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हरिद्वार में बनीं थी राम मंदिर निर्माण की भूमिका, आठ मार्गदर्शक मंडलों की हुई थी बैठक

Mon, 11 Nov 2019 09:58 AM IST
अलका त्यागी कौशल सिखौला, अमर उजाला, हरिद्वार
कौशल सिखौला, अमर उजाला, हरिद्वार Published by: अलका त्यागी Updated Mon, 11 Nov 2019 09:58 AM IST
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Ayodhya case verdict: Role of Ram temple construction connection to haridwar
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

अयोध्या में अब भगवान राम का मंदिर बनने की राह प्रशस्त हो गई है। लेकिन शायद कम ही लोगों को पता होगा कि इस राम मंदिर निर्माण की भूमिका हरिद्वार में बनी थी। यहां आठ मार्गदर्शक मंडलों की बैठक हुई थी। यहां तक कि छह दिसंबर, 1992 को विवादित ढांचे तक कार सेवा की तिथि भी हरिद्वार में ही तय हुई। पंतद्वीप के मैदान से इसकी बाकायदा घोषणा की गई थी।

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विश्व हिंदू परिषद की गतिविधियां धर्मनगरी में वर्ष 1983 से बढ़नी शुरू हुई थीं। तब गंगा रक्षा के लिए गंगा एकात्मता यात्रा हरकी पैड़ी से प्रारंभ हुई थी। इसके बाद हरिद्वार अयोध्या में विवादित ढांचे को लेकर विहिप की बैठकों का केंद्र बन गया। इस कार्य में तेजी 1992 की जनवरी में परमार्थ आश्रम में हुई राम जन्मभूमि न्यास की गोपनीय बैठक से आनी शुरु हुई। 
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उसी साल मई में विहिप के केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की बैठक हरिद्वार के निष्काम सेवा ट्रस्ट में हुई। इस बैठक में संतों ने दोनों हाथ उठाकर फैसला लिया कि छह दिसंबर को अयोध्या में कारसेवा की जाए।

इसके बाद भी मार्ग दर्शक मंडल की कुल पांच बैठकें हरिद्वार के अग्रसेन आश्रम और कच्छी आश्रम में हुई। इन बैठकों में मंदिर निर्माण की रूपरेखा रची गई। गंगा की इसी नगरी में देश भर में भ्रमण करते हुए मंदिर निर्माण के लिए शिलाएं इकट्ठा करने का निर्णय हुआ। इसके पश्चात देशभर से शिला पूजन कराकर मंदिर के लिए ईंटें ग्रहण करने का काम शुरु हुआ। 

हरिद्वार में दो धर्म संसद और हुईं। इन दोनों के आयोजनों में देश भर से आए शंकराचार्य, माधवाचार्य, रामानुजाचार्य, रमानंदाचार्य तथा षड़दर्शन संत उपस्थित हुए। कार सेवा में घीसापंथी संत आचार्य जगदीश मुनि का बड़ा योगदान रहा, जो आज इस दुनिया में नहीं हैं।

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