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अटल आयुष्मान योजना: सरकारी अस्पतालों की शह पर आयुष्मान में रेफर का ‘खेल’
Sun, 22 Sep 2019 01:47 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Sun, 22 Sep 2019 01:47 PM IST
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अटल आयुष्मान योजना में सरकारी अस्पतालों की शह पर गोल्डन कार्ड पर इलाज कराने वाले मरीजों को रेफर करने का ‘खेल’ किया जा रहा है। जिन मरीजों का इलाज सरकारी अस्पतालों में हो सकता है, उन्हें भी निजी अस्पतालों की मोटी कमाई के लिए रेफर किया गया। सरकारी अस्पताल से मरीज को रेफर करने वाले डॉक्टरों ने निजी अस्पतालों में सेवाएं देकर मरीजों का इलाज किया। आयुष्मान योजना में गड़बड़ियों की जांच में रेफर का खेल पकड़ में आया तो सरकार ने भी इस खेल पर नकेल कसी है।
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प्रदेश सरकार की ओर से आयुष्मान योजना में प्रदेश के सभी परिवारों को पांच लाख तक मुफ्त इलाज की सुविधा दी है। लेकिन योजना में खुद ही सरकारी अस्पताल ही सांठ गांठ कर निजी अस्पतालों को फायदा पहुंचाने के लिए मरीजों को रेफर कर रहे हैं। योजना में प्रावधान है कि इमरजेंसी को छोड़कर अन्य बीमारियों के इलाज के लिए पहले मरीज को सरकारी अस्पताल में आना होगा। यदि सरकारी अस्पताल में मरीज को इलाज उपलब्ध न होने की स्थिति में उसे रेफर करने की व्यवस्था है।
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आयुष्मान योजना की गड़बड़ियों की जांच में इस बात का खुलासा हुआ है कि सरकारी अस्पताल में जो डॉक्टर संविदा पर तैनात थे। उन्होंने सरकारी अस्पताल में मरीज का इलाज न कर उन निजी अस्पतालों के लिए रेफर किया, जहां वे स्वयं सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे मरीजों का निजी अस्पताल में इलाज कर सरकार से क्लेम किया गया। जबकि नियम है कि सरकारी अस्पताल से मरीज को रेफर करने के लिए किसी निजी अस्पताल का नाम नहीं लिख सकते हैं।
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एलडी भट्ट राजकीय चिकित्सालय काशीपुर में संविदा पर तैनात आर्थोपेडिक्स विशेषज्ञ ने गोल्डन कार्ड धारक 56 मरीजों को काशीपुर के एक निजी अस्पताल में रेफर किया। जबकि आर्थोपेडिक्स विशेषज्ञ निजी अस्पताल में सेवाएं दे रहे थे। रेफर किए गए मरीजों का निजी अस्पताल में इलाज किया गया। इसके तरह प्रदेश के अन्य सरकारी अस्पतालों से मरीजों को रेफर कर निजी अस्पतालों का फायदा पहुंचाया गया।
आयुष्मान योजना में गोल्डन कार्ड धारक मरीज को पहले सरकारी अस्पताल में इलाज करना अनिवार्य है। इलाज उपलब्ध न होने से मरीज को सूचीबद्ध निजी अस्पताल में रेफर किया जाता है। लेकिन इसमें सरकारी अस्पताल रेफर मरीज का इलाज कराने के लिए किसी भी निजी अस्पताल का नाम नहीं लिख सकते हैं। ऐसे मामलों में संलिप्त संविदा डॉक्टरों की सरकारी अस्पतालों से सेवाएं समाप्त की गई हैं।
-डॉ. अभिषेक त्रिपाठी, निदेशक प्रशासन राज्य अटल आयुष्मान योजना