अस्त हुआ राजनीति का 'अटल'युग, नहीं रहे उत्तराखंड को बनाने वाले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
'भारत रत्न' से सम्मानित पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का गुरुवार शाम को 5:05 बजे दिल्ली स्थित एम्स में निधन हो गया है। इनके निधन के साथ ही राजनीति का 'अटल'युग अस्त हो गया। वह 93 वर्ष के थे। पिछले नौ सप्ताह से वह एम्स में भर्ती थे। बुधवार को उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया था।
उत्तराखंड को अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में लाने में स्व. अटल बिहारी वाजपेयी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनके इस योगदान को कोई भी उत्तराखंडी भुला नहीं सकता। बुधवार को जैसे ही उनके गंभीर होने की खबर आई। लोग दुआएं करने लगे। कई जगह हवन और पूजन भी किया गया । बता दें कि तत्कालीन वाजपेयी सरकार ने नवोदित पहाड़ी राज्य उत्तराखंड को विशेष राज्य का दर्जा दिया था।
वाजपेयी सरकार में ही उत्तराखंड देश का 27वां राज्य बना। इसके साथ ही उन्होंने राज्य को औद्योगिक पैकेज की सौगात भी दी थी। उत्तराखंड पर्वतीय राज्य होने की वजह से वर्ष 2003 में राज्य को विशेष औद्योगिक पैकेज का लाभ दिया। इस पैकेज की बदौलत ही राज्य में तेजी से नए उद्योग स्थापित हुए और 30 हजार करोड़ का पूंजी निवेश हुआ है। जिससे लाखों लोगों को औद्योगिक इकाइयों में रोजगार मिला।
पैकेज से बना औद्योगिक विकास का वातावरण
मार्च 2002 में पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी ने नैनीताल दौरे पर उत्तराखंड राज्य को विशेष औद्योगिक पैकेज देने की घोषणा की थी। इसके बाद वर्ष 2003 से उत्तराखंड में विशेष पैकेज को लागू किया गया। राज्य गठन से पहले उत्तराखंड में कुल 14203 बड़े व छोटे उद्योग स्थापित थे। जिसमें लगभग नौ हजार करोड़ का पूंजी निवेश था। उत्तराखंड को अलग राज्य का दर्जा देने के साथ ही अटल जी ने पर्वतीय राज्य में औद्योगिक विकास को बढ़ावा दिया।
उत्तराखंड को 10 साल के लिए दिए गए औद्योगिक पैकेज में निवेश करने पर उद्यमियों को एक्साइज ड्यूटी में शत प्रतिशत छूट के साथ पांच साल तक आयकर में छूट आदि तमाम सुविधाएं दी गईं। जिस कारण उद्योगपति करोड़ों का निवेश करने के लिए आगे आए। राज्य के अस्तित्व में आने से पहले जहां सिर्फ एक ही बड़ा उद्योग स्थापित था। वहीं इस पैकेज के बाद बड़े उद्योगों में करोड़ों का पूंजी निवेश किया गया। वर्ष 2003 के बाद राज्य में तेजी से औद्योगिक निवेश बढ़ा। इस पैकेज के चलते उत्तराखंड में 30 हजार करोड़ का पूंजी निवेश हुआ है। जिसमें तीन लाख से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला है।
इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के अध्यक्ष पंकज गुप्ता का कहना है कि उत्तराखंड राज्य को विशेष औद्योगिक पैकेज नहीं मिलता तो शायद ही यहां पर इतने उद्योग स्थापित होते। पैकेज में उद्यमियों को छूट मिलने के बाद राज्य में तेजी से औद्योगिक विकास हुआ है। इस पैकेज की देन रही कि उत्तराखंड में 30 हजार करोड़ का निवेश होने के साथ ही लाखों लोगों को रोजगार मिला। वर्ष 2004 में उत्तराखंड प्रवास पर आए वाजपेयी जी से इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात कर औद्योगिक पैकेज देने पर आभार जताया था। साथ ही विख्यात हस्तकला, हस्तशिल्प उद्योग के बारे में अवगत कराया कर उन्हें खुखरी व तलवार भेंट की थी। पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी के निधन से उद्योग जगत में शोक की लहर है।
अटल बिहारी भारत ही नहीं, विश्व के महान नेता थे: मुख्यमंत्री
भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि देश की जनता आज अपने प्रिय नेता को खोकर शोकाकुल है। उन्होंने कहा कि श्रद्धेय अटल बिहारी के निधन से भारतीय राजनीति के एक युग का अवसान हुआ है। वे भारत ही नहीं, बल्कि विश्व के एक महान नेता थे।
अपने शोक संदेश में मुख्यमंत्री ने कहा कि अटल जी का उत्तराखंड से विशेष लगाव रहा है। वे मसूरी, देहरादून व नैनीताल भी अक्सर आते रहते थे। उन्होंने ही उत्तराखंड राज्य के गठन को मंजूरी दी थी। अटल जी ने न केवल अलग उत्तराखंड का निर्माण करवाया, बल्कि विशेष राज्य का दर्जा देते हुए विशेष औद्योगिक पैकेज भी स्वीकृत किया। उत्तरकाशी की सुरक्षा एवं गंगोत्री आने वाले तीर्थयात्रियों व पर्यटकों की सुविधा के लिए वरुणावत पर्वत भूस्खलन के उपचार के लिए उन्होंने विशेष आर्थिक सहायता प्रदान की। उत्तराखंड से विशेष लगाव होने के नाते उत्तराखंड की जनता सदैव उनकी आभारी रहेगी।
मुख्यमंत्री ने सभी प्रदेशवासियों की ओर से भी अटल जी को श्रद्धांजलि अर्पित की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक साधारण परिवार में जन्म लेकर अटल जी न केवल प्रधानमंत्री जैसे पद तक पहुंचे, बल्कि देश की राजनीति, अर्थव्यवस्था को ऊंचे मुकाम तक ले गए। वे न केवल राजनेथा थे, बल्कि कवि, पत्रकार, प्रखर वक्ता आदि बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे। उनकी ओजस्वी वाणी सभी भारतीयों को सम्मोहित कर प्रेरित करती थी। उन्होंने कहा कि अटल जी का पूरा जीवन राष्ट्रगौरव का प्रतीक होने के साथ ही निर्धनों व वंचितों की सेवा के लिए समर्पित रहा। वे देश के पहले विदेश मंत्री थे, जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिंदी में भाषण दिया।
श्रद्धेय अटल जी ने मई 1998 में पोखरण में सफलतापूर्वक परमाणु परीक्षण कराकर दुनिया को भारत की शक्ति से अवगत कराया। पाकिस्तान ने जब धोखे से कारगिल की चोटियों को कब्जाया तो अटल जी के दृढ़ नेतृत्व में भारतीय सेना ने अद्वितीय पराक्रम का परिचय देते हुए पाकिस्तानी घुसपैठियों का पूरी तरह से सफाया कर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अटल जी के नेतृत्व ने देश की अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा दी। उनके कार्यकाल में अनेक महत्वपूर्ण आर्थिक व संरचनात्मक सुधार किए गए। स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना के माध्यम से राजमार्गों का नेटवर्क स्थापित किया गया, जबकि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से गांवों को सड़कों से जोड़ा गया। इन दोनों परियोजनाओं ने भारत के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अटल जी भारतीय राजनीति के पुरोधा थे। वे आज हमारे बीच नहीं हैं परंतु उनके विचार व आदर्श हमें सदैव प्रेरणा देते रहेंगे।
अटल नेतृत्व में भारत ने रखा 21वीं सदी में मजबूत कदम : राज्यपाल
राज्यपाल डॉ.कृष्ण कांत पाल ने पूर्व प्रधानमंत्री भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर गहरा दु:ख व्यक्त किया है। अपने शोक संदेश में राज्यपाल ने कहा कि वाजपेयी के निधन से भारत के इतिहास में एक महान युग का अंत हो गया है। उनके नेतृत्व में भारत ने अपनी नई पहचान बनाई और देश ने 21वीं शताब्दी में मजबूती से कदम आगे बढ़ाया।
राज्यपाल ने कहा कि भारतरत्न वाजपेयी ने भारत को परमाणु शक्ति संपन्न देश के रूप में स्थापित किया। भारत को बड़ी आर्थिक, वैज्ञानिक और सामरिक शक्ति के रूप में पहचान दिलाई। वे एक महान जननायक, सर्वोत्तम श्रेणी के प्रशासक, महान कवि एवं साहित्यकार और कलाप्रेमी थे। प्रतिष्ठित सार्वजनिक मंचों पर हिंदी भाषा को प्रोत्साहित करने में उनका महत्वपूर्ण योगदान था। वे प्रखर वक्ता थे जो अपने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देते थे।
कहा कि स्वर्गीय वाजपेयी ने सांसद के रूप में युवावस्था से ही अपनी विशिष्ट पहचान बनाई थी और भारत के सभी प्रधानमंत्री उनसे प्रभावित रहे। अटल जी अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में भी बेहद लोकप्रिय राजनेता थे। राज्यपाल डॉ.पाल ने कहा कि स्वर्गीय वाजपेयी सदैव भारत वर्ष के इतिहास में एक दैदीप्यमान नक्षत्र के रूप में प्रकाशमान रहेंगे। उन्होंने दिवंगत की आत्मा की शांति की प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की।