अटल आयुष्मान योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा, एक मरीज का दिन में दो बार कर दिया डायलिसिस
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उत्तराखंड में काशीपुर के एमपी मेमोरियल अस्पताल ने अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना के तहत फर्जी तरीके से क्लेम हासिल करने के लिए हदें पार कर दी। अस्पताल ने क्लेम के लिए यह तक ध्यान नहीं रखा कि उसकी बेड क्षमता कितनी है। एक मरीज को एक ही दिन में दो बार डायलिसिस भी करा दिया। जांच में एक के बाद एक कारनामे सामने आए तो अस्पताल की सूचीबद्धता निलंबित कर कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। अस्पताल प्रबंधन को जवाब देने के लिए 15 दिन का समय दिया है।
उत्तराखंड स्वास्थ्य अभिकरण के अध्यक्ष दीलीप कोटिया ने बताया कि काशीपुर का एमपी मेमोरियल अस्पताल एक बड़ा अस्पताल है। यहां प्रतिदिन आसपास ही नहीं बल्कि पड़ोसी राज्य से भी लोग इलाज कराने आते हैं। लेकिन, अटल आयुष्मान योजना में सूचीबद्ध होने के बाद इस अस्पताल ने ज्यादातर गोल्डन कार्ड धारकों का ही इलाज करना दर्शाया है। सबसे पहले अस्पताल के इसी काम को संदेह के घेरे में रखकर जांच की गई। इसमें पाया गया कि अस्पताल ने सूचीबद्ध होने के बाद 22 मरीजों का योजना की अनुमति के बिना ऑपरेशन कर दिया।
एक बेड पर दो मरीज
जांच में सामने आया है कि अस्पताल के आईसीयू की क्षमता 10 मरीजों की है। लेकिन, 42 दिन का जब रिकॉर्ड चेक किया गया तो पता चला कि अस्पताल ने क्लेम के लिए हर दिन 11 से 20 मरीजों को भर्ती होना दिखाया है। इस तरह एक बेड पर दो मरीज का इलाज। यह बात संदेहास्पद और असंभव है।
एक मरीज का दिन में दो बार डायलसिस
अस्पताल में डायलिसिस के लिए चार मशीनें हैं। इनसे हर दिन 14 मरीजों तक का डायलसिस करना दर्शाया गया है। लेकिन इसमें भी सिर्फ आयुष्मान के मरीजों का ही डायलसिस किया गया। यह पूरी तरह संदेहास्पद है। विशेषज्ञों के मुताबिक इतने संसाधनों से यह संभव नहीं है। क्लेम हड़पने के चक्कर में एक मरीज का दिन में दो बार डायलिसिस दिखा दिया गया।
बिना पंजीकरण चल रहा था अस्पताल
एमपी मेमोरियल अस्पताल के मालिकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है। जांच में पाया गया है कि अस्पताल बिना पंजीकरण के चल रहा था। ऐसे में जांच टीम ने इसे आपराधिक कृत्य माना है। लिहाजा, जल्द अस्पताल पर मुकदमा दर्ज कराने संबंधी निर्णय लिया जा सकता है।
इस अस्पताल की सबसे बड़ी खामी इसके पंजीकरण प्रमाणपत्र में दिखाई दी। अस्पताल ने सूचीबद्धता हासिल करने के लिए रजिस्ट्रेशन के कॉलम में एनए (उपलब्ध नहीं) लिखा है। इस तरह यह अस्पताल नियम विरुद्ध चल रहा है। उत्तराखंड स्वास्थ्य अभिकरण के अध्यक्ष दीलीप कोटिया ने बताया कि अस्पताल का यह गंभीर मामला है।
इतना ही नहीं, अस्पताल ने बताया था कि यहां हर वक्त पांच डॉक्टर उपलब्ध रहेंगे। लेकिन, जांच में पाया गया कि अस्पताल में कोई भी एमबीबीएस डॉक्टर 24 घंटे उपलब्ध नहीं है। जिन डॉक्टरों को सूचीबद्धता के फार्म में दर्शाया है, उनमें से किसी ने भी मरीजों का इलाज नहीं किया। इलाज करने वाले छह डॉक्टर अलग नामों के हैं। मेडिकल काउंसिल क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत यहां कम से कम एक डॉक्टर हर वक्त उपलब्ध रहना चाहिए।