विस सत्र में महामहिम बने मास्साब और विपक्ष अनुशासित छात्र
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विधानसभा बजट सत्र की शुरूआत हुई तो सालों पुरानी संसदीय परंपरा टूट गई। उत्तराखंड राज्यपाल के एक घंटे से भी अधिक समय तक चले अभिभाषण के दौरान विपक्ष ने पूरे संयम का परिचय दिया। विरोध हुआ न आरोप प्रत्यारोप।
एक अच्छे और अनुशासित छात्र की तरह पूरी तल्लीनता के साथ विपक्ष ने राज्यपाल का अभिभाषण सुना। हालांकि, समूचे विपक्ष ने इसी अभिभाषण को भोजनावकाश के बाद झूठ का पुलिंदा साबित करने में कसर नहीं छोड़ी। हंगामा किया तो पांच मिनट बाद ही स्पीकर ने सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी।
राज्यपाल डॉ. कृष्णकांत पाल तय समय पर विधानसभा परिसर पहुंचे और परेड की सलामी लेने के बाद स्पीकर, मुख्यमंत्री, संसदीय कार्यमंत्री के साथ सदन के भीतर पहुंचे। अभिभाषण की प्रक्रिया पूरी हुई तो कार्यवाही को भोजनावकाश तक स्थगित कर दिया। इसके बाद अपराह्न तीन बजे अभिभाषण के वाचन की कार्यवाही शुरू हुई तो समूचा विपक्ष दहाड़ने लगा।
भाजपा के मदन कौशिक ने सबसे पहले विरोध शुरू किया और पूरे अभिभाषण को झूठ का पुलिंदा बताया। इसी बीच नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट, तीरथ सिंह रावत, पुष्कर सिंह धामी, प्रेमचंद अग्रवाल समेत तमाम विधायकों ने विरोध शुरू कर दिया।
भट्ट ने कहा कि गैरसैंण इस प्रदेश की जनता से जुड़ा भावनात्मक पहलू है और राज्यपाल के अभिभाषण में उसका जिक्र तक नहीं है। इस पर नेता सदन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने समझाने का प्रयास किया कि वहां इन्फ्रास्ट्रक्चर पूरा कर लें, तभी निर्णय लेंगे। लेकिन हंगामा बढ़ गया और सदन को दस मार्च सुबह ग्यारह बजे तक स्थगित कर दिया।
फिर बाहर निकला बोतल से गैरसैंण का जिन्न
बजट सत्र के पहले ही दिन गैरसैंण का जिन्न बोतल से बाहर निकल आया। विपक्ष ने राज्यपाल के अभिभाषण में गैरसैंण का जिक्र न होने का मुद्दा उठाया। नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट ने तो साफ कहा कि वे सदन नहीं चलने देंगे। उधर, मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी लहजा सख्त ही रखा। उन्होंने साफ कहा कि विकास के मसले पर राजनीति न करें।
सरकार पहले गैरसैंण में अवस्थापना विकास कराएगी और इसके बाद सबकी राय के आधार पर गैरसैंण को राजधानी बनाना तय करेगी। गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने के मुद्दे पर गैरसैंण विधानसभा सत्र में जमकर हंगामा बरपा था। विपक्ष ने सरकार से स्थायी राजधानी के मसले पर राय स्पष्ट करने की मांग को लेकर सदन में खासा हंगामा काटा था।
गैरसैंण का सत्र तो दो दिन में ही सिमट गया था। अब दून में आयोजित बजट सत्र के पहले ही दिन इस मसले ने सिर उठा लिया। नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट ने आरोप जड़ा कि गैरसैंण पर सरकार की मंशा साफ नहीं है। राज्यपाल के अभिभाषण में गैरसैंण का कोई जिक्र तक नही है। नेता प्रतिपक्ष ने इस मामले को लेकर सदन न चलने देने तक की धमकी दी।
हाल यह रहा कि विपक्ष के तेवर को देखते हुए मुख्यमंत्री हरीश रावत को सफाई देने के लिए मैदान में उतरना पड़ा। हालांकि रावत का लहजा सख्त ही रहा। मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार गैरसैंण मामले को लेकर योजनाबद्ध रूप से काम कर रही है। गैरसैंण में पहले अवस्थापना विकास किया जा रहा है।
इसके बाद सबकी राय लेकर गैरसैंण को राजधानी बनाना तय किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने राज्य के विकास के मुद्दे को राजनीति से अलग रखने की भी हिदायत दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि गैरसैंण पर चर्चा कराने से सरकार नहीं बच रही है। गैरसैंण पर अंतिम निर्णय लेने से पूर्व गैरसैंण पर चर्चा कराएगी।