नारी निकेतन में एक और घोटाला, सीएम त्रिवेंद्र के पास पहुंची घोटाले की फाइल
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नारी निकेतन में एक और घोटाला सामने आया है। इस बार यह घोटाला पुरस्कार को लेकर किया गया है। इस मामले की फाइल सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के पास भी पहुंच गई है।
नारी निकेतन अधिकारियों पर पुरस्कार घोटाले का आरोप लगाते हुए राज्य महिला सशक्तिकरण परिषद की पूर्व उपाध्यक्ष विजय लक्ष्मी गुसाईं ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया है। उन्होंने समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों पर गलत तरीके से पुरस्कार प्राप्त करने का आरोप लगाया।
शुक्रवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को ज्ञापन देते हुए विजय लक्ष्मी गुसाईं ने कहा कि नवंबर-2015 में नारी निकेतन प्रकरण में संवासिनी के साथ रेप और जो भी अमानवीय व्यवहार हुए उसके खुलासे के लिए अधिकारियों ने खुद को सम्मानित करवा लिया।
कहा कि इन अधिकारियों ने राज्यपाल को गुमराह कर उनके कार्यालय में उपस्थित होकर खुद हीपुरस्कार ले लिया। उन्होंने कहा कि 16 नवंबर को प्रथम भ्रमण के दौरान नारी निकेतन की स्थिति बदहाल थी। 136 संवासिनियों को एक साथ रखा गया था।
अमर उजाला ने उठाया था संवासिनियों के उत्पीड़न का मुद्दा
इसमें मानसिक रूप से कमजोर और सामान्य संवासिनियां थीं। उनके खान-पान, रहन-सहन की उचित व्यवस्था नहीं थी। संवासिनियों के साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया जाना, उनसे काम करवाया जाने जैसी बाते सामने आई थी।
इसके साथ ही संवासिनी के शोषण, भ्रूण हत्या जैसे कुकृत्य को अनदेखा करने के लिए तो इन अधिकारियों को सजा दी जानी चाहिए थी, जबकि इन्हें पुरस्कृत किया जा रहा है। कहा कि मामले की सीबीआई जांच के साथ ही इन अधिकारियों को दंडित कर निलंबित किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि समाज कल्याण विभाग के निदेशक बीएस धनिक को मामले में दोषी होने के बावजूद सेवा विस्तार दे दिया गया। कहा कि इस प्रकरण की पुन: जांच करते हुए जो संवासिनियां वहां थीं उनसे पूछताछ की जानी चाहिए।
उन्होंने सवाल किया कि आज तक सचिवालय के कितने उत्कृष्ट अधिकारियों को राज्यपाल पुरस्कार मिला है। जबकि इन अधिकारियों को किस आधार पर बिना समारोह के गुप्त रूप से अकेले पांच लोगों के बीच सम्मानित कर दिया गया। ज्ञापन देने वालों में नीलम सहगल और विमल चंद भी शामिल थे।