आयुष्मान योजना : अपनों को आयुष्मान, बाहर वालों पर नहीं मेहरबान
- सरकारी अस्पतालों में महंगा इलाज, योजना से भी बाहर
- राज्य के स्थायी निवासियों को गोल्डन कार्ड पर कैशलेस इलाज
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त्रिवेंद्र सरकार ने आयुष्मान योजना को लागू करने में बेशक अमीर और गरीब में कोई फर्क नहीं किया है। लेकिन अपनों को आयुष्मान के दायरे में लाने वाली सरकार की यह मेहरबानी राज्य से बाहर के उन कमजोर, गरीब और बेरोजगारों पर नहीं हुई, जो मजदूरी और काम धंधा करने को उत्तराखंड आए हैं। वे गरीब हैं, उनके पास इलाज के लिए पैसा नहीं है। फिर भी वे मुफ्त इलाज की योजना के हकदार नहीं है। उनकी दिक्कत सरकारी अस्पतालों में इलाज महंगा कर दिए जाने से और ज्यादा बढ़ गई है।
उत्तराखंड में काम धंधे के लिए दूसरे राज्यों से आए गरीबों को अटल आयुष्मान योजना में कैशलेस इलाज की सुविधा नहीं है। केंद्र सरकार ने 23 सितंबर 2018 को देश के गरीब परिवारों को पांच लाख तक मुफ्त इलाज देने के लिए आयुष्मान भारत योजना शुरू की थी। केंद्र के मानकों के अनुसार उत्तराखंड के 5.37 लाख परिवार आयुष्मान योजना के दायरे में है। 25 दिसंबर 2018 को त्रिवेंद्र सरकार ने योजना का विस्तार कर प्रदेश के 23 लाख से अधिक परिवारों को अटल आयुष्मान योजना के तहत कैशलेस इलाज की सुविधा प्रदान की। सरकार ने यह भी तय किया कि प्रदेश के स्थायी निवासियों को योजना का लाभ मिलेगा और राशन कार्ड के रिकॉर्ड के आधार पर लाभार्थियों के गोल्डन कार्ड बनेंगे।
प्रदेश में ऐसे लोगों की आबादी भी लाखों में है, जो नौकरी पेशा, कारोबार या मजदूरी करने के लिए पिछले कई सालों से उत्तराखंड में निवास कर रहे हैं। लेकिन वे योजना में मुफ्त इलाज कराने के हकदार नहीं है। दूसरी तरफ सरकार ने बाहरी लोगों के लिए सरकारी अस्पतालों में इलाज महंगा कर दिया है। पहले जहां ओपीडी का पर्चा 15 रुपये में बनता था। अब वही पर्चा 30 रुपये में बन रहा है। इसी तरह अल्ट्रासाउंड कराने के लिए अब 700 रुपये देने होंगे। जबकि पहले 471 रुपये में अल्ट्रासाउंड हो जाता था।
अटल आयुष्मान योजना के तहत प्रदेश के स्थायी निवासियों को ही पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा है। प्रदेश से बाहर के लोगों को योजना में लाभ देने का प्रावधान नहीं है।
- डॉ.अभिषेक त्रिपाठी, निदेशक (प्रशासन), अटल आयुष्मान योजना
आयुष्मान योजना में इलाज की सुविधा नहीं
मूल रूप से उत्तर प्रदेश के नजीमाबाद के रहने वाले इरशाद पिछले पांच सालों से देहरादून में राज मिस्त्री का काम करते हैं। उन्हें आयुष्मान योजना में इलाज की सुविधा नहीं है। एक बार सीएचसी सेंटर पर योजना का कार्ड बनवाने के लिए पता करने भी गए। जहां बताया गया कि राशन कार्ड लेकर आओ। उनके पास राशन कार्ड ही नहीं था। जब केंद्र सरकार की गरीबों के लिए आयुष्मान योजना है तो सबको लाभ मिलना चाहिए।
ओपीडी पंजीकरण शुल्क
अस्पताल नई दरें राज्य से बाहर के मरीजों के लिए
पीएचसी 15 30
सीएचसी 20 40
जिला अस्पताल 30 60
आईपीडी पंजीकरण शुल्क
अस्पताल आयुष्मान कार्ड धारक राज्य से बाहर के मरीजों के लिए
पीएचसी 15 30
सीएचसी 50 100
जिला अस्पताल 120 240