मासूम से दरिंदगी पर गरमाया सदन, विपक्ष का हंगामा
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अध्यक्ष ने तीन बार शून्यकाल चलाने की कोशिश की, लेकिन विपक्ष अपनी मांग पर अड़ा रहा। इसके बाद विपक्ष भोजन अवकाश के बाद भी नहीं माना। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष के विधायक वेल में जा पहुंचे।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सारे काम रोककर इस घटना पर चर्चा करानी चाहिए। स्पीकर ने कहा कि चर्चा नियम 58 के तहत ही स्वीकार की जाएगी। इस पर विपक्ष वेल में जा पहुंचा और सरकार के खिलाफ नारेबाजी हुई।
विधायकों ने कागज फाड़कर उसके गोले बनाए और स्पीकर की ओर उछाले। इस दौरान नेता सदन भी सदन में मौजूद थे। करीब दो घंटे की कार्यवाही के बाद सदन स्थगित कर दिया गया।
विपक्ष ने नहीं चलने दिया सदन
बुधवार को प्रश्नकाल समाप्त होते ही नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट ने पीठ से हल्द्वानी में मासूम बच्ची से दुष्कर्म, हत्या पर सरकार को कठघरे में खड़ा किया। कहा कि ऐसे गंभीर मसले पर सरकार जवाब देने से बच रही है जिससे पूरे राज्य की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़ा हो गया है।
बच्ची की हत्या से पूरा प्रदेश दहल गया है, जिस पर सरकार का दायित्व बनता है कि स्थिति स्पष्ट की जाए। भट्ट ने कहा कि नेता सदन ने मंगलवार को विपक्ष से इस मुद्दे पर हुई चर्चा में आश्वस्त किया था कि इस पर नियम 310 में चर्चा होगी।
इस पर संसदीय कार्यमंत्री इंदिरा हृदयेश ने आपत्ति जताई। वहीं, विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने कहा कि इस मामले को नियम 58 में सुना जाएगा। अध्यक्ष से बार-बार मांग करने के बाद विपक्ष के सदस्य वेल में उतर आए, जिससे एक बजे तक सदन स्थगित कर दिया।
एक बजे अध्यक्ष ने दोबारा सदन को डेढ़ बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। डेढ़ बजे सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, लेकिन विपक्ष अपनी मांग पर अड़ा रहा और वेल में उतरकर सरकार के विरोध में नारेबाजी करने लगा। कुंजवाल ने सदन को तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।
इसके बाद भोजन अवकाश के बाद सदन की कार्यवाही शुरू हुई लेकिन विपक्ष के अपनी मांग पर अड़े रहने के चलते करीब दो घंटे की कार्यवाही के बाद सदन स्थगित कर दिया गया।
सदन में किसने क्या कहा
सरकार कानून व्यवस्था जैसे संवेदनशील विषय पर चर्चा कराने को तैयार नहीं, लिहाजा विपक्ष विरोध जताएगा ही।
-अजय भट्ट, नेता प्रतिपक्ष
नियम 58 और नियम 310 में चर्चा के लिहाज से फर्क नहीं है। पहले तय हो गया था कि नियम 58 के तहत चर्चा करा ली जाएगी। विपक्ष की मंशा सदन चलाने की नहीं है। दो दिन बाद ही सदन को अव्यवस्थित कर दिया गया। सरकार तो सत्र विस्तार के लिए भी तैयार थी।
-इंदिरा हृदयेश, संसदीय कार्यमंत्री
यह है नियम 310 और 58
नियम 310 और 58 कार्य स्थगन प्रस्ताव हैं। इसके तहत सदन की समस्त कार्यवाही को रोककर चर्चा करवाई जाती है। नियम 310 के तहत जिस मुद्दे पर चर्चा होती है उस पर सदस्यों का मतदान करवाने का प्रावधान भी है, जिससे सरकार बचती है। जबकि नियम 58 में केवल चर्चा होती है और सरकार को जवाब देना होता है।