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उत्तराखंड: पिथौरागढ़ और उत्तरकाशी में आया बर्फीला तूफान, चपेट में आकर एक की मौत और एक लापता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गढ़वाल/कुमाऊं
Updated Wed, 09 May 2018 09:08 AM IST
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snowfall avalanche
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उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में उच्च हिमालयी क्षेत्र बर्फीले तूफान की चपेट में आने से एक ग्रामीण की मौत हो गई और उत्तरकाशी के गंगोत्री में बर्फीले तूफान की चपेट में आकर पोर्टर लापता हो गया।
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उच्च हिमालयी क्षेत्र में बर्फीले तूफान की चपेट में आकर जहां एक ग्रामीण की मौत हो गई। वहीं, नेपाल के बझांग जिले में मलबे की चपेट में आने से जूनियर इंजीनियर की जान चली गई। उच्च हिमालयी क्षेत्र में पिछले तीन दिन से लगातार हो रही बर्फबारी के चलते गुंजी से लिपूपास तक (27 किमी.) कैलाश मानसरोवर मार्ग बर्फ से पट गया है। इससे जवानों को पेट्रोलिंग में दिक्कत हो रही है। मौसम विभाग की मंगलवार को तूफान और ओलावृष्टि की चेतावनी से पूरा प्रशासनिक अमला अलर्ट रहा।
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तहसील बंगापानी के माइग्रेशन गांव गोल्फा निवासी आनंद सिंह (40) पुत्र चंदन सिंह 2 मई को पत्नी जमंती देवी और अन्य ग्रामीणों के साथ उच्च हिमालयी क्षेत्र की वन पंचायत जिब्बा में कीड़ा जड़ी दोहन के लिए गया था। 6 मई (रविवार) की शाम जिब्बा ग्लेशियर में बर्फीला तूफान आ गया। इसकी चपेट में आकर आनंद की तबीयत बिगड़ गई। ग्रामीण उसे जिब्बा वन पंचायत लेकर पहुंचे। मौसम खराब होने की वजह से उन्हें रात भर जिब्बा में ही रुकना पड़ा। सोमवार सुबह ग्रामीण लकड़ी के स्ट्रेचर में उसे लेकर गोल्फा रवाना हुए, लेकिन उन्हें गोल्फा पहुंचते-पहुंचते शाम हो गई। इस बीच आनंद की तबीयत और बिगड़ गई। मंगलवार सुबह ग्रामीण उसे लेकर बगीचा बगड़ मार्ग पहुंचे और जिला अस्पताल ले जा रहे थे कि उसकी रास्ते में ही मौत हो गई।
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इंजीनियर मलबे के साथ सौ मीटर खाई में गिर गए
डेमो
- फोटो : डेंमो
नेपाल के बझांग जिला प्रहरी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, जेभी कंस्ट्रक्शन कंपनी में कार्यरत जूनियर इंजीनियर नारायण दहाल चैनपुर तकलाकोट सड़क निर्माण के पास बने कैंप में आराम कर रहे थे। तभी बारिश के साथ पहाड़ी से आया मलबा कैंप पर गिर गया। इससे इंजीनियर मलबे के साथ सौ मीटर खाई में गिर गए। रेस्क्यू कर उन्हें ऊपर लाया गया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो गई थी। मुख्य इंजीनियर दुर्गा प्रसाद ने बताया सड़क का काम फिलहाल रोक दिया गया है।
धारचूला से मिली जानकारी के मुताबिक तवाघाट में आरएफसी के गोदाम पर निर्माणाधीन तवाघाट-ठाणिधार मार्ग का मलबा गिरने से 30 क्विंटल से अधिक राशन बर्बाद हो गया है। उधर, मौसम विभाग की मंगलवार को तूफान और ओलावृष्टि की चेतावनी के मद्देनजर प्रशासन ने सुबह पूर्णागिरि यात्रा पर रोक लगा दी थी, लेकिन बाद में यात्रियों को सजगता से यात्रा करने के निर्देश देकर इसे हटा दिया गया। मेला मजिस्ट्रेट/एसडीएम अनिल चन्याल ने बताया कि मां पूर्णागिरि धाम की यात्रा जा रहे यात्रियों को मौसम के प्रति सजग किया जा रहा है। इस बीच, चंपावत जिले में सभी स्कूल, कॉलेज रोज की तरह खुले रहे। दोपहर में कुछ देर के लिए तेज हवा चली और बूंदाबांदी हुई।
बागेश्वर में मंगलवार सुबह 5:55 बजे हवा चलने के साथ ही बारिश शुरू हो गई, जो दोपहर बाद तक जारी रही। इधर हल्द्वानी में सुबह लगभग 11 बजे और शाम को लगभग 4.30 बजे हल्की बूंदाबांदी हुई। मंगलवार को यहां का अधिकतम तापमान 33.5 और न्यूनतम तापमान 21.7 डिग्री सेल्सियस रहा।
धारचूला से मिली जानकारी के मुताबिक तवाघाट में आरएफसी के गोदाम पर निर्माणाधीन तवाघाट-ठाणिधार मार्ग का मलबा गिरने से 30 क्विंटल से अधिक राशन बर्बाद हो गया है। उधर, मौसम विभाग की मंगलवार को तूफान और ओलावृष्टि की चेतावनी के मद्देनजर प्रशासन ने सुबह पूर्णागिरि यात्रा पर रोक लगा दी थी, लेकिन बाद में यात्रियों को सजगता से यात्रा करने के निर्देश देकर इसे हटा दिया गया। मेला मजिस्ट्रेट/एसडीएम अनिल चन्याल ने बताया कि मां पूर्णागिरि धाम की यात्रा जा रहे यात्रियों को मौसम के प्रति सजग किया जा रहा है। इस बीच, चंपावत जिले में सभी स्कूल, कॉलेज रोज की तरह खुले रहे। दोपहर में कुछ देर के लिए तेज हवा चली और बूंदाबांदी हुई।
बागेश्वर में मंगलवार सुबह 5:55 बजे हवा चलने के साथ ही बारिश शुरू हो गई, जो दोपहर बाद तक जारी रही। इधर हल्द्वानी में सुबह लगभग 11 बजे और शाम को लगभग 4.30 बजे हल्की बूंदाबांदी हुई। मंगलवार को यहां का अधिकतम तापमान 33.5 और न्यूनतम तापमान 21.7 डिग्री सेल्सियस रहा।
केदार ताल ट्रैकिंग के दौरान एवलांच आने से दबा एक पोर्टर
avalanche
- फोटो : FILE PHOTO
उत्तरकाशी में गंगोत्री से केदार ताल की ट्रैकिंग पर गया एक 41 सदस्यीय पर्यटक दल भारी बर्फबारी के कारण भुज खर्क के पास फंस गया। मंगलवार को वापसी के वक्त इस दल में शामिल एक पोर्टर के एवलांच की चपेट में आने से दबने की सूचना है। दल में शामिल अन्य लोग सुरक्षित बताए जा रहे हैं। सूचना मिलते ही वन विभाग, एसडीआरएफ और प्रशासन की खोज एवं बचाव टीम मौके के लिए रवाना हो गई है।
गंगोत्री नेशनल पार्क के रेंजर प्रताप पंवार ने बताया कि रविवार को इंडिया हाइक्स का एक 25 सदस्यीय पर्यटक दल गंगोत्री से केदार ताल की ट्रैकिंग पर निकला था। इनके साथ 12 पोर्टर, चार गाइड और कुक भी हैं। इस दल ने गंगोत्री से आठ किमी आगे भुज खर्क में कैंप किया था। सोमवार से क्षेत्र में भारी बर्फबारी के कारण यह दल आगे नहीं बढ़ पाया। मंगलवार को लौटते समय रास्ते में एवलांच आने पर दल में शामिल पोर्टर नेपाल निवासी आकाश (32) बर्फ के नीचे दब गया।
मदद के लिए गंगोत्री से पहुंचे दल में शामिल पोटर्स ने इसकी सूचना प्रशासन को दी। यात्रा मजिस्ट्रेट चक्रधर सेमवाल ने बताया कि पर्यटकों के फंसे होने की सूचना मिलते ही वन विभाग एवं एसडीआरएफ की टीम खोज और बचाव कार्य के लिए घटनास्थल की ओर रवाना कर दी गई है। दल में शामिल छह पर्यटकों के लौटने पर आठ और पोर्टर मौके के लिए रवाना हुए हैं। गंगोत्री लौटे पोटर्स के अनुसार, दल में शामिल शेष सभी लोग सुरक्षित हैं। इन्हें जल्द ही सुरक्षित गंगोत्री लाया जाएगा।
बता दें कि समुद्र सतह से 4750 मीटर ऊंचाई पर स्थित केदार ताल थलय सागर आदि हिमशिखरों का बेस है। गंगोत्री से केदारताल पहुंचने के लिए 17 किमी की दुर्गम दूरी तय करनी पड़ती है। केदारताल तक पहुंचने के लिए रास्ते में भुज खर्क और केदार खर्क में कैंप करना पड़ता है। हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक केदार ताल की ट्रैकिंग पर पहुंचते हैं। बीते एक पखवाड़े में ही 47 पर्यटक केदार ताल की यात्रा कर चुके हैं।
गंगोत्री नेशनल पार्क के रेंजर प्रताप पंवार ने बताया कि रविवार को इंडिया हाइक्स का एक 25 सदस्यीय पर्यटक दल गंगोत्री से केदार ताल की ट्रैकिंग पर निकला था। इनके साथ 12 पोर्टर, चार गाइड और कुक भी हैं। इस दल ने गंगोत्री से आठ किमी आगे भुज खर्क में कैंप किया था। सोमवार से क्षेत्र में भारी बर्फबारी के कारण यह दल आगे नहीं बढ़ पाया। मंगलवार को लौटते समय रास्ते में एवलांच आने पर दल में शामिल पोर्टर नेपाल निवासी आकाश (32) बर्फ के नीचे दब गया।
मदद के लिए गंगोत्री से पहुंचे दल में शामिल पोटर्स ने इसकी सूचना प्रशासन को दी। यात्रा मजिस्ट्रेट चक्रधर सेमवाल ने बताया कि पर्यटकों के फंसे होने की सूचना मिलते ही वन विभाग एवं एसडीआरएफ की टीम खोज और बचाव कार्य के लिए घटनास्थल की ओर रवाना कर दी गई है। दल में शामिल छह पर्यटकों के लौटने पर आठ और पोर्टर मौके के लिए रवाना हुए हैं। गंगोत्री लौटे पोटर्स के अनुसार, दल में शामिल शेष सभी लोग सुरक्षित हैं। इन्हें जल्द ही सुरक्षित गंगोत्री लाया जाएगा।
बता दें कि समुद्र सतह से 4750 मीटर ऊंचाई पर स्थित केदार ताल थलय सागर आदि हिमशिखरों का बेस है। गंगोत्री से केदारताल पहुंचने के लिए 17 किमी की दुर्गम दूरी तय करनी पड़ती है। केदारताल तक पहुंचने के लिए रास्ते में भुज खर्क और केदार खर्क में कैंप करना पड़ता है। हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक केदार ताल की ट्रैकिंग पर पहुंचते हैं। बीते एक पखवाड़े में ही 47 पर्यटक केदार ताल की यात्रा कर चुके हैं।