ऐसे व्यक्ति को फटकार लगाई जाए और उसकी निंदा की जाए।

याचिका में कहा गया है कि केंद्र सरकार के गृह मंत्री गृह सचिव के माध्यम से गवर्नर पर न तो शर्तें थोप सकते हैं न ही पद से हटाने की धमकी देकर इस्तीफा लेने का प्रयास कर सकते हैं। इस तरह की कार्रवाई संविधान के अनुरूप नहीं है।

गौरतलब है कि इससे पहले, राजग सरकार ने मिजोरम की राज्यपाल कमला बेनीवाल और पुडुचेरी के राज्यपाल वीरेंद्र कटारिया को बर्खास्त किया था।

बताया जाता है कि राजग के सत्ता में आने के बाद गोस्वामी ने संप्रग के कार्यकाल में नियुक्त कुछ राज्यपालों को पद से इस्तीफा देने के लिये टेलीफोन किया था। इसके बाद पश्चिम बंगाल के राज्यपाल एमके नारायणन, नगालैंड के राज्यपाल अश्विनी कुमार, उत्तर प्रदेश के राज्यपाल बनवारी लाल जोशी और छत्तीसगढ़ के राज्यपाल शेखर दत्त ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।

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