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अब अपनी भाषा में लीजिए आयुर्वेद के ग्रंथ
कौशल सिखौला / अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Tue, 28 Jul 2015 06:31 PM IST
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पतंजलि योगपीठ दुनिया के अग्रणी प्रकाशन संस्थानों के माध्यम से विभिन्न देशों की भाषा में आयुर्वेद के ग्रंथ ला रही है।
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ऐसे करीब 14 ग्रंथ अनेक भाषाओं में तैयार हो चुके हैं। इनका लोकार्पण चार अगस्त को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा एवं आयुष मंत्री श्रीपद नायक पतंजलि योगपीठ आकर करेंगे। इनके अलावा इस मौके पर उमा भारती समेत लगभग आधा दर्जन केंद्रीय मंत्रियों के मौजूद रहने की उम्मीद है। उस दिन जड़ी-बूटी दिवस मनाया जाता है।
इस योजना के तहत जापान, इटली, ब्रिटेन, जर्मन, स्पेन, स्वीडन, ईरान, पुर्तगाल, तुर्की और चीन आदि देशों के प्रकाशक पतंजलि योगपीठ की आयुर्वेदिक पुस्तकों के अनुवाद प्रकाशित कर रहे हैं। वर्ष के अंत तक हावर्ड एवं ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालयों के लिए योग पाठ्यक्रमों की पुस्तकें उपलब्ध हो जाएंगी।
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पतंजलि योगपीठ द्वारा प्रकाशित आचार्य बालकृष्ण की आयुर्वेद सिद्धांत रहस्य नामक पुस्तक के अनुवाद सर्वाधिक भाषाओं में हुए हैं। इस पुस्तक के माध्यम से दुनिया पहली बार जानेगी कि आयुर्वेद जड़ी-बूटी नहीं अपितु समूचा चिकित्सा विज्ञान है।
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जिन देशों में जड़ी-बूटियों का ज्ञान उपलब्ध है, वहां उनका प्रयोग रसोईघर के नुस्खों के रूप में किया जाता है। किसी भी देश में जड़ी-बूटियों को आयुर्वेद के माध्यम से शरीर विज्ञान से नहीं जोड़ा गया है।
आयुर्वेद संपूर्ण विज्ञान है। भारत के अलावा इस विज्ञान को कोई नहीं जाता। दुनिया के 65 देशों में जड़ी-बूटियों का ज्ञान तो है, पर दवाएं दो-चार ही हैं। जो दवाएं हैं भी, वे नुस्खों के रूप में हैं। हम पहली बार दुनिया की हर भाषा में आयुर्वेदिक ग्रंथ प्रकाशित कर रहे हैं। आज सभी बड़े देशों के जाने-माने प्रकाशक हमारे ग्रंथों के अनुवाद और प्रकाशन में जुटे हुए हैं। वास्तव में यह देश के लिए बड़ी उपलब्धि है।
- आचार्य बालकृष्ण, महामंत्री, पतंजलि योगपीठ
आचार्य बालकृष्ण के निर्देशन में आयुर्वेद की पुस्तकों के प्रकाशन का काम विश्व भर में जारी है। दुनिया भर के प्रकाशक हमारे ग्रंथ देखने और अनुवाद कराने पतंजलि आ रहे हैं। आचार्य द्वारा संपादित विश्व हर्बल इनसाइक्लोपीडिया महाकोष शीघ्र सामने आएगा। इस ग्रंथ में दुनिया की हर औषधि का विवरण मिलेगा। यह ग्रंथ आते ही आयुर्वेद और हर्बल जगत में क्रांति हो जाएगी।
- योग गुरु स्वामी रामदेव