हरिद्वार में होगा अटल जी का अस्थि विसर्जन, लेकिन इस वजह से असमंजस में प्रशासन
आगामी 19 अगस्त को हरिद्वार में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का अस्थि विसर्जन होगा, लेकिन यह खबर आने के बाद से यहां का प्रशासन असमंजस में पड़ गया है।
कनखल के पंडित अखिलेश शास्त्री ने बही दिखाते हुए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के तीर्थ पुरोहित होने का दावा किया था। अब दो और पुरोहित खुद को अटल जी का पुरोहित बताते हुए आगे आ गए हैं। उनकी परंपरागत बहियों में भी अटल जी के परिवार का रिकॉर्ड दर्ज है।
शुक्रवार को हरकी पैड़ी निवासी तीर्थ पुरोहित शैलेश मोहन ने अपनी बही दिखाते हुए बताया कि अटल जी मूलरूप से आगरा के समीप स्थित बटेश्वर के रहने वाले थे। बटेश्वर एक छोटा सा तीर्थ है। यहां से अटल जी का परिवार ग्वालियर जाकर बस गया। ग्वालियर के पुरोहित अखिलेश शास्त्री हैं, जबकि बटेश्वर के पुरोहित होने के नाते अटल जी की पुरानी पीढ़ियों का रिकॉर्ड उनकी पोथी में दर्ज है। शैलेश मोहन ने बताया कि वे देश भर में फैले सभी वाजपेयी परिवारों के पुरोहित हैं। उधर, पंडित उपेंद्र भगत के अनुसार बटेश्वर गांव की पुरोहिताई उनके पास है, इसलिए वे अस्थि प्रवाह वे कराएंगे।
शासन असमंजस में है कि अस्थि विसर्जन किससे करवाया जाए
तीन पुरोहितों का पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के तीर्थ पुरोहित होने का दावा करने से प्रशासन असमंजस में है कि अस्थि विसर्जन किससे करवाया जाए। कनखल के पंडित अखिलेश शास्त्री ने सबसे पहले वाजपेयी जी के तीर्थ पुरोहित होने का दावा किया था।
इसके बाद शुक्रवार को दो और पुरोहितों ने उनके तीर्थ पुरोहित होने का दावा किया है। तीनों के दावों में उनके हिसाब से दम भी नजर आ रहा है। उनकी परंपरागत बहियों में भी अटल जी के परिवार का रिकॉर्ड दर्ज है। हालांकि अटल जी अनेक बार हरिद्वार पर उन्होंने स्वयं कभी भी अपने पुरोहित की बही में नाम दर्ज नहीं कराया।
गौरतलब है कि सभी तीर्थों पर सैकड़ों पुरोहित निवास करते हैं। ये पुरोहित देश भर के लोगों का रिकॉर्ड अपनी बही में रखते हैं। जब भी किसी की अस्थियां आती हैं तो उनके पुराने तीर्थ पुरोहित ही विसर्जन कराते हैं।
अटल जी की कई पीढ़ियों का रिकॉर्ड प्रस्तुत किया था
गत दिवस कनखल निवासी अखिलेश शास्त्री ने बहियां दिखाते हुए अटल जी की कई पीढ़ियों का रिकॉर्ड प्रस्तुत किया था। शुक्रवार को हरकी पैड़ी निवासी तीर्थ पुरोहित शैलेश मोहन ने अपनी बही दिखाते हुए बताया कि अटल जी मूलरूप से आगरा के समीप स्थित बटेश्वर के रहने वाले थे।
बटेश्वर एक छोटा सा तीर्थ है। यहां से अटल जी का परिवार ग्वालियर जाकर बस गया। ग्वालियर के पुरोहित अखिलेश शास्त्री हैं, जबकि बटेश्वर के पुरोहित होने के नाते अटल जी की पुरानी पीढ़ियों का रिकॉर्ड उनकी पोथी में दर्ज है। शैलेश मोहन ने बताया कि वे देश भर में फैले सभी वाजपेयी परिवारों के पुरोहित हैं। उधर, पंडित उपेंद्र भगत के अनुसार बटेश्वर गांव की पुरोहिताई उनके पास है, अत: अस्थि प्रवाह वे कराएंगे।
अटल जी के तीन पुरोहित सामने आ जाने पर अब असमंजस की स्थित उत्पन्न हो गई। जाहिर है प्रशासनिक अधिकारियों को तीनों पुरोहितों की बहियों का अवलोकन कर कर्मकांड कराने के लिए किसी एक पुरोहित का चयन करना पड़ेगा। अटल जी की अस्थियां रविवार को हर की पैडी पर विसर्जित की जाएंगी।